महाराष्ट्र में दूध में मिलावट के एक बड़े और संगठित रैकेट का खुलासा हुआ है. खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की जांच में सामने आया है कि डिटर्जेंट, इमल्सीफायर और अन्य रसायनों की मदद से तैयार किया गया सिंथेटिक दूध सप्लाई चेन के जरिए डेयरियों तक पहुंचाया जा रहा था. कार्रवाई के दौरान 25 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि हजारों लीटर मिलावटी दूध नष्ट कर दिया गया.
महाराष्ट्र FDA ने राज्यभर में फैले एक संगठित दूध मिलावट नेटवर्क के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू किया है. पुणे के मंचर में दर्ज अपराध की जांच के दौरान अब तक 37 आरोपियों की पहचान की गई है. इनमें कथित मास्टरमाइंड सुशांत बाबनराव हिंगे समेत 25 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और आरोपपत्र भी दाखिल किए जा चुके हैं.
दूध की आवाजाही का पूरा ट्रेल आया सामने
जांच के दौरान FDA को ऐसे दस्तावेज और रिकॉर्ड मिले हैं जिनसे पता चला कि कथित तौर पर मिलावटी और सिंथेटिक दूध की आपूर्ति एक संगठित नेटवर्क के माध्यम से एम/एस इंदापुर डेयरी एंड मिल्क प्रोडक्ट्स लिमिटेड (सोनाई डेयरी) तक की जा रही थी. अधिकारियों ने टैंकर चालान, सप्लाई रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं, जिनसे दूध की आवाजाही का पूरा ट्रेल सामने आया है.
जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह दूध पहले महालक्ष्मी मिल्क एंड मिल्क प्रोडक्ट्स से निकलकर योगिनीनाथा मिल्क सप्लायर्स के माध्यम से आगे भेजा जाता था और फिर डेयरी तक पहुंचता था. इसके अलावा एक अलग और सीधी सप्लाई लाइन भी सामने आई है, जिसके जरिए विशेष रूप से मिलावटी दूध को सोनाई डेयरी तक पहुंचाया जा रहा था.
FDA की प्रयोगशाला जांच में कई दूध और इमल्सीफायर नमूनों में डिटर्जेंट और नॉनिलफेनोल एथॉक्सिलेट (Alphox-200 Ethoxylate) की मौजूदगी की पुष्टि हुई है. अधिकारियों का कहना है कि इन रसायनों की वजह से दूध मानव उपभोग के लिए असुरक्षित हो जाता है.
16,730 लीटर केमिकल युक्त दूध किया नष्ट
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी सिंथेटिक दूध तैयार करने के लिए स्किम्ड मिल्क पाउडर का इस्तेमाल एसएनएफ (Solid Not Fat) स्तर बढ़ाने के लिए करते थे. वहीं प्रोटीन की मात्रा दिखाने के लिए व्हे पाउडर, फैट बढ़ाने के लिए खाद्य तेल और मिश्रण को दूध जैसा रूप देने के लिए इमल्सीफायर और डिटर्जेंट मिलाए जाते थे.
FDA ने बताया कि इस नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई के दौरान मालशिरस स्थित दो इकाइयों से 16,730 लीटर रसायनयुक्त और असुरक्षित दूध जब्त कर नष्ट किया गया. इस दूध की अनुमानित कीमत करीब 6.69 लाख रुपये बताई गई है. अधिकारियों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई होने से यह दूध बाजार तक पहुंचने से पहले ही रोक लिया गया, जिससे बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को संभावित नुकसान से बचाया जा सका.
26 खाद्य प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित के आदेश
FDA और पुलिस फिलहाल केवल दूध जब्त करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे नेटवर्क की आर्थिक और डिजिटल जांच भी कर रहे हैं. जांच एजेंसियां वर्ष 2024 से जून 2026 तक के वित्तीय लेन-देन, डिजिटल रिकॉर्ड और सप्लाई चेन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही हैं. लक्ष्य उन सभी कड़ियों तक पहुंचना है जो रसायन उपलब्ध कराने से लेकर मिलावटी दूध के उत्पादन और वितरण तक इस नेटवर्क में शामिल रही हैं.
अधिकारियों का कहना है कि यह एक अत्यंत संगठित और बड़े पैमाने पर संचालित होने वाला रैकेट था. जांच का मकसद केवल दोषियों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि इस पूरे अवैध तंत्र को जड़ से खत्म करना है ताकि भविष्य में जहरीले और मिलावटी दूध की सप्लाई को पूरी तरह रोका जा सके.
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