दिल्ली पुलिस ने जनकपुरी में चल रहे इंश्योरेंस साइबर ठगी के नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने कॉल सेंटर के मालिक समेत 43 लोगों को पकड़ा है, इनमें 32 महिलाएं और 11 पुरुष शामिल हैं.
पांच मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, इनमें मालिक, एडमिन, एचआर मैनेजर और मैनेजर शामिल हैं.
कैसे फंसाते थे लोग?
आरोपी इंश्योरेंस कंपनी के कर्मचारी बनकर पॉलिसीधारकों को फोन करते थे.
पॉलिसी अपग्रेड, अतिरिक्त फायदे और आकर्षक स्कीम का लालच देकर लोगों को फंसाते थे.
PNB मेटलाइफ, SBI इंश्योरेंस, ICICI लोम्बार्ड और भारती AXA के ग्राहकों को निशाना बनाया जाता था.

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कॉल सेंटर से क्या-क्या मिला?
कॉल सेंटर से 2 लाख रुपये नकद, 48 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और 38 सिम कार्ड बरामद किए गए.
ग्राहकों का डेटा रखने वाले 619 पन्ने, 67 रजिस्टर और 38 फर्जी कंपनी आईकार्ड भी मिले.
आरोपियों के मोबाइल में मिले दो बैंक खातों का संबंध साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज पांच शिकायतों से मिला.
पूरा नेटवर्क कैसे चलता था?
पुलिस के मुताबिक, कॉल सेंटर का मालिक ग्राहकों का निजी डेटा जुटाकर टेलीकॉलर्स को उपलब्ध कराता था.
मैनेजर और एचआर के जरिए ग्राहकों को मालिक तक पहुंचाया जाता था, फिर बैंक खातों में पैसे मंगवाए जाते थे.
जनकपुरी थाने में BNS की धाराओं 318(4), 61(2) और 3(5) के तहत FIR दर्ज की गई है.
पुलिस अब बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच कर रही है. यह भी पता लगाया जा रहा है कि कितने लोग ठगी का शिकार हुए.
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