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स्टार पावर, सेलेब्रिटी की फौज... कौन हैं ममता की महिला ब्रिगेड के वो बागी चेहरे, किसकी कितनी ताकत

बंगाली फिल्म और टेलिविजन के जिन चमकते चेहरों पर ममता बनर्जी ने राजनीति में भरोसा जताया. जो कभी दीदी के स्टार पावर हुआ करते थे, आज उनके ही खिलाफ खड़े हैं.

स्टार पावर, सेलेब्रिटी की फौज... कौन हैं ममता की महिला ब्रिगेड के वो बागी चेहरे, किसकी कितनी ताकत
ममता की स्टार पावर ने छोड़ा साथ.
  • ममता बनर्जी की महिला ब्रिगेड ने उनका साथ छोड़ बागी रूप अख्तियार कर लिया है
  • काकोली घोष, सयानी घोष समेत तमाम सांसद ममता बनर्जी का साथ छोड़ रहे हैं
  • टीएमसी की फाउंडर मेंबर्स में शामिल काकोली घोष दस्तीदार ने भी ममता का सालों पुराना साथ छोड़ दिया
कोलकाता:

शताब्दी, सयानी, रचना, जून जैसी सिनेमा, टेलीविज़न जगत की मशहूर हस्तियों, 'स्टार पावर' पर ममता बनर्जी ने TMC की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए सालों तक भरोसा किया, दीदी के चुनाव हारते ही उन्होंने साथ छोड़ दिया. ममता बनर्जी की महिला ब्रिगेड अब बागी हो गई है. इन चमकते चेहरों के सहारे ममता की टीएमसी को सालों तक जीत हासिल करने में मदद मिली. पार्टी का बंगाल की राजनीति में दबदबा बरकरार रहा, लेकिन जब मुश्किल वक्त आया तो ममता की इस महिला ब्रिगेड ने उनका साथ छोड़ दिया.

काकोली घोष ने किया 20 सांसदों के साथ होने का दावा

टीएमसी की फाउंडर मेंबर्स में शामिल काकोली घोष दस्तीदार ने भी ममता का सालों पुराना साथ छोड़ दिया. उन्होंने न सिर्फ टीएमसी से इस्तीफा दिया बल्कि खुलकर भ्रष्टाचार, संगठन के भीतर माहौल और RG कर केस जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सवाल उठाए. काकोली ने 28 में से 20 लोकसभा सांसदों के उनके साथ होने का दावा किया है. टीएमसी के 20 बागी लोकसभा सांसदों की लिस्‍ट में साइन करने वालों में सयानी घोष भी शामिल हैं.

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सयानी घोष हुईं बागी, भूपेंद्र यादव की मीटिंग में पहुंचीं

साल 2021 में TMC में शामिल होने वाली एक्ट्रेस सायानी घोष जल्द ही पार्टी का चर्चित चेहरा बन गईं. भले ही वह आसनसोल से अपना पहला विधानसभा चुनाव हार गई हों लेकिन फिर भी ममता ने बरोसा जताकर उनको यूथ TMC का प्रेसिडेंट बनाया. उनको बाद में जाधवपुर से चुनाव लड़वाया, जहां से उनको 2 लाख से ज़्यादा वोटों से ज़बरदस्त जीत मिली. जिसके बाद वह TMC की महिला विंग की प्रेसिडेंट बनाई गईं. 2026 विधानसभा चुनाव में बीजेपी के खिलाफ बयान देकर वह काफी चर्चा में रहीं. उन्होंने पार्टी के लिए जमकर चुनाव प्रचार किया. बोलने की कला ऐसी कि लोग उनमें ममता की छवि देखने लगे. बयान ऐसे कि लगा कि टीएमसी का दामन वह ताउम्र नहीं छोड़ेंगी. लेकिन ममता की ये स्टार प्रचारक भी बागी निकली. TMC की फायरब्रांड नेता रहीं सायोनी घोष टीएमसी के 5 बागी सांसदों संग बुधवार देर रात भूपेंद्र यादव के घर बैठक में पहुंचीं.जिसके बाद अटकलों का दौर शुरू हो गया है कि क्‍या टीएमसी के बागी लोकसभा सदस्‍य बीजेपी का हाथ थामने जा रहे हैं?

