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Instagram पर अकाउंट ब्लॉक होने के दावों से छिड़ी बहस, कई पत्रकारों और मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने उठाए सवाल

Instagram पर अकाउंट और पोस्ट हटाए जाने के दावों के बाद सोशल मीडिया सेंसरशिप को लेकर बहस तेज हो गई है. कई पत्रकारों, यूट्यूबर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार और Meta की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है.

Instagram पर अकाउंट ब्लॉक होने के दावों से छिड़ी बहस, कई पत्रकारों और मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने उठाए सवाल

देश में Instagram पर कई अकाउंट्स, पोस्ट और वीडियो हटाए जाने या भारत में प्रतिबंधित किए जाने के दावों के बाद सोशल मीडिया सेंसरशिप को लेकर नई बहस छिड़ गई है. पत्रकारों, यूट्यूबर्स और कुछ डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने आरोप लगाया है कि कथित तौर पर सरकार की आलोचना या राजनीतिक व्यंग्य से जुड़े कंटेंट पर कार्रवाई की जा रही है. दूसरी ओर, इन दावों पर केंद्र सरकार की ओर से कोई औपचारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, जबकि Meta की ओर से भी सार्वजनिक रूप से कोई पुख्ता बयान नहीं आया है. 

कई क्रिएटर्स ने उठाए सवाल

CJP नेता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि भारत में हजारों Instagram अकाउंट्स को प्रतिबंधित किया गया है और बड़ी संख्या में वीडियो हटाए गए हैं. उन्होंने Meta की भूमिका पर भी सवाल उठाए और इस कार्रवाई को लेकर तंज कसते हुए पोस्ट साझा किया.

वहीं राजनीतिक व्यंग्य करने वाले प्लेटफॉर्म ‘द देशभक्त' के संस्थापक आकाश बनर्जी ने भी आरोप लगाया है कि Instagram पर सरकार के प्रति आलोचनात्मक कंटेंट को हटाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में Meta की ओर से केवल यह बताया जा रहा है कि कार्रवाई स्थानीय नियमों के अनुरूप की गई है, लेकिन कंटेंट हटाने के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं की जा रही.

4PM National ने अकाउंट ब्लॉक होने का दावा किया

डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म 4PM National ने भी दावा किया है कि उसका Instagram अकाउंट भारत में ब्लॉक कर दिया गया है. प्लेटफॉर्म ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि उसे किसी तरह का पूर्व नोटिस या स्पष्ट कारण नहीं बताया गया. 4PM National ने आरोप लगाया कि पहले भी उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई की गई थी और उसे अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा था. प्लेटफॉर्म ने इस ताजा कार्रवाई को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बताया है.

सरकार और Meta की ओर से क्या कहा गया?

फिलहाल जिन पोस्ट और बयानों के आधार पर ये दावे किए जा रहे हैं, उन पर केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. Meta ने भी सार्वजनिक रूप से इन मामलों पर कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है. हालांकि सामान्य तौर पर सोशल मीडिया कंपनियां संबंधित देश के कानूनों, अदालतों के आदेशों या सक्षम सरकारी एजेंसियों के अनुरोधों के आधार पर कंटेंट प्रतिबंधित या हटाने की कार्रवाई करती हैं.

सेंसरशिप बनाम रेगुलेशन की बहस

इन दावों के बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर कंटेंट मॉडरेशन, ऑनलाइन रेगुलेशन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज हो गई है. आलोचकों का कहना है कि कंटेंट हटाने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होनी चाहिए ताकि उपयोगकर्ताओं को यह स्पष्ट जानकारी मिल सके कि किसी पोस्ट या अकाउंट पर कार्रवाई क्यों की गई है. वहीं दूसरी तरफ यह तर्क भी दिया जाता है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को स्थानीय कानूनों और प्रक्रिया का पालन करना होता है, जिसके तहत कुछ कंटेंट पर कार्रवाई की जा सकती है.
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