- वैद ने कहा- ये धमकियां कहां से आ रही हैं, इसकी तह तक जाना चाहिए.
- उन्होंने इसके पीछे किसी अंदरूनी हाथ होने का जताया शक
- वैद ने कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग, हथियार दिए जाने की मांग की
जम्मू: कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को मिल रही आतंकी धमकियों को लेकर जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को निशाना बनाने वाली 'हिट-लिस्ट' से साफ पता चलता है कि इसमें किसी अंदरूनी व्यक्ति का हाथ है. पूर्व डीजीपी ने इस मामले में मिसाल कायम करने वाली सजा की मांग करते हुए कहा, "प्रशासन की सबसे पहली प्राथमिकता इस हिट-लिस्ट के पीछे के लोगों का पर्दाफाश करना होनी चाहिए. पहचान होने के बाद, इसके पीछे के व्यक्ति को लाल चौक पर फांसी दी जानी चाहिए."
पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा ऑनलाइन जारी की गई धमकी भरी नई चिट्ठी में प्रधानमंत्री के विशेष रोजगार पैकेज के तहत काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के नाम, घर के पते, मोबाइल नंबर और यहां तक कि गाड़ियों के नंबर भी दिए गए हैं. एक महीने में यह दूसरी धमकी है.वैद ने कहा कि सरकार को हिट-लिस्ट के पीछे के मास्टरमाइंड और सीमा पार बैठे आतंकी आकाओं को संवेदनशील निजी डेटा लीक करने वाले मुखबिर, दोनों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए.
हिट-लिस्ट के पीछे के लोगों का पर्दाफाश होना चाहिए
उन्होंने कहा, "इतनी बारीक और निजी जानकारी लीक करना साफ तौर पर किसी अंदरूनी व्यक्ति का काम है. या तो विभाग के अंदर का कोई व्यक्ति या उनके बहुत करीब का कोई व्यक्ति निगरानी कर रहा है और यह डेटा आतंकी आकाओं तक पहुंचा रहा है. वरना, पाकिस्तान को उनके रास्तों, घरों और गाड़ियों के नंबर कैसे पता चलेंगे?" वैद ने कहा कि प्रशासन की सबसे पहली प्राथमिकता इस हिट-लिस्ट के पीछे के लोगों का पर्दाफ़ाश करना होनी चाहिए. इसके बाद इसके पीछे के व्यक्ति को लाल चौक पर फांसी दी जानी चाहिए.वैद्य ने कहा कि इस खतरे को हल्के में नहीं लिया जा सकता.
वैद ने कहा, ''मेरा मानना है कि सरकार को एक सीनियर अधिकारी, चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी, इंटेलिजेंस चीफ और सिक्योरिटी फोर्स के प्रमुख को शामिल करके एक सुरक्षा प्लान बनाना चाहिए. मैं इस पर चर्चा करना चाहूंगा कि पैकेज के तहत घाटी में काम करने वाले कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है. वे आसान और ‘सॉफ्ट' टारगेट हैं, जिन्हें आतंकवादी निशाना बनाना चाहते हैं। वे सुरक्षा बलों का सामना नहीं कर सकते और उनकी संख्या कम हो रही है। इसीलिए आतंकवादी ऐसे आसान टारगेट की तलाश में हैं.''
ट्रेनिंग के साथ हथियार भी देना चाहिए
वैद ने कहा कि मैं सुरक्षा प्लान इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि कुछ दफ्तर काफी सुरक्षित होते हैं, जैसे डिप्टी कमिश्नर ऑफिस, डायरेक्टोरेट, सचिवालय. इन जगहों पर कोई भी हथियार लेकर नहीं आ सकता है. इस तरह के दफ्तरों में कश्मीरी पंडितों की ड्यूटी लगाएं. मेरा यह भी मानना है कि सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग भी देनी चाहिए. इसके साथ ही क्या करना है और क्या नहीं, इसकी भी जानकारी देनी चाहिए. इन्हें हथियार भी देने चाहिए, ताकि कोई अगर हमला कर रहा है, तो ये भी अपनी सुरक्षा कर सकें.
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