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 ममता की 4 बार की सांसद शताब्दी रॉय भी बागी गुट के साथ

शताब्दी रॉय उन कलाकारों की लिस्ट में शामिल हैं जिनको ममता ने शुरुआती दौर में राजनीति में उतारा था. वह साल 2009 में बीरभूम से संसद चुनी गईं थी, तब से इस सीट पर उनका ही कब्जा है. 4 बार लगातार जीतने वाली शताब्दी रॉय टीएमसी की सेलिब्रिटी नेताओं की लिस्ट में शामिल हैं. अब वह भी बागी हो चुकी हैं. वह खुलकर ममता की नीतियों पर सवाल उठा रही हैं और बागी गुट का सपोर्ट भी कर रही हैं.

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हुगली से सांसद 'दीदी नंबर 1' रचना बनर्जी हुईं बागी

रचना बनर्जी बंगाल के घर-घर में 'दीदी नंबर 1' के नाम से फेमस हैं. बंगाल के हिट हिट रियलिटी शो 'दीदी नंबर 1 से फेमस हुईं रचना को टीएमसी ने 2024 के चुनावों में पहली बार राजनीति में उतारा. ममता ने इस बात को भुनाया कि रचना महिला महिला वोटर्स के बीच किचनी लोकप्रिय हैं. टीएमसी ने उनको हुगली से बीजेपी नेता और एक्ट्रेस लॉकेट चटर्जी के सामने चुनावी मैदान में उतारा था. रचना भी अब बागियों की लिस्ट में शामिल हो गई हैं.

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बागी होकर सुवेंदु की बैठक में पहुंचीं जून मालिया

जून मालिया बंगाली टीवी और फिल्मों का मशहूर चेहरा हैं. उन्होंने 2021 में राजनीति में एंट्री लेते हुए मेदिनीपुर विधानसभा से चुनाव लड़़ा ऐर जीता भी. ममता ने बाद में उनको मेदिनीपुर से टिकट दिया. उन्होंने यहां से बीजेपी की अग्निमित्रा पॉल को हरा दिया था. मेदनीपुर से सांसद जून मालिया पहले ममता दीदी के अपमान का बदला लेना चाहती थीं. लेकिन अब वह बागियों की लिस्ट में शामिल हो गई हैं. 

जून मालिया इंस्टाग्राम

जून मालिया इंस्टाग्राम

साल 1998 का वो दौर जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर अपनी नई पहचान यानी कि नई पार्टी तृणमूल कांग्रेस को जन्म दिया. 28 साल पहले ममता ने ये सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनका राजनीतिक चक्र घूमकर उसी जगह आकर खड़ा हो जाएगा, जिसे उन्होंने चलना शुरू किया. नई पार्टी बनी तो एक-एक कर चेहरे जुड़ते गए. ममता की मेहनत रंग लाई और जल्द ही  तृणमूल कांग्रेस ने बंगाली मानुष के बीच अपनी अलग जगह बना ली. 2026 का विधानसभा चुनाव ममता के लिए बड़ी तबाही जैसा साबित हुआ है. न सत्ता बची और न ही पार्टी. जिन चेहरों को ममता ने चुनाव जिताने की जिम्मेदारी सौंपी थी वे सत्ता जाते ही उनके खिलाफ बगावत पर उतर आए. टीएमसी की वो स्टार पावर, या महिला ब्रिगेड, जो कभी ममता दीदी की ताकत हुआ करती थी, अब उनके लिए मुसीबत बन गई है.

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