लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में सितंबर महीने में हुई हिंसा और आगजनी की जांच को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपी जा सकती है.
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया है कि वह 72 घंटों के भीतर केंद्र को एक रिपोर्ट सौंपे, जिसमें यह बताया जाए कि क्या इस मामले में 'साइबर आतंकवाद' से जुड़ी धाराएं लागू होती हैं या नहीं.
हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह जांचने को कहा है कि क्या इस मामले में NIA से जांच कराई जानी चाहिए.
पंजाब पुलिस को अपनी जांच के दौरान कुछ ऐसे सबूत मिले हैं, जिनसे प्रथम दृष्टया यह संकेत मिलता है कि इसमें आईटी एक्ट की धारा 66F लागू हो सकती है, जो 'साइबर आतंकवाद' से जुड़ी है.
72 घंटों में सौंपनी होगी रिपोर्ट
अपराध की गंभीरता को देखते हुए, हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को NIA एक्ट की धारा 6 के तहत केंद्र को रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है.
इस प्रावधान के अनुसार, यदि राज्य सरकार को किसी ऐसे अपराध (जो NIA एक्ट के दायरे में आता है) के होने की जानकारी मिलती है, तो उसे तुरंत केंद्र को बताना होता है.
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को 72 घंटों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है, जबकि केंद्र सरकार से कहा गया है कि रिपोर्ट मिलने के सात दिनों के भीतर वह इस पर उचित निर्णय ले.

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हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर केंद्र सरकार जांच NIA को सौंपने का फैसला करती है, तो पंजाब पुलिस को अपनी जांच रोकनी होगी और सभी संबंधित दस्तावेज केंद्रीय एजेंसी को सौंपने होंगे.
मामले की संवेदनशीलता पर जोर देते हुए, हाई कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी को इस मामले को पूरी तत्परता और गंभीरता से लेना चाहिए. अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे 17 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में कोर्ट के सामने अब तक के घटनाक्रम की जानकारी रखें.
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यौन उत्पीड़न की अफवाहों के बाद भड़की हिंसा
यह मामला सितंबर में LPU परिसर में हुई व्यापक हिंसा से जुड़ा है, जो एक छात्रा के कथित यौन उत्पीड़न की अफवाहों के बाद शुरू हुई थी. इन अफवाहों के कारण छात्रों के बीच अशांति फैल गई, जिसके चलते यूनिवर्सिटी परिसर में आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं हुईं.
हालांकि पुलिस ने कथित यौन उत्पीड़न की जांच के लिए एक आपराधिक मामला दर्ज किया था, लेकिन जांचकर्ता इस बात की पुष्टि नहीं कर सके कि वास्तव में ऐसी कोई घटना हुई थी या नहीं.

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इसके बाद स्थिति और बिगड़ गई, जिसमें संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा और कई दुकानों में लूटपाट की खबरें सामने आईं. हिंसा के बाद, यूनिवर्सिटी ने 28 सितंबर से 10 दिनों के लिए कक्षाएं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां निलंबित कर दीं.
याचिका में CBI जांच की मांग
यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) के जरिए हाई कोर्ट पहुंचा. इसे LPU के छात्र रवि राज ने दायर किया था, जिसमें हिंसा की जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) से कराने की मांग की गई थी.
याचिकाकर्ता का आरोप है कि कैंपस में छात्रों के इकट्ठा होने की जानकारी पुलिस को मिलने के बाद भी, वहां घंटों तक आगजनी और लूटपाट होती रही.
जहां PIL में CBI जांच की मांग की गई थी, वहीं ताजा निर्देशों से NIA जांच की संभावना भी सामने आ गई है. ऐसा खासकर पंजाब पुलिस की जांच के दौरान सामने आए 'साइबर आतंकवाद' के पहलू को देखते हुए हुआ है.
17 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई से यह साफ हो सकता है कि क्या केंद्र सरकार इस मामले को इतना गंभीर मानती है कि इसकी जांच NIA से कराई जाए.
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