- कोलकाता एयरपोर्ट परिसर में स्थित ऐतिहासिक बांकरा मस्जिद को दूसरी जगह शिफ्ट करने का विवाद शुरू हो गया है
- बांग्लादेश में मस्जिद हटाने के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन हुए और बीजेपी विधायक सौरव सिकदर के खिलाफ नारे लगे
- बीजेपी विधायक सौरव सिकदर ने मस्जिद को शिफ्ट करने का समर्थन करते हुए सुरक्षा और ऑपरेशनल मुद्दे बताए हैं
कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अंदर मौजूद ऐतिहासिक बांकरा मस्जिद को दूसरी जगह शिफ्ट करने के विवाद ने अब सीमा पार भी तूल पकड़ लिया है. बांग्लादेश में इसको लेकर विरोध प्रदर्शन हुए, जहां प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर बीजेपी विधायक सौरव सिकदर के खिलाफ 'जान से मारने की धमकी' वाले नारे लगाए.
कोलकाता एयरपोर्ट परिसर में मौजूद बांकरा मस्जिद (जिसे गौरीपुर जामा मस्जिद भी कहा जाता है) उसमें शुक्रवार की नमाज पर पाबंदी की खबरों के बाद बांग्लादेश में स्थानीय लोगों और कई मुस्लिम संगठनों ने विरोध रैली निकाली.

Photo Credit: IANS
कौन हैं सौरव सिकदर?
सौरव सिकदर उत्तर 24 परगना के दमदम उत्तर विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी विधायक हैं. उनके निर्वाचन क्षेत्र में वह एयरपोर्ट इलाका भी आता है, जहां बांकरा मस्जिद स्थित है. हाल के दिनों में, वह मस्जिद को दूसरी जगह शिफ्ट करने का समर्थन करने वाले सबसे मुखर नेताओं में से एक रहे हैं. उनका तर्क है कि एयरपोर्ट परिसर के अंदर मस्जिद का होना ऑपरेशनल और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है.
विवाद कैसे शुरू हुआ?
यह विवाद तब और बढ़ गया जब एयरपोर्ट अथॉरिटी ने मरम्मत कार्य का हवाला देते हुए शनिवार से तीन दिनों के लिए बांकरा मस्जिद में नमाज़ पर अस्थायी रोक लगा दी. लगभग उसी समय, पश्चिम बंगाल सरकार ने 130 साल से भी पुरानी मस्जिद को दूसरी जगह शिफ्ट करने का फैसला किया. सरकार का कहना था कि राष्ट्रीय सुरक्षा और एयरपोर्ट के विस्तार के लिए ऐसा करना जरूरी है.

सौरव सिकदर का सुरक्षा से जुड़ा तर्क
प्रस्तावित रिलोकेशन का बचाव करते हुए, सौरव सिकदर ने कहा कि यह मुद्दा राजनीति से कहीं आगे का है और पूर्वी भारत के सबसे बड़े एयरपोर्ट की रणनीतिक अहमियत से जुड़ा है. सिकदर ने कहा, "कोलकाता एयरपोर्ट पर रनवे एरिया के ठीक बीच में एक मस्जिद है. इसकी लोकेशन की वजह से दो रनवे का पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं हो पाता है."
उन्होंने बताया कि कोलकाता एयरपोर्ट न सिर्फ़ पूर्वी भारत की सेवा करता है, बल्कि नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के लिए सबसे नज़दीकी इंटरनेशनल गेटवे के तौर पर भी काम करता है. मस्जिद की मौजूदगी ने एयरपोर्ट ट्रैफिक पर असर डाला है, संभावित रेवेन्यू कम किया है और लोगों को रोज़गार के मौकों से वंचित किया है."
बीजेपी विधायक ने मस्जिद तक बिना रोक-टोक पहुंच को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी ज़ाहिर कीं. सिकदर ने तर्क दिया, "मस्जिद में आने वाले लोगों को एयरपोर्ट पास या बैकग्राउंड वेरिफिकेशन की ज़रूरत नहीं होती है. इस एरिया में जाने के लिए सिर्फ़ आधार कार्ड की ज़रूरत होती है. एयरपोर्ट एक बहुत ज़्यादा सुरक्षित जगह होती है. यहां तक कि एयरपोर्ट स्टाफ़ को भी फ़ोटो वाले बायोमेट्रिक पास की ज़रूरत होती है, जबकि लोग बिना ऐसे वेरिफिकेशन के मस्जिद में जा सकते हैं."
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री समेत शीर्ष संवैधानिक अधिकारियों की आवाजाही कोलकाता एयरपोर्ट के ज़रिए होती है, जिससे सुरक्षा सबसे अहम प्राथमिकता बन जाती है.

राज्य सरकार ने फ़ैसले का किया बचाव
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को सरकार के फ़ैसले का बचाव करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा हर दूसरी बात से ज़्यादा अहम है. अधिकारी ने साफ़ किया कि हालांकि सरकार सभी धार्मिक रीति-रिवाजों का सम्मान करती है, लेकिन जियोपॉलिटिकल और रणनीतिक अहमियत वाली जगहों पर बाहरी लोगों की बिना रोक-टोक पहुंच की इजाज़त नहीं दी जा सकती.
उन्होंने विपक्षी पार्टियों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, "सरकार का धार्मिक मान्यताओं में दखल देने का कोई इरादा नहीं है, लेकिन सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता."
सीमा-पार राजनीतिक विवाद
बांग्लादेश में विरोध-प्रदर्शनों के शुरू होने से पश्चिम बंगाल में एक स्थानीय प्रशासनिक और सुरक्षा मुद्दे ने इंटरनेशनल रूप ले लिया है. एक चुने हुए भारतीय विधायक के ख़िलाफ़ जान से मारने की धमकी वाले नारों से राजनीतिक प्रतिक्रियाएं शुरू होने की संभावना है, जबकि धार्मिक भावनाओं, एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने पर बहस तेज़ होती जा रही है.
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