प्रवर्तन निदेशालय (ED) की मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़े मामले में मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली. शीर्ष अदालत ने पार्टी के उन बैंक खातों को सामान्य रूप से चालू करने की मांग ठुकरा दी जिन्हें ED ने जांच के दौरान फ्रीज किया है. कोर्ट ने साफ कहा कि इस स्तर पर वह कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप नहीं करेगा.
हाईकोर्ट के आदेश को बताया संतुलित
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ TMC की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. पार्टी ने 20 जुलाई के कलकत्ता हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश को चुनौती दी थी. हाईकोर्ट ने TMC के तीन HDFC बैंक खातों को सामान्य रूप से संचालित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश संतुलित है और फिलहाल उसमें किसी बदलाव की जरूरत नहीं है. इसी के साथ अदालत ने दोनों पक्षों की याचिकाओं का निपटारा कर दिया.
पहले क्या हुआ था?
इस मामले में 9 जुलाई को कलकत्ता हाईकोर्ट ने TMC को अपने दैनिक और जरूरी खर्चों के लिए खातों से सीमित लेनदेन की अनुमति दी थी. हालांकि यह छूट पूरी तरह स्वतंत्र नहीं थी. अदालत ने एक विशेष अधिकारी नियुक्त किया था जिसकी निगरानी में ही खातों का संचालन किया जाना था. यानी पार्टी को नियमित खर्चों के लिए धन इस्तेमाल करने की अनुमति मिली थी लेकिन खातों पर पूर्ण नियंत्रण नहीं दिया गया था. बाद में TMC ने खातों को पूरी तरह संचालित करने की अनुमति मांगते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया.
बागी नेता को भी मिली आपत्ति दर्ज कराने की छूट
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में एक और महत्वपूर्ण निर्देश दिया. अदालत ने TMC के बागी नेता बिस्वनाथ दास को अपनी आपत्तियां और दलीलें कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी के समक्ष रखने की अनुमति दे दी. जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि मामले से जुड़े सभी कानूनी और तथ्यात्मक तर्क मुख्य याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के सामने रखे जा सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट फिलहाल मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं देना चाहता.
ED की जांच के केंद्र में 440 करोड़ रुपये
ED के अनुसार TMC के तीन बैंक खातों में करीब 440 करोड़ रुपये जमा हैं. एजेंसी कथित मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है. जांच का फोकस पार्टी के धन को एक कंपनी और उससे जुड़े दूसरे संस्थान तक पहुंचाने के आरोपों पर है. इसके अलावा विमान और हेलीकॉप्टर की खरीद से जुड़े कुछ वित्तीय लेनदेन भी जांच के दायरे में हैं. हालांकि एजेंसी की जांच अभी जारी है और इन आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना बाकी है. ऐसे में मामले पर अंतिम फैसला संबंधित अदालतों की आगे की सुनवाई के बाद ही सामने आएगा.
यह भी पढ़ें- छात्रों के आंदोलन के बीच बेरोजगारी पर मंथन करेगी कांग्रेस, दो दिन के अधिवेशन में उठेंगे 4 मुद्दे
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं