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रूसी सेना से लौटे कुछ भारतीय, फिर युद्ध में पहुंचे, अब लापता; केंद्र सरकार ने SC में दी चिंताजनक जानकारी 

सुप्रीम कोर्ट ने विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया कि मृत भारतीयों के परिवारों को रूस सरकार से मुआवजा प्राप्त करने के लिए जरूरी दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी कराने में सहायता दी जाए.

रूसी सेना से लौटे कुछ भारतीय, फिर युद्ध में पहुंचे, अब लापता; केंद्र सरकार ने SC में दी चिंताजनक जानकारी 
रूस में भारतीय लोगों के गायब होने पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है.

रूसी सेना में शामिल भारतीय नागरिकों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को एक अहम और चिंताजनक जानकारी सामने आई. केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि कुछ भारतीय नागरिकों को कूटनीतिक प्रयासों के जरिए रूसी सेना से समय से पहले सैन्य सेवा समाप्ति दिलाकर भारत वापस लाया गया था. हालांकि बाद में इनमें से कुछ लोग दोबारा रूस गए और रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती हो गए. अब इन लोगों का पता लगाना मुश्किल हो रहा है.

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष विदेश मंत्रालय की ओर से स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई. अदालत में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि कई मामलों में भारतीय नागरिक आर्थिक लाभ के लालच में स्वेच्छा से रूसी सेना में भर्ती होने के प्रस्ताव स्वीकार करते हैं. बाद में वे भारत सरकार से संपर्क कर सैन्य सेवा से मुक्त कराने की मांग करते हैं.

सरकारी चेतावनियों के बावजूद नहीं रुक रही भर्ती

विदेश मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि पिछले दो वर्षों के दौरान सरकार ने कई बार भारतीय नागरिकों को चेतावनी दी थी कि रूस-यूक्रेन संघर्ष क्षेत्र में सैन्य सेवा से गंभीर और जानलेवा खतरे जुड़े हैं. इसके बावजूद भारतीय नागरिकों के रूसी सेना में भर्ती होने के मामले सामने आते रहे.

रिपोर्ट के अनुसार कुछ भारतीय पर्यटक, छात्र या कामकाजी वीजा पर रूस पहुंचे और वहां अस्थायी आर्थिक लाभ की उम्मीद में सेना में शामिल हो गए. मंत्रालय ने यह भी बताया कि कुछ लोगों ने रूसी पासपोर्ट हासिल करने और रूसी सेना में भर्ती होने के लिए भारतीय नागरिकता छोड़ने की इच्छा जताते हुए मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क किया. कुछ मामलों में लोगों ने भारतीय अधिकारियों से सलाह लिए बिना ही यह कदम उठा लिया.

267 भारतीय हुए भर्ती, 51 की हो चुकी है मौत

विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार अब तक 267 भारतीय नागरिक रूसी सशस्त्र बलों में शामिल हुए हैं. इनमें से 139 भारतीयों को भारत सरकार के कूटनीतिक प्रयासों से समय से पहले सेना से मुक्त कराया गया. वहीं संघर्ष के दौरान 51 भारतीयों की मौत हो चुकी है.

सरकार ने बताया कि 20 मृत भारतीयों के पार्थिव अवशेषों की पहचान की प्रक्रिया अभी जारी है. इसके अलावा 77 भारतीयों के ठिकाने का पता लगाने के लिए भारतीय दूतावास रूसी अधिकारियों के लगातार संपर्क में है. रूस ने इनमें से केवल सात लोगों के लापता होने की पुष्टि की है. मृतकों में से पांच परिवारों को मुआवजा मिल चुका है.

मुआवजे के लिए परिवारों को मिलेगी कानूनी सहायता

सुप्रीम कोर्ट ने विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया कि मृत भारतीयों के परिवारों को रूस सरकार से मुआवजा प्राप्त करने के लिए जरूरी दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी कराने में सहायता दी जाए. अदालत ने राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के विधिक सेवा प्राधिकरणों को भी प्रभावित परिवारों की मदद करने का निर्देश दिया है.

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