- बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पद से इस्तीफा दे सकते हैं
- नीतीश कुमार राज्यसभा के जरिए दिल्ली की राजनीति में हो सकते हैं शिफ्ट
- बिहार में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बनने की संभावना है
बिहार के सियासी गलियारों में वह 'खिचड़ी' पक रही है, जिसकी खुशबू दिल्ली तक पहुंच रही है. पटना से दिल्ली तक सुगबुगाहट तेज है कि बिहार की राजनीति के 'चाणक्य' कहे जाने वाले नीतीश कुमार अब अपनी पारी को एक नया मोड़ देने वाले हैं. खबर तो यह भी है कि नीतीश अपनी कुर्सी त्यागकर राज्यसभा के रास्ते दिल्ली की राजनीति में शिफ्ट हो सकते हैं. लेकिन ट्विस्ट सिर्फ नीतीश का जाना नहीं, बल्कि बिहार को मिलने वाला 'पहला' बीजेपी मुख्यमंत्री और नीतीश की विरासत संभालने आ रहे उनके बेटे निशांत कुमार हैं. क्या अगले एक हफ्ते में बिहार में सत्ता का पूरा गणित बदल जाएगा? आइए समझते हैं.
अगले हफ्ते ही हो सकता है बड़ा उलटफेर
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन वापसी की आखिरी तारीख 9 मार्च है. अगर महागठबंधन ने छठा उम्मीदवार नहीं उतारा, तो एनडीए के सभी पांचों उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए जाएंगे. कयास हैं कि इसी दिन नीतीश कुमार सीएम पद से इस्तीफा दे सकते हैं. अगर चुनाव हुआ, तो 16 मार्च की रात तक तस्वीर साफ हो जाएगी.
नीतीश की 'दिल्ली रवानगी' के पीछे की वजह क्या?
1 मार्च को ही नीतीश कुमार 75 वर्ष के हो गए हैं. हाल के दिनों में उनके स्वास्थ्य को लेकर उठते सवालों और कुछ सार्वजनिक घटनाओं ने सरकार की छवि पर असर डाला है. चर्चा है कि चुनाव के समय ही बीजेपी-जेडीयू के बीच 'डील' हुई थी कि नीतीश चुनाव बाद पद छोड़ देंगे. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नीतीश केंद्र में मंत्री बनते हैं या सिर्फ राज्यसभा सांसद बनकर रहेंगे.
बीजेपी की ओर से कौन बनेगा मुख्यमंत्री?
अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं तो सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि आखिर बिहार का नया मुख्यमंत्री कौन बनेगा. बिहार में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बनने की राह हमवार होती दिख रही है. रेस में दो नाम सबसे आगे हैं. पहला उपमुख्यमंत्री और प्रदेश की राजनीति के बड़े चेहरे सम्राट चौधरी का, वहीं दूसरा नाम केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का चल रहा है.राय को अमित शाह का करीबी माना जाता है.
बेटे 'निशांत' का सियासी डेब्यू
इस पूरी कहानी का सबसे रोचक पहलू नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का राजनीति में प्रवेश है. माना जा रहा है कि अगले एक-दो दिन में वे जेडीयू की सदस्यता लेंगे और उन्हें उपमुख्यमंत्री जैसा बड़ा पद देकर पार्टी की विरासत सौंपी जा सकती है.
जेडीयू का अपना दांव
भले ही बीजेपी सीएम पद के लिए तैयार बैठी हो, लेकिन जेडीयू के भीतर एक धड़ा अभी भी अपने नेता को ही मुख्यमंत्री बनाए रखने के लिए जोर डाल रहा है. एनडीए विधायकों की बैठक में ही इस 'पावर शिफ्ट' पर अंतिम मुहर लगेगी.
दो महीने पहले दिल्ली में बैठक में हुआ था फैसला
सूत्रों के अनुसार दो महीने पहले बीजेपी के शीर्ष नेताओं के साथ दिल्ली में बिहार जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई थी. इसमें ट्रांजिशन के बारे में विस्तार से चर्चा हुई थी. साथ ही टाइम लाइन पर भी बात की गई थी. यह तय हुआ था कि राज्य सभा के चुनाव के समय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सम्मानजनक विदाई दे दी जाए. खुद नीतीश कुमार भी कई बार यह बात बीजेपी नेतृत्व को बता चुके थे कि वे अब लंबे समय तक यह जिम्मेदारी नहीं निभाना चाहते. इसके बाद बीजेपी की ओर से भी सहमति दे दी गई. इससे पहले ऐसा हो चुका है कि बीजेपी से कम सीटें आने के बावजूद बीजेपी ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाया था. इस बार के विधानसभा चुनाव में जनता ने नीतीश कुमार के नाम पर जबरदस्त समर्थन दिया. इसके बाद यह तय था कि वे ही फिर से मुख्यमंत्री बनेंगे. हालांकि उनकी सेहत को लेकर तब भी चिंताएं व्यक्त की जाती रही थीं.
अभी विधानसभा में क्या स्थिति?
अभी विधानसभा में स्थिति यह है कि अगर जनता दल यूनाइटेड को हटा दें तो बीजेपी के पास चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा को मिला कर 117 विधायक हैं. यह बहुमत के आंकड़े से केवल पांच कम है. यानी बीजेपी जेडीयू के बिना भी सरकार चलाने की स्थिति में है. हालांकि बीजेपी नेता साफतौर पर कहते हैं कि यह अकल्पनीय है क्योंकि बीजेपी और जेडीयू दोनों ने ही मिलकर चुनाव लड़ा था और बीजेपी किसी भी सूरत में जेडीयू के बिना सरकार नहीं बनाना चाहती है. वे यह भी कहते हैं कि केंद्र में मोदी सरकार के स्थायित्व के लिए भी जेडीयू का समर्थन आवश्यक है. यह जरूर है कि इसी बिना पर बीजेपी बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाना चाहती है और अभी तक के संकेतों के अनुसार ऐसा ही होने जा रहा है.
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