- एंडी बर्नहम को यूके की सत्ताधारी लेबर पार्टी का नेता चुन लिया गया है और वे जल्द प्रधानमंत्री पद संभालेंगे
- बर्नहम ने उम्मीद जगाने और देश में समान विकास फैलाने वाली इकॉनमी बनाने का वादा किया है
- बर्नहम ने आर्थिक सुधार, सरकारी नियंत्रण बढ़ाने और नई औद्योगिक नौकरियां पैदा करने को अपनी प्राथमिकता बताया
शुक्रवार को यू.के. की सत्ताधारी लेबर पार्टी के नेता के तौर पर आधिकारिक रूप से चुने जाने के बाद, एंडी बर्नहम ने ब्रिटिश लोगों के लिए उम्मीद जगाने का वादा किया. इसके साथ ही, अगले हफ्ते प्रधानमंत्री का पद संभालने की राह में उनकी आखिरी बाधा भी दूर हो गई. ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर, सेंटर-लेफ्ट पार्टी के नेतृत्व के लिए हुए चुनाव में एकमात्र उम्मीदवार थे. वे निवर्तमान प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की जगह लेने वाले थे. शुक्रवार की घोषणा पहले से ही तय मानी जा रही थी, क्योंकि बर्नहम ने हाउस ऑफ कॉमन्स में लेबर पार्टी के 403 सांसदों में से 379 का समर्थन पहले ही हासिल कर लिया था.
बर्नहम कई हफ्तों से अगले प्रधानमंत्री बनने की कतार में थे, लेकिन उन्होंने अपनी पॉलिसी की प्राथमिकताओं के बारे में बहुत कम जानकारी दी है. मैनचेस्टर के बाहर के वोटर्स उन्हें ज्यादा नहीं जानते. एक महीने पहले संसद की एक सीट के लिए हुए स्पेशल चुनाव में जीत के बाद, उन्होंने "एकता और उम्मीद पर आधारित" राजनीति और ऐसी इकॉनमी बनाने का वादा किया जो पूरे देश में विकास को समान रूप से फैलाए.
बर्नहम के सामने समस्याएं
बर्नहम का लीडरशिप स्टाइल काफी सख्त स्टारमर की तुलना में ज्यादा सहज है, और उन्हें लेबर पार्टी के सबसे अच्छे कम्युनिकेटर्स में से एक माना जाता है. लेकिन उन्हें भी अपने पूर्ववर्ती जैसी ही कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें सुस्त इकॉनमी, यूक्रेन और मिडिल ईस्ट में युद्धों के कारण बढ़ती महंगाई और दबाव में चल रही पब्लिक सर्विसेज शामिल हैं.
लेबर लीडर के तौर पर अपनी कुछ प्राथमिकताओं को बताते हुए, उन्होंने कहा कि उनमें उन बड़ी चीजों को ठीक करने का साहस होगा जिन्हें राजनीति ने नजरअंदाज किया है. उन्होंने आर्थिक सुधार, अहम सेक्टर पर ज्यादा सरकारी कंट्रोल और नई मॉडर्न इंडस्ट्रियल नौकरियां पैदा करने पर ध्यान देने की योजनाओं पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि ब्रिटेन ने 1980 के दशक में कई गलत फैसले लिए, जब राजनीतिक ताकत को एक जगह केंद्रित किया गया और आर्थिक ताकत का निजीकरण कर दिया गया.
कौन से गलत फैसले लिए
यह वही दशक था जब कंजर्वेटिव प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर ने निजीकरण, डी-इंडस्ट्रियलाइजेशन और राजनीतिक केंद्रीकरण की नीतियां लागू कीं, जिन्होंने यूके की अर्थव्यवस्था को बदल दिया. बर्नहम ने कहा, "धीरे-धीरे, और कभी-कभी बिना पता चले, चार दशकों में यूके के हर इलाके और देश में हमारे समुदायों से राजनीतिक और आर्थिक ताकत छिनती चली गई.
गुरुवार देर रात सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में, बर्नहम ने कहा कि वह उन लोगों के लिए सोशल केयर तक असमान पहुंच की समस्या को हल करने को भी प्राथमिकता देंगे जिन्हें उम्र, बीमारी या विकलांगता के कारण इसकी जरूरत है. बढ़ती उम्र वाली आबादी वाले देश में यह एक अहम मुद्दा है, और यह ऐसा मुद्दा है जिसने पिछली लेबर और कंजर्वेटिव सरकारों को भी उलझन में डाला है. स्टारमर ने पिछले महीने घोषणा की थी कि वह दो साल के कार्यकाल के बाद इस्तीफा दे देंगे. इस कार्यकाल में कई गलतियां और फैसले लेने में चूक हुई, जिससे पार्टी और जनता के बीच उनकी साख कम हो गई.
कब लेंगे शपथ
ओपिनियन पोल में लेबर पार्टी अक्सर इमिग्रेशन-विरोधी पार्टी 'रिफॉर्म UK' से पीछे रहती है. मई में हुए लोकल चुनावों में सत्ताधारी पार्टी को बहुत खराब नतीजों का सामना करना पड़ा, जिससे स्टार्मर पर पद छोड़ने का दबाव बना और वे इसे टाल नहीं पाए. स्टार्मर सोमवार तक प्रधानमंत्री बने रहेंगे, जब वे किंग चार्ल्स III को अपना औपचारिक इस्तीफा सौंपेंगे. इसके बाद किंग, बरनहम को सरकार बनाने के लिए कहेंगे. ब्रिटेन की संसदीय लोकतंत्र व्यवस्था में सत्ताधारी पार्टियों को आम चुनाव कराए बिना अपने नेता और प्रधानमंत्री बदलने की छूट है. अगला राष्ट्रीय चुनाव 2029 तक कराने की जरूरत नहीं है. हाल के वर्षों में नए प्रधानमंत्री तेजी से बदले हैं. 2016 के बाद से बरनहम UK के सातवें नेता होंगे.
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