महाराष्ट्र की राजनीति में कोल्हापुर के मशहूर दुग्ध संघ गोकुल को लेकर नई जंग छिड़ गई है. राज्य सरकार के फैसले के बाद कांग्रेस और महायुति सरकार आमने-सामने आ गई हैं. कांग्रेस का आरोप है कि गोकुल के चुनाव में बहुमत हासिल नहीं कर पाने के बाद सरकार नियम बदलकर दुग्ध संघ पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है. वहीं सरकार का कहना है कि नए निदेशकों की नियुक्ति केवल विशेषज्ञता के आधार पर होगी और इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है.
दरअसल, महाराष्ट्र कैबिनेट ने गोकुल यानी कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ में पांच निदेशकों की नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. इनमें से चार निदेशकों को मतदान का अधिकार भी होगा. इस फैसले के बाद विवाद खड़ा हो गया है क्योंकि हाल ही में हुए गोकुल चुनाव में कांग्रेस समर्थित पैनल ने सबसे अधिक सीटें जीती थीं.
कांग्रेस क्या आरोप लगा रही है ?
गोकुल के चुनाव में कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री सतेज पाटिल के नेतृत्व वाले पैनल ने 25 में से 13 निदेशक पदों पर जीत दर्ज की थी, जबकि महायुति समर्थित पैनल को 12 सीटें मिली थीं. ऐसे में कांग्रेस का आरोप है कि सरकार अतिरिक्त निदेशकों की नियुक्ति कर चुनावी जनादेश को पलटने की कोशिश कर रही है.
सतेज पाटिल ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गोकुल को अमूल के हवाले करने की साजिश रची जा रही है. उनका कहना है कि उनके पैनल को सबसे ज्यादा सीटें मिलने के बावजूद सरकार वोटों का गणित बदलकर नियंत्रण हासिल करना चाहती है.
पाटिल ने दावा किया कि गुजरात की एक संस्था सरदार मिल्क फेडरेशन देश के 20 राज्यों में विस्तार की योजना पर काम कर रही है और विभिन्न दुग्ध संघों पर नियंत्रण स्थापित करना चाहती है. उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी कोशिशें की जा रही हैं जिससे भविष्य में देश के डेयरी बाजार में केवल अमूल और मदर डेयरी जैसे बड़े ब्रांड ही प्रमुख रूप से बचें.
विरोध मार्च निकालने के ऐलान
कांग्रेस नेता ने इस फैसले के खिलाफ 9 नवंबर को कोल्हापुर में विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया है. साथ ही उन्होंने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को अदालत में भी चुनौती देगी.
इस विवाद में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी खुलकर उतरे हैं. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर भाजपा पर निशाना साधा. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि गोकुल चुनाव में हार मिलने के बाद भाजपा ने नियमों में बदलाव कर बहुमत हासिल करने की कोशिश की.
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने कहा कि दुग्ध उत्पादकों ने चुनाव में भाजपा को हराया, लेकिन उसके बाद चार नए निदेशक जोड़कर संख्या बढ़ाने और बहुमत हासिल करने की कोशिश की गई. उन्होंने इसे दुग्ध उत्पादकों के वोट की चोरी और जनादेश से छेड़छाड़ की कोशिश बताया. राहुल गांधी ने यह भी कहा कि सत्ता में बने रहने के लिए भाजपा किसी भी हद तक जा सकती है, लेकिन किसान और दुग्ध उत्पादक इसे भूलेंगे नहीं.
दूसरी ओर, महाराष्ट्र सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है. राज्य के मंत्री हसन मुश्रीफ ने स्पष्ट कहा कि नए प्रावधान का मतलब यह नहीं है कि राजनीतिक नेताओं या उनके रिश्तेदारों को निदेशक बनाया जाएगा.
14 निदेशकों का कोरम जरूरी
मुश्रीफ ने कहा कि केवल ऐसे विशेषज्ञों की नियुक्ति होनी चाहिए जिनका किसी भी राजनीतिक दल से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध न हो. उन्होंने यह भी कहा कि उनका बेटा या कोई अन्य राजनीतिक व्यक्ति विशेषज्ञ निदेशक नहीं बनेगा.
मंत्री ने गोकुल के उपनियमों का हवाला देते हुए बताया कि किसी बैठक के लिए 14 निदेशकों का कोरम जरूरी है. उनके मुताबिक, एक पिछली बैठक 12 निदेशकों की अनुपस्थिति के कारण नहीं हो सकी थी और 10 नवंबर को प्रस्तावित अगली बैठक में भी ऐसी स्थिति बनने की आशंका थी. सरकार का कहना है कि विशेषज्ञ निदेशकों की व्यवस्था संस्थान के कामकाज को सुचारु बनाने के उद्देश्य से की गई है.
फिलहाल गोकुल को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक और कानूनी लड़ाई का रूप लेता दिख रहा है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ सहकारी दुग्ध क्षेत्र में भी बड़ा असर डाल सकता है.
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