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This Article is From Apr 20, 2022

भारत की जीडीपी की रफ्तार घटने का अनुमान, कच्चे तेल के दाम नौ दिन में 10 प्रतिशत बढ़े

ताज़ा वर्ल्ड इकानॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में IMF ने 2022-23 के दौरान भारत की GDP की रफ़्तार पहले अनुमानित 9 से घटाकर 8.2 प्रतिशत कर दी

भारत की जीडीपी की रफ्तार घटने का अनुमान, कच्चे तेल के दाम नौ दिन में 10 प्रतिशत बढ़े
प्रतीकात्मक फोटो.
नई दिल्ली:

रूस-यूक्रेन युद्ध और रूस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की वजह से भारत समेत दुनिया भर की अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ने की आशंका बढ़ती जा रही है. अपने ताज़ा वर्ल्ड इकानॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में IMF ने 2022-23 के दौरान भारत की GDP की रफ़्तार पहले अनुमानित 9% से घटाकर 8.2% कर दी है. बुधवार को कच्चे तेल का इंडियन बास्केट और महंगा हो गया. इससे देश में महंगाई और बढ़ने का अंदेशा बढ़ गया है.

रूस - यूक्रेन युद्ध और रूस पर लगे प्रतिबंधों का साया भारतीय अर्थव्यवस्था पर गहराता जा रहा है. इंटरनेशनल मोनेटरी फंड यानी IMF ने अपनी ताज़ा वर्ल्ड इकानॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में भारत की GDP की अनुमानित विकास दर 9% से घटाकर 8.2% कर दी है. IMF ने ग्लोबल ग्रोथ के अनुमान को भी घटाकर 3.6% कर दिया है. वर्ल्ड इकानॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में इसके लिए रूस-यूक्रेन युद्ध और रूस पर लगे प्रतिबंधों को मुख्य वजह बताया गया है.  

वाशिंगटन में अटलांटिक काउंसिल के एक कार्यक्रम में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने माना कि महंगा होता कच्चा तेल और दूसरी कमोडिटीज एक बड़ी चुनौती बन गई हैं. निर्मला सीतारमण ने कहा कि इससे समूची अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा. 

रूस -यूक्रेन युद्ध को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल का इंडियन बास्केट और महंगा होता जा रहा है. बुधवार को पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक 11 अप्रैल 2022  को कच्चे तेल के इंडियन बास्केट की कीमत 97.82 प्रति बैरल थी. 19 अप्रैल को कच्चे तेल के इंडियन बास्केट की कीमत बढ़कर 107.92 प्रति बैरल पहुंच गई.
पिछले नौ दिनों में कच्चा तेल 10.10 डॉलर प्रति बैरल तक महंगा हुआ है, यानी 10.32% तक महंगा.

महंगे होते कच्चे तेल की वजह से देश में महंगाई और बढ़ने की आशंका बढ़ती जा रही है.  

निर्मला सीतारमण ने वाशिंगटन में कहा, पिछले महीने भारत की महंगाई दर करीब 6.9 फीसदी रही. हमारा टॉलरेंस बैंड + - 2% के साथ केवल 4% है. हमने 6% का उल्लंघन किया है लेकिन हमने वास्तव में इसे इतनी बुरी तरह से नहीं तोड़ा है. बेशक कीमत का बोझ आम आदमी पर है. हम उसे इस तनाव से मुक्त करने की कोशिश कर रहे हैं.

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हिमांशु शेखर मिश्र
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