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जनकपुरी बाइकर मौत मामला: पुलिस ने नहीं दिया कोई जवाब, सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी ठेकेदार को दे दी अंतरिम जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने जनकपुरी बाइक हादसे मामले में मुख्य आरोपी ठेकेदार को अंतरिम जमानत दे दी है. पुलिस ने जमानत याचिका के खिलाफ जवाब दाखिल नहीं किया था.

जनकपुरी बाइकर मौत मामला: पुलिस ने नहीं दिया कोई जवाब, सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी ठेकेदार को दे दी अंतरिम जमानत
  • दिल्ली के जनकपुरी इलाके में फरवरी में खुले गड्ढे में गिरने से बाइक सवार कमल ध्यानी की मौत हुई थी
  • सुप्रीम कोर्ट ने ठेकेदार हिमांशु गुप्ता की जमानत मंजूर की क्योंकि पुलिस ने जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं किया था
  • दिल्ली पुलिस ने मामले में आपराधिक साजिश और गैर-इरादतन हत्या समेत चार धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की है
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दिल्ली के जनकपुरी इलाके में इसी साल फरवरी में हुए एक दर्दनाक हादसे में एक बाइक सवार की मौत हो गई है. इस मामले में पुलिस ने ठेकेदार को आरोपी बनाया था. अब सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को बड़ी राहत दे दी है. कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने आरोपी की जमानत याचिका पर कोई जवाब दाखिल नहीं किया है. दिल्ली पुलिस ने ठेकेदार के साथ-साथ दो अन्य आरोपियों के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल की.

इस हादसे में कमल ध्यानी की मौत हो गई थी, जिनकी बाइक सड़क पर एक खुले गड्ढे में गिर गई थी. जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने ठेकेदार हिमांशु गुप्ता की अंतरिम जमानत मंजूर की. कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि दिल्ली पुलिस ने जमानत याचिका पर कोई जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं किया. कोर्ट ने यह भी कहा कि इसी मामले के सह-आरोपी कविश गुप्ता को पहले ही अंतरिम अग्रिम जमानत मिल चुकी है, इसलिए हिमांशु को भी राहत दी गई. कोर्ट ने जमानत देते हुए यह शर्त भी रखी है कि याचिकाकर्ता को जांच में पूरा सहयोग करना होगा. मामले की अगली सुनवाई 18 मई को होगी.

कोर्ट ने क्या-क्या आरोप लगाए?

इस केस में दिल्ली पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश और गैर-इरादतन हत्या की गंभीर धाराएं लगाईं. पुलिस ने BNS की धारा 105 गैर-इरादतन हत्या, धारा 61(2): आपराधिक साजिश, धारा 238 A/B: सबूत मिटाना और धारा 340(2): जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल के तहत केस दर्ज किया.

दूसरे आरोपी की जमानत खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने जहां मुख्य आरोपी को जमानत दी है, वहीं दूसरी ओर द्वारका कोर्ट ने सब-कॉन्ट्रैक्टर राजेश कुमार प्रजापति की जमानत याचिका खारिज कर दी है. राजेश ने आरोप लगाया था कि उसे पुलिस स्टेशन में गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया था. कोर्ट ने कहा कि आरोपी के पास अपने दावों को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं था.

क्या है पूरा मामला?

फरवरी में कमल ध्यानी जनकपुरी इलाके में अपनी बाइक से जा रहे थे. सड़क पर निर्माण कार्य के कारण एक गड्ढा खुला छोड़ दिया गया था, जिसमें वे गिर गए और उनकी जान चली गई. पुलिस जांच में यह सामने आया कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लापरवाही इस हादसे की मुख्य वजह थी.

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