
बिहार के सहरसा का मत्स्यगंधा अब विश्वस्तरीय पर्यटन स्थलों में शामिल होगा. इसके लिए बिहार सरकार की अनुशंसा पर केंद्र सरकार ने लगभग एक सौ करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है. इस बड़ी राशि से मत्स्यगंधा झील में चारों ओर सीढ़िया बनेंगी. इस पार से उस पार जाने के लिए जगह-जगह पुल बनेंगे. वहीं पानी के बीच में जगह-जगह स्टेच्यू लगाये जाएंगे. परियोजना के अनुसार अब राजगीर की तर्ज पर मत्स्यगंधा झील में ग्लास ब्रिज का निर्माण कराया जाएगा और यह झील के आकर्षण का मुख्य केंद्र होगा. लाइट, साउंड और म्यूजिक से सराबोर मत्स्यगंधा परिसर हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करेगा. भारत के 40 स्थलों में बिहार के दो स्थलों को पर्यटन हब बनाने की स्वीकृति मिली है, जिसमें कैमूर में इको टूरिज्म एंड एडवेंचर पार्क और सहरसा में मत्स्यगंधा झील को अत्याधुनिक बनाने की योजना शामिल है.
मत्स्यगंधा जलाशय की कहानी
आज से 28 वर्ष पूर्व साल 1996 में सहरसा के तत्कालीन जिला पदाधिकारी तेज नारायण लाल दास ने शहर में एक झील बनाने की परिकल्पना की और जिले के विकास योजनाओं की 60 लाख की राशि से शहर के उत्तरी छोर में लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबे और आधा किलोमीटर चौड़े झील का निर्माण कराया. झील के बीच पराशर ऋषि और मत्स्यगंधा की आदमकद प्रतिमा मूर्ति लगाई गई, साथ ही पानी के बीचोबीच एक फव्वारा का निर्माण कराया गया, जो रात में रंग-बिरंगी रोशनी और पानी के साथ अदभुत छटा बिखेरती थी. झील के चारों ओर परिक्रमा पथ बनाए गए. पर्यटकों के बैठने के लिए जगह-जगह बेंच बनवाए गए. चारों ओर चंदन, देवदार, अशोक जैसे बेशकीमती पेड़ लगवाए गए.
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झील में रंग-बिरंगे पैडल वोट, पतवार वोट और जलपरी नामक मोटर वोट डाले गए. दो मार्च 1997 को राज्य सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने मत्स्यगंधा झील का उदघाटन किया था. बिहार सरकार के तत्कालीन खान एवं भूतत्व मंत्री स्थानीय विधायक शंकर प्रसाद टेकरीवाल की अध्यक्षता में हुए उदघाटन समारोह में तत्कालीन सांसद दिनेश चंद्र यादव सहित विधायक अशोक कुमार सिंह, प्रो अब्दुल गफूर, मो महबूब अली कैसर व परमेश्वरी प्रसाद निराला विशिष्ट अतिथि थे. लगभग एक से डेढ़ दशक तक पर्यटक यहां आते रहे और वोटिंग का आनंद लेते रहे. मत्स्यगंधा परिसर में ही पर्यटन विभाग की ओर से थ्री स्टार होटल कोसी विहार का निर्माण कराया गया. इस होटल का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने किया था.
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रखरखाव के अभाव में जीर्ण-शीर्ण हो गया जलाशय
झील की जमीन के अधिग्रहण और रैयतों के भुगतान में हुए विलंब के कारण प्रशासन ने इसके सौंदर्य को बरकरार रखने की दिशा में पूरी तरह लापरवाही बरती और झील पूरी तरह जीर्ण-शीर्ण हो गया. झील का पानी पूरी तरह सूख गया. पूरा झील या तो चारागाह बन गया या फिर बच्चों के खेलने का मैदान बनकर रह गया. विदेशी पंछियों का आना बंद हो गया. बोट का तैरना बंद हो गया और सैलानियों के आना भी बंद हो गया. शैलानियों के नहीं आने से होटल कोसी विहार भी बंद होने के कगार पर आ गया.
सीएम नीतीश ने कहा था- पहले से बेहतर बनेगा झील
साल 2012 में सेवा यात्रा के क्रम में अपने तीन दिवसीय प्रवास के क्रम में सहरसा आये मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी मत्स्यगंधा झील का अवलोकन किया और इसे और भी खूबसूरत बनाने की बात कहते कहा था कि मत्स्यगंधा पहले से भी बेहतर बनेगा, लेकिन झील के सौंदर्यीकरण की दिशा में कोई काम नहीं हो सका. हालांकि बाद में सहरसा के जिला पदाधिकारी बनकर आये बिनोद सिंह गुंजियाल और एसडीएम सौरभ जोरवाल के संयुक्त प्रयास से मृत हो रहे मत्स्यगंधा जलाशय में जान फूंकने का प्रयास किया गया. झील की सफाई कराई गई, पानी डलवाये गए, नए सिरे से बोट मंगवाए गए और उन्हें तैराया गया. झील में पानी का स्थायी श्रोत नहीं होने के कारण अधिकारियों का यह प्रयास भी लंबे समय तक नहीं टिक सका और लगभग एक साल से पहले ही झील अपनी पुरानी स्थिति में लौट गई.
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जल-जीवन हरियाली योजना में हुआ शामिल
पर्यावरण संतुलन के लिए बिहार सरकार द्वारा साल 2020 में शुरू किए गए जल-जीवन-हरियाली योजना में जिले के अन्य तालाब, पोखर और कुओं के साथ इस जलाशय को भी शामिल किया गया. लगभग एक करोड़ रुपये की योजना से झील की मिट्टी काटकर निकाली गई. जलाशय को पानी से लबालब किया गया. नए स्तर से सीढ़ियों के निर्माण कराया गया. मेंटेनेंस के लिए इसे निजी हाथों में दे बोट का परिचालन शुरू कराया गया. होटल कोसी विहार को भी निजी हाथों में दे उसे एक बार फिर चलाने का प्रयास हुआ. ऐसा लगा कि झील के प्रारंभिक दिन लौट गए, लेकिन पानी की कमी ने एक बार फिर वही पुरानी कहानी लौटा दी. पूरी झील में जलकुम्भी का राज हो गया और बोट का परिचालन बंद हो गया. एक बार फिर सैलानियों के आने पर ब्रेक लग गया और झील किसी तारणहार की ओर निहारने लगा. इस बार विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल बनाने के उद्देश्य से एक सौ करोड़ रुपये की योजना मिलने से मत्स्यगंधा के दिन बहुरने के आसार दिखने लगे हैं.
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