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'पहले भी ऐसा हो चुका है, असंवैधानिक नहीं है...', संसद सत्र को लेकर रिजिजू ने खरगे को लिखा पत्र

रिजिजू ने कहा कि साल 2008 में लोकसभा को अविश्वास प्रस्ताव के बाद अनिश्चित काल के लिए स्थगित रखने के बाद 87 दिनों तक सत्रावसान नहीं किया गया था. इसके अलावा 1987 में 76 दिन, 1989 में 54 दिन और 2013 में 49 दिनों तक ऐसी स्थिति रही है.

'पहले भी ऐसा हो चुका है, असंवैधानिक नहीं है...', संसद सत्र को लेकर रिजिजू ने खरगे को लिखा पत्र
संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखा है.
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मॉनसून सत्र खत्म होने के दो महीने बाद भी सत्रावसान न होने का मुद्दा गर्मा रहा है. संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिख कर कहा कि लंबे समय तक सत्रावसान न करना असंवैधानिक नहीं है और पहले भी ऐसा हुआ है जब लंबे समय तक सत्रावसान नहीं किया गया.

दरअसल, एनडीटीवी पर यह खबर दिखाने के बाद कि सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए जल्दी ही संसद का विशेष सत्र बुला सकती है, खरगे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था. 16 अक्टूबर को लिखे इस पत्र में खरगे ने परिसीमन बिल के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी.

रिजिजू ने आज इसका जवाब दिया है. उन्होंने मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर स्थिति की साफ की है. 

रिजिजू ने क्या तर्क दिए?

खरगे ने यह भी आपत्ति की थी कि 13 अगस्त 2026 को संसद स्थगित होने के बाद 64 दिन बीत जाने पर भी इसे सत्रावसान नहीं किया गया. इस पर रिजिजू ने कहा कि यह कोई असंवैधानिक या प्रक्रियात्मक अनियमितता नहीं है. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि इससे पहले  भी सदन को लंबे समय तक बिना सत्रावसान के रखा गया है. 

रिजिजू के अनुसार, साल 2008 में लोकसभा को अविश्वास प्रस्ताव के बाद अनिश्चित काल के लिए स्थगित रखने के बाद 87 दिनों तक सत्रावसान नहीं किया गया था. इसके अलावा 1987 में 76 दिन, 1989 में 54 दिन और 2013 में 49 दिनों तक ऐसी स्थिति रही है.

राहुल गांधी से भी मांगा था सहयोग

केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने पत्र में जिक्र किया कि सरकार ने परिसीमन संशोधन विधेयक के समर्थन और सहयोग के लिए कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों से लगातार संपर्क साधा है. उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद खरगे को 16 मार्च, 26 मार्च और 12 अप्रैल 2026 को पत्र लिखे थे और व्यक्तिगत रूप से भी चर्चा की थी. मानसून सत्र के दौरान उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से भी मुलाकात कर सहयोग मांगा था.

रिजिजू के अनुसार, बार-बार अनुरोध के बावजूद जब कांग्रेस पार्टी ने चर्चा के लिए तारीखें तय नहीं कीं, तब सरकार ने अन्य राजनीतिक दलों से संपर्क किया. इस सिलसिले में डीएमके, सपा, वाईएसआरसीपी, एनसीपी, शिवसेना (यूबीटी), एआईएमआईएम और बीजेडी के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श किया गया ताकि व्यापक सहमति बनाई जा सके.

संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि जब सरकार पहले ही संवाद के ठोस प्रयास कर चुकी है, तब बार-बार सर्वदलीय बैठक की मांग दोहराना समझ से परे है. उन्होंने कांग्रेस से भविष्य के महत्वपूर्ण विधायकों में बाधा न डालते हुए एक रचनात्मक भूमिका निभाने की अपील की है.

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