Mosque Relocation: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (Kolkata Airport) परिसर के भीतर बनी बांकड़ा मस्जिद ( गौरीपुर जामा मस्जिद) को दूसरी जगह स्थानांतरित किया जा रहा है. मस्जिद को एयरपोर्ट परिसर से हटाने का मकसद एयरपोर्ट परिसर की यात्री क्षमता बढ़ाना है. मस्जिद के रिलोकेशन के लिए पुराने टर्मिनल के ढांचे को तोड़कर आधुनिक बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा, जिससे एयरपोर्ट पर आने वाले यात्रियों की सुविधा होगी और एयरपोर्ट की यात्री क्षमता बढ़ाकर 40 मिलियन की जाएगी.
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रनवे से 240 मीटर की दूरी तक नहीं होना चाहिए कोई निर्माण
गौरतलब है मामला सुरक्षा मानदंडों और हवाई अड्डे के आधुनिकीकरण से जुड़ा हुआ है. एयरपोर्ट के सेकेंडरी रनवे से महज 165 मीटर की दूरी पर स्थित बांकड़ा मस्जिद यात्रियों की सुरक्षा और विमान संचालन में बाधा बन रही है. अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नियमों के मुताबिक रनवे से कम से कम 240 मीटर की दूरी तक कोई निर्माण नहीं होना चाहिए. चूंकि रनवे बांकड़ा मस्जिद के बेहद नजदीक है, जिसके चलते रनवे के करीब 88 मीटर हिस्से का इस्तेमाल नहीं हो पाता था, इससे बड़े विमानों की इमरजेंसी लैंडिंग में रुकावट आती हैं.
मस्जिद के लिए भूमि और निर्माण का पूरा खर्च उठाएगी सरकार
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) और स्थानीय जिला प्रशासन ने सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए बांकड़ा मस्जिद को एयरपोर्ट परिसर से बाहर किसी सुरक्षित सरकारी जमीन पर स्थानांतरित करने का फैसला किया है. सरकार मस्जिद निर्माण के लिए वैकल्पिक भूमि और पूरा खर्च उठाने को तैयार है. एयरपोर्ट परिसर से बांकड़ा मस्जिद के स्थानांतरण से एक तरफ जहां यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, दूसरी ओर इस कदम से कोलकाता एयरपोर्ट की यात्री क्षमता को 40 मिलियन करने का रास्ता साफ होगा.
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पूरे क्षेत्र का अधिग्रहण कर सरकार ने एयरपोर्ट अथॉरिटी को सौंपा जमीन
आजादी के बाद जब एयरपोर्ट यातायात तेजी से बढ़ गया तो राज्य सरकार ने पूरे क्षेत्र की जमीन का अधिग्रहण करके जमीन एयरपोर्ट अथॉरिटी को सौंप दिया था. जमीन हस्तांतरण के समय तब एक स्थानीय प्रशासनिक और सामाजिक समझौता हुआ और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मस्जिद को उसी स्थान पर छोड़ दिया गया. इसके बाद एयरपोर्ट की बाउंड्री वॉल और सेकेंडरी रनवे का निर्माण हुआ.
2003 में सेकेंडरी रनवे की दिशा को ही थोड़ा मोड़ने पर बनी थी सहमति
दरअसल, मस्जिद तकनीकी रूप से एयरपोर्ट के हाई-सिक्योरिटी एयरसाइड ज़ोन के अंदर आ गई थी, लेकिन लंबे गतिरोध के बाद साल 2003 में तत्कालीन केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री शाहनवाज हुसैन और पश्चिम बंगाल के तत्कालीन सीएम बुद्धदेव भट्टाचार्य के बीच मस्जिद के स्थानांतरित करने के बजाय सेकेंडरी रनवे की दिशा को ही थोड़ा मोड़ने पर सहमति बनी थी, ताकि मस्जिद बची रहे.
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वर्तमान में 24 घंटे निगरानी वाले हाई-सिक्योरिटी ज़ोन में है बांकड़ा मस्जिद
उल्लेखनीय है वर्तमान में यह मस्जिद केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की चौबीसों घंटे निगरानी वाले हाई-सिक्योरिटी ज़ोन में है, जहां आम जनता का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है. बांकड़ा मस्जिद में इलाके के केवल 10 से 25 चुनिंदा स्थानीय ही रोज़ाना पांच वक्त की नमाज़ के लिए कड़ी निगरानी में मस्जिद तक ले जाया और वापस लाया जाता है.
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