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This Article is From Oct 02, 2017

स्वाभिमान के लिए लाल बहादुर शास्त्री जब उफनाती गंगा नदी में तैरकर पहुंचे थे घर

2 अक्टूबर को जन्मे लाल बहादुर शास्त्री की आज 113 वीं जयंती है. शास्त्री जी पहले व्यक्ति थे, जिन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से नवाजा गया था.

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पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री की आज है 113वीं जयंती
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  ने सोमवार को लाल बहादुर शास्त्री को उनकी 113वीं जयंती पर श्रद्धांजलि दी है. मोदी ने एक वीडियो साझा करते हुए उसके साथ ट्वीट किया, "किसानों और जवानों को प्रेरणा देने वाले और राष्ट्र का कुशल नेतृत्व करने वाले शास्त्री जी को मेरा नमन. लाल बहादुर शास्त्री को उनकी जयंती पर याद कर रहा हूं." मोदी ने विजय घाट जाकर पूर्व प्रधानमंत्री की समाधि पर पुष्पांजलि भी अर्पित की. शास्त्री का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी में दो अक्टूबर, 1904 को शारदा प्रसाद और रामदुलारी देवी के घर हुआ था. उन्होंने 11 जनवरी, 1966 को उज़्बेकिस्तान के ताशकंद में अंतिम सांस ली थी. उसी दिन उन्होंने ताशकंद घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए थे. वह पहले व्यक्ति थे, जिन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से नवाजा गया था.

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पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री से जुड़ीं खास बातें
1- पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1901 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था. उनके पिता एक स्कूल शिक्षक थे. जब लाल बहादुर शास्त्री केवल डेढ़ वर्ष के थे तभी उनके पिता का निधन हो गया.
2- बचपन से ही लाल बहादुर शास्त्री को काफी गरीबी और मुश्किलों का सामना करना पड़ा. कई जगह इस बात का भी जिक्र किया गया है कि पैसे नहीं होने की वजह से लाल बहादुर शास्त्री तैरकर नदी पार कर स्कूल जाया करते थे. हालांकि इसको लेकर कुछ पुख्ता तथ्यों में दूसरी तरह का दावा किया गया है.

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3- बचपन में दोस्तों के साथ शास्त्री जी गंगा नदी के पार मेला देखने गए थे. वापस लौटते के समय उनके पास नाववाले को देने के लिए पैसे नहीं थे और दोस्तों से पैसे मांगना उन्होंने ठीक नहीं समझा. बताया जाता है कि उस समय गंगा नदी भी पूरे उफान पर थी. उन्होंने दोस्तों को नाव से जाने के लिए कह दिया और बाद में खुद नदी पार करके आए. 

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4- आर्थिक तंगी की वजह से शास्त्री जी को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था. उनको वाराणसी भेज दिया गया. पढ़ाई करने के लिए वह कई मीलों पैदल चलकर स्कूल जाते थे. 
5- शास्त्री जी ने अपनी शादी में दहजे में एक चरखा और कुछ कपड़े लिए थे.


6- शास्त्री जी जात-पांत का हमेशा विरोध करते रहे. यहां तक कि उन्होंने कभी अपने नाम के आगे भी अपनी जाति का उल्लेख नहीं किया. शास्त्री की उपाधि उनको काशी विश्वविद्यालय से मिली थी. 
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Lal Bahadur Shashtri
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