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This Article is From Feb 12, 2026

एक्स पोस्ट फैक्टो मंजूरी केस: SC की फटकार के बाद जयराम रमेश ने वापस ली रिट याचिका, जानिए अदालत ने क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट ने एक्स पोस्ट फैक्टो पर्यावरणीय मंजूरी के खिलाफ दायर जयराम रमेश की याचिका पर सख्ती दिखाते हुए कहा कि अदालत के फैसले को रिट याचिका से चुनौती नहीं दी जा सकती. CJI की टिप्पणी के बाद रमेश ने याचिका वापस ले ली.

एक्स पोस्ट फैक्टो मंजूरी केस: SC की फटकार के बाद जयराम रमेश ने वापस ली रिट याचिका, जानिए अदालत ने क्या कहा
  • सुप्रीम कोर्ट ने जयराम रमेश की एक्स पोस्ट फैक्टो पर्यावरण मंजूरी पर याचिका को रिट याचिका मानने से इंकार किया
  • अदालत ने स्पष्ट किया कि पहले दिए गए फैसले की समीक्षा के लिए पुनर्विचार याचिका ही सही कानूनी माध्यम है
  • CJI सूर्यकांत ने कहा कि गलत तरीके से कोर्ट के फैसले को चुनौती देने पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश की उस याचिका पर सख्त टिप्पणी की है, जिसमें एक्स पोस्ट फैक्टो (पूर्व प्रभाव से) पर्यावरणीय मंजूरी देने की प्रक्रिया को कानून के खिलाफ बताया गया था. सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ कहा कि किसी पहले से दिए गए निर्णय की समीक्षा रिट याचिका के जरिए नहीं मांगी जा सकती. अदालत ने पूछा “आपने इस मुद्दे पर पुनर्विचार याचिका क्यों नहीं दाखिल की?”

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह मामला दरअसल कोर्ट के ही पुराने फैसले से जुड़ा है. ऐसे में रिट याचिका के माध्यम से सीधे चुनौती देना उचित प्रक्रिया नहीं है.  CJI ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई पक्ष इस तरह से कोर्ट के फैसले की समीक्षा चाहता है,  तो उसे “भारी जुर्माने (exemplary costs)” के लिए तैयार रहना चाहिए. उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि इस तरह की याचिकाएं कई बार सिर्फ मीडिया में चर्चा पाने के लिए दायर की जाती हैं.

अदालत की सख्त टिप्पणियों के बाद जयराम रमेश की ओर से पेश वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता कानून के तहत उपलब्ध उचित विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसमें पुनर्विचार याचिका भी शामिल है.

किस फैसले के खिलाफ थी यह याचिका?

जयराम रमेश ने 2025 में सुप्रीम कोर्ट की तीन‑जजों की पीठ द्वारा दिए गए वनशक्ति फैसले को चुनौती दी थी. उस फैसले में अदालत ने कहा था कि जो परियोजनाएं बिना पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी के चल रही हैं, उन्हें एक्स पोस्ट फैक्टो मंजूरी के लिए आवेदन करने का अवसर दिया जा सकता है. कोर्ट ने कहा था कि बिना जांच के ऐसी परियोजनाओं को तुरंत ध्वस्त करना सार्वजनिक धन की हानि होगा. फैसले में यह भी कहा गया था कि यदि परियोजनाएं कानूनन स्वीकार्य पाई जाती हैं तो दंडात्मक राशि वसूलकर उन्हें जारी रखने दिया जा सकता है. लेकिन अगर परियोजनाएं कानून के खिलाफ पाई जाती हैं तो उन्हें तोड़ा जाना चाहिए.

याचिका में जयराम रमेश ने क्या कहा था?

याचिका में जयराम रमेश ने तर्क दिया था कि पूर्व प्रभाव से मंजूरी देना पर्यावरण कानूनों के खिलाफ है और यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन सकता है. लेकिन अदालत ने साफ कहा कि इस मुद्दे पर चुनौती रिट याचिका के जरिए नहीं दी जा सकती और उचित रास्ता पुनर्विचार याचिका ही है. 

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