भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मॉनिटरी पॉलिसी मीटिंग के बाद देश की इकोनॉमी, GDP ग्रोथ और महंगाई और को लेकर नए आंकड़े जारी किए हैं. 3 से 5 अगस्त तक चली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद बुधवार को आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि केंद्रीय बैंक ने फिलहाल रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है. वहीं, वैश्विक चुनौतियों के बीच केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट कर दिया है कि देश में महंगाई का स्तर उसके तय लक्ष्य से ऊपर बना रहेगा, लेकिन राहत की बात यह है कि अर्थव्यवस्था की रफ्तार (GDP ग्रोथ) पहले से बेहतर रहने का अनुमान है.
इस साल कैसी रहेगी महंगाई?
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि मौद्रिक नीति समिति ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई (Consumer Price Index) के अनुमान में मामूली संशोधन किया है. केंद्रीय बैंक ने महंगाई अनुमान को पहले के 5.1% से 10 बेसिस पॉइंट घटाकर 5.0% कर दिया है. यानी देश में महंगाई बढ़ेगी तो सही, लेकिन पहले जितने आंकड़े का अनुमान जताया गया था, उससे थोड़ी कम रहेगी.
तिमाही के हिसाब से महंगाई का अनुमान:
- सितंबर 2026 तिमाही: 4.7% (पहले 5.1% का अनुमान था)
- दिसंबर 2026 तिमाही: 5.9% (पहले भी 5.9% ही था)
- मार्च 2027 तिमाही: 5.5% (पहले 5.4% का अनुमान था)
जून 2027 तिमाही: 5.3%
कैसी रहेगी देश की GDP ग्रोथ?
महंगाई की चिंता के बीच देश की आर्थिक विकास दर को लेकर अच्छी खबर आई है. आरबीआई के अनुसार, इस वित्त वर्ष में भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ 6.7% रहने का अनुमान है.
बता दें कि जून एमपीसी बैठक में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण जीडीपी अनुमान को 6.9% से घटाकर 6.6% किया गया था. लेकिन अब इसमें 10 बेसिस पॉइंट का सुधार करते हुए इसे 6.7% कर दिया गया है.
तिमाही के हिसाब से GDP ग्रोथ का अनुमान
- जून 2026 तिमाही: 7.0% (पहले 6.6% का अनुमान था)
- सितंबर 2026 तिमाही: 6.4% (पहले 6.3% का अनुमान था)
- दिसंबर 2026 तिमाही: 6.5% (पहले भी 6.5% ही था)
- मार्च 2027 तिमाही: 6.8% (पहले भी 6.8% ही था)
आम आदमी पर क्या होगा इसका असर?
- लोन की EMI पर असर: रेपो रेट के 5.25% पर बरकरार रहने से आपके होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की ब्याज दरों में तुरंत कोई बढ़ोतरी नहीं होगी. आम जनता पर EMI का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा.
- घरेलू बजट पर असर: महंगाई दर 5% रहने का मतलब है कि खान-पान और रोजमर्रा की चीजों के दाम 4% के आदर्श लक्ष्य से ऊपर बने रहेंगे, जिससे रसोई का बजट थोड़ा प्रभावित रह सकता है.
- आर्थिक गतिविधियां और कारोबार: जीडीपी ग्रोथ का 6.7% पर सुधरना यह दर्शाता है कि देश में आर्थिक गतिविधियां और कारोबार मजबूत स्थिति में हैं, जिसका सकारात्मक असर रोजगार और बाजार में बना रहेगा.
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक उथल-पुथल के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में बनी हुई है. घरेलू मांग और बेहतर विकास दर के बूते भारत स्थिर आर्थिक वृद्धि की ओर अग्रसर है.
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