'SIR' यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट प्रक्रिया को सही ठहराने वाले कर्नाटक सरकार के मंत्री सतीश जारकीहोली 24 घंटे में ही अपने बयान पलट गए हैं. मंत्री ने अब कहा है कि उनकी टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया गया और उन्होंने कभी भी SIR प्रक्रिया को सही नहीं ठहराया. उन्होंने कहा कि वह देश में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपने राष्ट्रीय नेता राहुल गांधी के साथ मजबूती से खड़े हैं. बता दें कि कल उन्होंने NDTV संवाददाता के ही सवाल पर एसआईआर की प्रक्रिया को पूरी तरह सही ठहराया था. उन्होंने यह भी कहा था कि राज्य में SIR के तरह जो 1 करोड़ वोट काटे गए हैं वो भी सही है. अब उन्होंने कहा है कि नका इरादा कभी भी मतदाताओं के नाम काटने की इस विवादास्पद प्रक्रिया का समर्थन करना नहीं था.
बीजेपी की साजिश को नाकाम करने का दिया हवाला
मंत्री ने अपनी सफाई में कर्नाटक कांग्रेस सरकार की पीठ थपथपाते हुए कहा कि उनके बयान का असल मकसद कुछ और था. उन्होंने बताया कि वह तो सिर्फ यह समझाना चाह रहे थे कि कैसे बाकी राज्यों के मुकाबले कर्नाटक में कांग्रेस ने बीजेपी की एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया है. मंत्री के मुताबिक, कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी ने 'फॉर्म 7' का इस्तेमाल करके उन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की बड़ी साजिश रची थी, जो कांग्रेस पार्टी के समर्थक हैं. लेकिन प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने राष्ट्रीय नेता राहुल गांधी के प्रयासों और उपमुख्यमंत्री व प्रदेश अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार के मार्गदर्शन में इस साजिश को समय रहते पूरी तरह से नाकाम कर दिया.
बेलगावी से शुरू की थी लड़ाई
मंत्री ने अब अपने पुराने रुख को याद दिलाते हुए कहा कि मतदाता सूची से जुड़े इस खेल के खिलाफ उन्होंने सबसे पहले आवाज उठाई थी. उन्होंने कर्नाटक के बेलगावी जिले से इस अवैध प्रक्रिया के खिलाफ जंग की शुरुआत की थी और इन कोशिशों को नाकाम करने में बड़ी सफलता हासिल की थी. उन्होंने साफ किया कि किसी भी असली और पात्र मतदाता को उसके वोट देने के अधिकार से वंचित करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है. वह हमेशा से हर भारतीय नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकार के साथ खड़े रहे हैं.
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राहुल गांधी के साथ खड़े होने का किया दावा
मंत्री ने अपने बयान के अंत में एक बार फिर पार्टी आलाकमान और खासकर राहुल गांधी के प्रति अपनी वफादारी को दोहराया है. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने और हर नागरिक के वोट देने के मौलिक अधिकार की रक्षा के लिए वह राहुल गांधी के साथ मजबूती से खड़े हैं. उन्होंने मीडिया और विपक्ष से अपील की है कि उनके कल के बयान को किसी भी तरह से गलत संदर्भ में न देखा जाए और उनके स्पष्टीकरण के बाद इस पूरे मामले को सही परिप्रेक्ष्य में समझा जाए. अब देखना यह होगा कि मंत्री जी के इस यू-टर्न के बाद कर्नाटक की राजनीति में चल रहा यह विवाद थमता है या नहीं.
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