- UDF ने यू-टर्न लेते हुए केरल के स्कूलों में केंद्र की PM SHRI योजना लागू करने का फैसला किया है.
- IUML समेत UDF ने कहा कि 1466 करोड़ के बकाया और आर्थिक तंगी के कारण फंड के लिए यह कदम जरूरी है.
- LDF ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस BJP के सामने झुक गई और पहले 'भगवाकरण' का आरोप खुद UDF ने लगाया था.
केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने राज्य के स्कूलों में केंद्र सरकार की 'प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया' (PM SHRI) योजना को लागू करने का फैसला किया है. यह उस गठबंधन के लिए एक बड़ा यू-टर्न है, जिसने कभी इसका जोरदार विरोध किया था. गुरुवार को UDF की मीटिंग के बाद, गठबंधन के संयोजक और कांग्रेस सांसद अडूर प्रकाश ने कहा कि गठबंधन ने केरल के स्कूलों में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की PM SHRI योजना को लागू करने का फैसला किया है. उन्होंने कहा, "पिछली LDF सरकार ने केंद्र के साथ एक MoU पर हस्ताक्षर किए थे. इसलिए, मौजूदा सरकार इससे पीछे नहीं हट सकती. यूडीएफ सरकार फंड पाने के लिए इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाएगी. यह केंद्र की कोई मेहरबानी नहीं है. यूडीएफ की एक सब-कमेटी उन स्कूलों को तय करेगी, जहां यह प्रोजेक्ट लागू किया जाना है."
खासकर, सहयोगी पार्टी IUML के रुख में काफी नरमी आई है, जो इस स्कीम की सबसे मुखर आलोचक रही थी और अब शिक्षा विभाग उसी के पास है. चुनाव से पहले, IUML ने चेतावनी दी थी कि अगर वे सत्ता में आए तो इस स्कीम को बंद कर देंगे.
क्यों बदला UDF का रुख?
IUML ने इस बदलाव को सही ठहराते हुए कहा है कि केरल को शिक्षा के क्षेत्र में राज्य के अधिकारों की रक्षा करते हुए केंद्र से मिलने वाले फंड की जरूरत है. यह बदलाव ऐसे वक्त में हुआ है, जब केरल आर्थिक तंगी और शिक्षा से जुड़े बकाया भुगतान के बढ़ते बोझ (जो अब 1,466 करोड़ रुपये हो गया है) का सामना कर रहा है. इस कर्ज की वजह से LDF और UDF, दोनों ही सरकारों को अपने पहले के रुख से पीछे हटना पड़ा है.
केरल में 33 केंद्रीय विद्यालय और 14 नवोदय विद्यालय इस योजना का हिस्सा हैं. PM SHRI योजना के तहत, केंद्र द्वारा स्पॉन्सर्ड अन्य योजनाओं की तरह ही, राज्यों को प्रोजेक्ट के खर्च का 40 फीसदी हिस्सा उठाना होता है. अब तक, 776 जिलों में प्राइमरी से लेकर हायर-सेकेंडरी लेवल तक के 13,095 स्कूल इस योजना का हिस्सा बन चुके हैं.
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पिछले महीने, राज्य सरकार ने अपने रुख में नरमी के संकेत दिए थे. सरकार ने कहा था कि वह इस योजना को लागू करने के लिए तैयार है, बशर्ते राज्य के सिलेबस पर उसका कंट्रोल बना रहे. सरकार के इस तरह पीछे हटने के कारण, पिछली LDF गठबंधन सरकार ने मौजूदा सरकार पर निशाना साधा है.
CPI(M) के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन ने तब कहा था, "जब हमने केंद्र के साथ MoU पर साइन किया था, तो कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि हम संघ का एजेंडा लागू कर रहे हैं।. LDF सरकार ने इस योजना के तहत एक पैसा भी नहीं लिया था." उनके ये शब्द UDF के पुराने आरोपों जैसे ही लग रहे थे. उन्होंने आगे कहा, "कांग्रेस ने बीजेपी के सामने पूरी तरह घुटने टेक दिए हैं. सतीसन झूठ बोल रहे हैं. LDF सरकार ने PM SHRI को लागू करने के लिए कोई भी औपचारिकता पूरी नहीं की थी."
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