- मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले में साल बोरर कीट से साल के जंगलों को बचाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है.
- वन विभाग ने कीटों के सिर पर दो रुपये इनाम घोषित कर ग्रामीणों को सक्रिय रूप से अभियान में जोड़ा है.
- ग्रामीण संक्रमित पेड़ों से कीट निकालते और उनके सिर संग्रहण केंद्रों में जमा कर वन संरक्षण में मदद कर रहे हैं.
मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले के साल के घने जंगलों में इन दिनों एक अनोखा अभियान चल रहा है. यहां न कोई हथियार है, न कोई बड़ी मशीन, लेकिन फिर भी जंगल को बचाने की जंग पूरी ताकत से लड़ी जा रही है. इस लड़ाई का दुश्मन है एक छोटा सा कीड़ा, जिसे साल बोरर कीट कहा जाता है. यह कीट साल के पेड़ों को अंदर से खोखला कर देता है और धीरे-धीरे पूरे जंगल को बर्बादी की ओर धकेल सकता है.
खतरे की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने इस कीडे़ के सिर पर दो रुपये का इनाम घोषित कर दिया. इसके बाद जंगल से जुड़े गांवों के लोग बड़ी संख्या में इस अभियान का हिस्सा बन गए. नतीजा यह रहा कि ग्रामीण अब तक करीब 10 लाख साल बोरर कीड़ों के सिर वन विभाग के पास जमा हो चुके हैं. यह पहल न सिर्फ जंगल बचाने की दिशा में अहम साबित हो रही है, बल्कि ग्रामीणों और वन विभाग के बीच साझेदारी का भी एक बेहतरीन उदाहरण बन गई.
डिंडोरी से विजय तिवारी की रिपोर्ट...
साल के जंगलों पर मंडरा रहा था बड़ा खतरा
दरअसल, वन विभाग एसडीओ सुरेंद्र कुमार जाटव ने बताया कि डिंडोरी जिले के करंजिया, समनापुर और बजाग वन परिक्षेत्र के लाखों साल के पेड़ इन दिनों साल बोरर कीट के प्रकोप से प्रभावित हैं. यह कीट पेड़ के तने के भीतर सुरंग बनाता है और धीरे-धीरे उसकी अंदरूनी संरचना को नुकसान पहुंचाता है. बाहर से पेड़ सामान्य दिखाई देता है, लेकिन भीतर से वह कमजोर और खोखला हो जाता है.
एक कीट का सिर लाओ, दो रुपये पाओ
वन विभाग ने कीटों की संख्या कम करने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया. विभाग ने घोषणा की कि जो भी व्यक्ति साल बोरर कीट का सिर काटकर लाएगा, उसे प्रति सिर दो रुपये दिए जाएंगे. इस घोषणा के बाद जंगलों से लगे गांवों के लोगों ने अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना शुरू कर दिया. ग्रामीण संक्रमित पेड़ों से कीट निकालते हैं, उनका सिर अलग करते हैं और फिर उन्हें संग्रहण केंद्रों में जमा करते हैं. कई ग्रामीण तो कीटों के सिर की मालाएं बनाकर वन विभाग तक पहुंचा रहे हैं.

कीड़ों को मारकर बाल्टी में भरकर वन विभाग के दफ्तर पहुंचे ग्रामीण.
ग्रामीणों की भागीदारी से मिली बड़ी सफलता
वन विभाग की इस पहल को ग्रामीणों का भरपूर सहयोग मिला है. लोगों की सक्रिय भागीदारी के कारण अब तक लगभग 10 लाख साल बोरर कीटों के सिर जमा किए जा चुके हैं. इससे जंगलों में कीटों की संख्या कम करने में मदद मिली है और हजारों पेड़ों को बचाने की उम्मीद मजबूत हुई है. अधिकारियों का मानना है कि यदि इसी तरह अभियान जारी रहा तो आने वाले समय में साल के जंगलों को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है.
1998 की त्रासदी से लिया सबक
बीड गार्ड रघुनाथ प्रजापति के अनुसार, साल बोरर कीट का खतरा नया नहीं है. वर्ष 1998 में भी इस कीट ने बड़े पैमाने पर साल के जंगलों को नुकसान पहुंचाया था. उस समय लाखों प्रभावित पेड़ों को काटना पड़ा था, जिससे वन क्षेत्र को भारी क्षति हुई थी. उसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार विभाग ने शुरुआती स्तर पर ही सख्त कदम उठाए हैं ताकि स्थिति दोबारा न बिगड़े.

ग्रामीण कीड़ों की माला बनाकर वन विभाग के दफ्तर लेकर पहुंचे लोग.
जंगल बचाने की जंग जारी
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे वन क्षेत्रों में वन विभाग युद्धस्तर पर निगरानी और नियंत्रण अभियान चला रहा है. अधिकारियों का कहना है कि जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं हैं, बल्कि लाखों जीव-जंतुओं और स्थानीय समुदायों की जीवनरेखा हैं. इसलिए साल बोरर कीट के खिलाफ यह अभियान सिर्फ पेड़ बचाने का प्रयास नहीं, बल्कि पूरे वन इकोसिस्टम को सुरक्षित रखने की कोशिश है.
वन संरक्षण का अनोखा मॉडल बना डिंडोरी
डिंडोरी में चल रहा यह अभियान देश के अन्य वन क्षेत्रों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है. स्थानीय ग्रामीण सुखनंदन, कुंवरवति बाई पति लक्ष्मण, लल्ली बाई ने बताया कि जिस तरह लोगों को सीधे जोड़कर वन संरक्षण का काम किया जा रहा है, उसने यह साबित कर दिया है कि जब समाज और प्रशासन साथ मिलकर काम करते हैं तो बड़े से बड़ा संकट भी टाला जा सकता है.
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