एक टैक्सी चालक को जयपुर ले जाने के नाम पर बुकिंग देना कितना खतरनाक साबित हो सकता है, इसका भयावह उदाहरण दिल्ली और राजस्थान से सामने आया है. 22 वर्षीय टैक्सी चालक आशीष पाल को कुछ युवकों ने ऑफलाइन बुकिंग के बहाने अपने जाल में फंसाया और फिर कथित तौर पर उसकी हत्या कर दी. आरोप है कि रास्ते में किराए को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद चालक की पिटाई की गई और गला दबाकर उसकी हत्या कर दी गई. इसके बाद शव को कार में छिपाकर राजस्थान ले जाया गया और एक जंगल क्षेत्र में फेंक दिया गया. पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी वाहन लूटने की योजना बनाकर निकले थे और आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे.
ऑफलाइन बुकिंग बन गई मौत का सफर
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी जसबीर सिंह के अनुसार मृतक की पहचान उत्तर प्रदेश के औरैया निवासी 22 वर्षीय आशीष पाल के रूप में हुई है. आशीष एक टैक्सी चालक था और 20 जुलाई को उसने दिल्ली के सरिता विहार से जयपुर के लिए एक ऑफलाइन बुकिंग स्वीकार की थी. शुरुआत में मामला राजस्थान के जयपुर ग्रामीण जिले के मोखमपुरा थाने में जीरो एफआईआर के रूप में दर्ज किया गया. बाद में जांच के लिए केस दिल्ली के सरिता विहार थाने को स्थानांतरित किया गया, जहां नियमित एफआईआर दर्ज की गई.
दिल्ली पुलिस @DCPSEastDelhi के सरिता विहार थाने की टीम ने टैक्सी चालक के अपहरण एवं हत्या के मामले में 5 आरोपियों को गिरफ्तार व 1 नाबालिग़ को अभिरक्षा में लिया।
— Delhi Police (@DelhiPolice) August 21, 2026
आरोपियों ने जयपुर जाने के बहाने टैक्सी बुक कर चालक की हत्या की और वाहन व सामान लूटकर राजस्थान में ही शव छिपा दिया था।… pic.twitter.com/nPYFjjAOnS
रास्ते में हुआ विवाद, फिर कर दी हत्या
जांच में सामने आया कि यात्रा के दौरान किराए को लेकर चालक और यात्रियों के बीच कहासुनी हो गई. आरोप है कि विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने आशीष के साथ मारपीट की. पुलिस के मुताबिक इसके बाद चालक का गला दबाकर उसकी हत्या कर दी गई. हत्या के बाद शव को वाहन के भीतर छिपाकर रखा गया ताकि किसी को शक न हो.
राजस्थान के जंगल में फेंका शव
हत्या के बाद आरोपी वाहन लेकर राजस्थान पहुंचे. वहां मोखमपुरा क्षेत्र के एक वन इलाके में शव को फेंक दिया गया. इसके बाद आरोपी टैक्सी लेकर अलग-अलग स्थानों पर घूमते रहे और पुलिस से बचने की कोशिश करते रहे. जांच के दौरान पुलिस ने मृतक का शव भी बरामद कर लिया, जिसकी पहचान परिजनों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर की गई.
सीसीटीवी और तकनीकी जांच से खुला राज
मामले की जांच के लिए विशेष टीम बनाई गई. पुलिस ने टैक्सी बुकिंग स्थल, हाईवे, टोल प्लाजा और अन्य स्थानों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले. तकनीकी निगरानी के जरिए वाहन की मूवमेंट को ट्रैक किया गया. दिल्ली पुलिस ने राजस्थान पुलिस के साथ भी समन्वय स्थापित किया और कई महत्वपूर्ण सबूत जुटाए.
नाबालिग समेत छह आरोपी गिरफ्तार
जांच के बाद पुलिस ने 16 वर्षीय एक नाबालिग को हिरासत में लिया. इसके अलावा अनिल जाट, कालूराम, सुमित, मंगल दीप उर्फ सानू और अर्जुन रिनवा को गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने चोरी की गई टैक्सी राजस्थान से बरामद कर ली. वाहन अनिल जाट और कालूराम के कब्जे से मिला.
पहले से थी लूट की साजिश
पूछताछ में पता चला कि आरोपी कथित तौर पर पैसों की कमी से जूझ रहे थे और किसी वाहन को लूटने की योजना बना रहे थे. इसी मकसद से उन्होंने टैक्सी बुक कर चालक को निशाना बनाया. हत्या के बाद आरोपियों ने आशीष का मोबाइल फोन और नकदी भी इस्तेमाल की. पुलिस के अनुसार उन्होंने एटीएम कार्ड के जरिए पैसे निकालने की भी कोशिश की.
पहचान छिपाने का प्रयास
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने वाहन की नंबर प्लेट हटाने की कोशिश की और कुछ समय अजमेर में भी रुके. बाद में नागौर पहुंचने पर उन्होंने अपने एक परिचित को घटना की जानकारी दी और क्षेत्र छोड़ने की योजना बनाई. पुलिस ने बताया कि एक आरोपी को जयपुर रेलवे स्टेशन से पकड़ा गया. अब सभी आरोपियों की भूमिकाओं की पुष्टि सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य, गवाहों के बयान और अन्य सबूतों के आधार पर की जा रही है.
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