- समाजवादी पार्टी ने महिला आरक्षण बिल का समर्थन करते हुए भाजपा पर इसे जल्दबाज़ी में लाने का आरोप लगाया
- अखिलेश यादव का कहना है कि बिल के पीछे जनगणना टालने और जातिवार आंकड़े छुपाने की साज़िश है
- भाजपा पर पिछड़े वर्ग की महिलाओं की उपेक्षा और लोकतंत्र के खिलाफ गुप्त योजना चलाने का आरोप लगाया गया
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर देश की सियासत भी गरमा गई है. महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने वाले इस प्रस्तावित कानून पर समाजवादी पार्टी ने समर्थन जताते हुए भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि महिला आरक्षण बिल को जल्दबाज़ी में लाने के पीछे एक साज़िश है, ताकि देश में जनगणना न करानी पड़े और जातिवार आंकड़े सामने न आएं.
महिला आरक्षण पर समर्थन, बीजेपी पर आरोप
समाजवादी पार्टी का कहना है कि वह महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन जिस तरीके से बीजेपी इस बिल को आगे बढ़ा रही है, उस पर सवाल खड़े करना ज़रूरी है. अखिलेश यादव का दावा है कि अगर जनगणना हुई तो जातिवार आंकड़े भी सामने आएंगे और फिर जातिवार आरक्षण देना पड़ेगा, इसी डर से सरकार इस प्रक्रिया से बचना चाहती है.
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सोशल मीडिया पर जताई नाराज़गी
सोशल मीडिया साइट एक्स पर किए गए पोस्ट में अखिलेश यादव ने लिखा कि वह महिला आरक्षण के साथ हैं, लेकिन उस भाजपाई चालबाज़ी के ख़िलाफ़ हैं जो एक साज़िश के तहत की जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी और उसके सहयोगी देश की सबसे बड़ी आबादी यानी पिछड़े वर्ग की महिलाओं पर चुप्पी साधे हुए हैं. अखिलेश के मुताबिक यह लोकतंत्र के ख़िलाफ़ एक गुप्त योजना है, जो तब तक स्वीकार्य नहीं हो सकती जब तक प्रक्रिया में सुधार नहीं किया जाता.
जनगणना और परिसीमन को लेकर चिंता
अखिलेश यादव ने कहा कि संशोधन के नाम पर दिखाई जा रही जल्दबाज़ी के पीछे बीजेपी की असली मंशा जनगणना से बचने की है. उनका आरोप है कि जनगणना आधारित परिसीमन को नकार कर पिछड़ों के अधिकार छीने जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर इसे लागू करने की छूट राजनीतिक दलों को मिलनी चाहिए.
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संसद और विधानसभा में सपा की स्थिति
सपा के आंकड़ों के मुताबिक लोकसभा में समाजवादी पार्टी के 37 सांसद हैं, जबकि राज्यसभा में उसके चार सांसद हैं. उत्तर प्रदेश विधानसभा में सपा के 104 विधायक मौजूद हैं. लोकसभा में बीजेपी और कांग्रेस के बाद समाजवादी पार्टी सबसे ज़्यादा सीटों वाली पार्टी है. ऐसे में यह देखना अहम होगा कि अखिलेश यादव अपने सांसदों को सीधे तौर पर बिल का समर्थन करने को कहते हैं या समर्थन के साथ विरोध की रणनीति अपनाते हैं.
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