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कभी बंदूक उठाने वाली महिला नक्सल मॉडलिंग करने रैंप पर उतरी, वीडियो देख लोग बोले- 'यही है असली बदलाव'

From Maoist Camps To Modelling Ramps: जब भी लोग 'माओवादी' या 'नक्सली' शब्द सुनते हैं, तो उनके दिमाग में घने जंगलों में हथियार थामे लड़ाकों की छवि बन जाती है. लेकिन छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से गुरुवार को आई खबर ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है.

कभी बंदूक उठाने वाली महिला नक्सल मॉडलिंग करने रैंप पर उतरी, वीडियो देख लोग बोले- 'यही है असली बदलाव'
बस्तर की पूर्व महिला माओवादियों ने रायपुर में किया रैंप वॉक.
X@ANI

Chhattisgarh News: नेशनल हैंडलूम डे (National Handloom Day 2026) के अवसर पर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर (Raipur) में एक खास कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बस्तर की आत्मसमर्पित नक्सली महिलाओं ने रैंप वॉक (Ramp Walk) करके सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. कभी घने जंगलों में हथियार लेकर घूमने वाली ये महिलाएं जब रैंप पर उतरीं तो पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम तालियों की आवाज से गूंज उठा.

'महिलाओं के हौसले की एक खूबसूरत कहानी'

इस स्वदेशी फैशन शो में उन्होंने छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कोसा सिल्क और हाथ से बुने खूबसूरत कपड़ों को पहनकर मंच पर अपना जलवा बिखेरा. यह पल सिर्फ एक फैशन शो नहीं था, बल्कि बंदूक छोड़कर सम्मान और आत्मनिर्भरता की नई जिंदगी शुरू करने वाली इन महिलाओं के हौसले की एक खूबसूरत कहानी थी. इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महिलाओं से बातचीत की और उनका उत्साह बढ़ाते हुए उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं.

'वे तो बिल्कुल भी पूर्व माओवादी नहीं लग रही हैं'

7 अगस्त को आयोजित हुए इस कार्यक्रम का वीडियो आज यानी 13 अगस्त को सामने आया है, जिसे सोशल मीडिया पर देखने के बाद लोग खूब पसंद कर रहे हैं. एक X यूजर ने लिखा, 'कुछ साल पहले ऐसे दृश्यों की कल्पना करना भी मुश्किल था. यह सशक्तिकरण का सबसे सच्चा रूप है.' वहीं, एक दूसरे यूजर ने लिखा, 'अगर यह सच है, तो इसमें शामिल सभी लोगों को बधाई. वे बिल्कुल भी पूर्व माओवादी नहीं लग रही हैं. ऐसी कहानियों को ज्यादा प्रचार क्यों नहीं मिलता? 

Former Women Maoists Ramp Walk Viral Video Raipur Handloom Day

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस परआयोजित कार्यक्रम में रैंप वॉक करतीं पूर्व नक्सली महिलाओं की तस्वीर.
Photo Credit: X@vishnudsai

'माओवादी से फ़ैशन आइकॉन बनने तक का सफर'

एक तीसरे यूजर ने इस बदलाव को 'सचमुच अविश्वसनीय बताया और माओवादी विद्रोह से लेकर रैंप वॉक तक के सफर का ज़िक्र किया. एक और कमेंट करने वाले ने बताया कि कई प्रतिभागी दशकों से वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित इलाकों से आई थीं और कहा कि रैंप पर उनका दिखना उन मौकों को दिखाता है जो मुख्यधारा के समाज का हिस्सा बनने के साथ उन्हें मिले हैं.

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