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ममता के 'पावर बैलेंस फॉर्मूले' से थमेगी बगावत? भतीजे अभिषेक के कतरे पर, पुराने दिग्गजों को बड़ी जिम्मेदारी

ममता बनर्जी ने पार्टी संगठन में बदलाव करते हुए अपने भतीजे और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव (जनरल सेक्रेटरी) बनाए रखा है. हालांकि, इस बार उन्होंने राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन को डिप्टी जनरल सेक्रेटरी नियुक्त किया है.

ममता के 'पावर बैलेंस फॉर्मूले' से थमेगी बगावत? भतीजे अभिषेक के कतरे पर, पुराने दिग्गजों को बड़ी जिम्मेदारी
ममता बनर्जी ने टीएमसी में कई बड़े बदलाव किए हैं
  • ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के संगठन में व्यापक बदलाव कर पार्टी को व्यवस्थित करने की पहल की है
  • अभिषेक बनर्जी अब दो और राष्ट्रीय उप महासचिवों के साथ मिलकर पार्टी के फैसलों में सहयोग करेंगे
  • विधानसभा चुनाव हार के बाद अभिषेक बनर्जी की भूमिका को लेकर पार्टी में असंतोष और विद्रोह उभरा है
कोलकाता:

टीएमसी में मचे घमासान के बीच अध्यक्ष ममता बनर्जी आखिरकार अब अपने संगठन को व्यवस्थित करने में जुट गई हैं. पार्टी में विद्रोह और सत्ता को चुनौती का सामना करते हुए, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने पार्टी संगठन में व्यापक बदलाव किया है. ममता बनर्जी ने अब भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के पर कतर दिए हैं. अब अभिषेक दो और राष्ट्रीय महासचिवों के साथ काम करेंगे.

अभी तक अभिषेक बनर्जी पार्टी में मुखिया की अहमियत से काम करते थे. उनकी बात पार्टी में सर्वोपरि होती थी, यही बात पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष का मुख्य कारण थे. अब सांसद डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन फैसलों में अभिषेक बनर्जी की मदद करेंगे. संदेश स्पष्ट है - अभिषेक बनर्जी अब सवालों से परे नहीं हैं.

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तृणमूल में चल रहे मौजूदा विद्रोह को ममता बनर्जी के खिलाफ विद्रोह के रूप में नहीं देखा जा रहा है. विधानसभा चुनाव में हार के तुरंत बाद हुई एक बैठक में, ममता बनर्जी ने कथित तौर पर नेताओं से चुनाव में अपने भतीजे की भूमिका की सराहना करने को कहा था. सूत्रों के अनुसार, इस कदम से कई लोग नाराज हो गए, क्योंकि वे अभिषेक बनर्जी के काम करने के तरीके को पार्टी की हार का मुख्य कारण मानते थे.

यही पहला कारण था जिसने विद्रोह को जन्म दिया. उसी समय से तृणमूल विधायक दल में दरारें पड़नी शुरू हो गईं. 19 मई को कालीघाट में आयोजित एक अन्य बैठक में, 'बागी' नेता ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा ने पहली बार खुलकर अपनी असहमति व्यक्त की. यह असहमति बाद में विद्रोह में बदल गई और इसी के चलते ममता बनर्जी को पार्टी संगठन में बदलाव करके सुधार करने पर मजबूर होना पड़ा है.

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वहीं अन्य महत्वपूर्ण नियुक्तियों में, वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है, जो पीढ़ीगत और संगठनात्मक बदलाव का संकेत है. सुब्रता बख्शी राष्ट्रीय कार्य समिति में उपाध्यक्ष बने रहेंगे.

पार्टी के सभी विभागों में नए चेहरे शामिल किए गए हैं. सजदा अहमद, ममता ठाकुर, नयना बंद्योपाध्याय और स्वाति खांडेकर को पश्चिम बंगाल प्रदेश तृणमूल कांग्रेस का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है. वहीं सांसद सायनी घोष तृणमूल के युवा विंग की प्रमुख बनी रहेंगी.

ममता बनर्जी ने अपने वफादारों और पुराने नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपी हैं, जो पार्टी में चल रहे विद्रोह के बावजूद अभी भी 'दीदी' के साथ हैं. शुक्रवार को टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने 'विद्रोही' विधायकों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे 'प्रशासनिक दबाव' में पार्टी तोड़ रहे हैं.
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कुणाल घोष ने कहा, "अभी एक महीना भी नहीं बीता है. उनके (विद्रोही विधायकों) हाथों पर चुनाव की स्याही भी नहीं मिटी है, भाजपा ने अभी तक अपने मंत्रियों को विभाग भी आवंटित नहीं किए हैं, और वे ऐसा कर रहे हैं. वे ममता बनर्जी के नाम की वजह से जीते. उनके कामों से उनके चरित्र का स्पष्ट पता चलता है. लेकिन पार्टी कार्यकर्ता अभी भी हमारे साथ हैं."

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