- लॉरेंस बिश्नोई जेल में है लेकिन नेटवर्क विदेश से एक्टिव है.
- गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा अब अलग गुट बनाकर ऑपरेट कर रहे हैं.
- कौशल-बंबीहा नेटवर्क का सदस्य गौरव गडोली UAE से डिपोर्ट हुआ, कनाडा में अर्श डल्ला से लिंक सामने आए.
पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की गैंगवार अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रह गई है. गैंगस्टरों के कई बड़े नेटवर्क के तार कनाडा, अमेरिका, दुबई, अजरबैजान और यूरोप तक जुड़े हुए हैं. खास बात यह है कि कई गैंगस्टर खुद विदेश में बैठे हैं, जबकि कुछ जेल में बंद हैं, लेकिन पुलिस और जांच एजेंसियों के मुताबिक उनके नेटवर्क के लोग विदेश से ही रंगदारी, हथियारों की सप्लाई, ड्रग्स और शूटर्स की व्यवस्था जैसे काम संभालते हैं. इस पूरी कहानी को समझने के लिए सबसे पहले लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ की जोड़ी को समझना जरूरी है. एक दौर था, जब लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ दोनों एक ही नेटवर्क का हिस्सा थे. गोल्डी बराड़ कनाडा गया और धीरे-धीरे उत्तरी अमेरिका में बिश्नोई गैंग के लिए अहम भूमिका निभाने लगा. सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के बाद दोनों के नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने आए, लेकिन बाद में दोनों के बीच मतभेद की खबरें सामने आईं और आज तस्वीर पहले जैसी नहीं है.
लॉरेंस बिश्नोई खुद जेल में है, लेकिन उसकी गैंग को लेकर जांच एजेंसियों का दावा है कि नेटवर्क जेल के बाहर एक्टिव है. यही इस पूरे नेटवर्क की सबसे बड़ी खासियत है. मुखिया जेल में है, लेकिन उसके नाम पर चलने वाला नेटवर्क बाहर काम करता रहता है.
अमेरिका और कनाडा की जांच में भी बिश्नोई नेटवर्क के सदस्यों और विदेश में एक्टिव सहयोगियों का जिक्र सामने आया है. जुलाई 2026 में सामने आए अमेरिकी दस्तावेजों में कहा गया कि बिश्नोई और उसके सहयोगियों का नेटवर्क अमेरिका तक फैला हुआ था. ड्रग्स, हिंसा और दूसरे अपराधों से जुड़े आरोपों की जांच की गई. यानी अब गैंग चलाने का तरीका बदल गया है. पहले गैंगस्टर अपने इलाके में बैठकर काम करवाते थे, लेकिन अब विदेश में बैठे हैंडलर भारत में बैठे शूटर्स को टारगेट, हथियार, पैसे और निर्देश भेजने की कोशिश करते हैं.
कैसे फैला है नेटवर्क का पूरा जाल?
गोल्डी बराड़ इस पूरे नेटवर्क का शायद सबसे चर्चित विदेशी चेहरा है. वह 2017 में स्टूडेंट वीजा पर कनाडा गया था. बाद में उसका नाम लॉरेंस बिश्नोई के साथ जुड़ा और सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के बाद वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया. कनाडा में मौजूदगी ने उसे एक ऐसा प्लेटफॉर्म दिया, जहां से भारत में चल रहे नेटवर्क के साथ संपर्क बनाए रखना आसान था. बाद में हुई जांचों में अमेरिका और कनाडा में भी उसके नेटवर्क के लिंक सामने आए हैं. अगस्त 2026 में कनाडाई जांच से जुड़ी रिपोर्ट में भी गोल्डी को बिश्नोई नेटवर्क का उत्तरी अमेरिका में महत्वपूर्ण ऑपरेटर बताया गया. हालांकि, उसी रिपोर्ट में दोनों के बीच बाद में अलगाव की बात भी कही गई है.
कभी बिश्नोई गैंग के लिए काम करने वाला रोहित गोदारा अब गोल्डी के साथ है. रोहित गोदारा इस गैंगवार की कहानी में बेहद अहम नाम है. राजस्थान के इस गैंगस्टर का नाम पहले लॉरेंस बिश्नोई गैंग के साथ जुड़ा रहा. बाद में वह गोल्डी बराड़ के साथ दिखाई देने लगा. यानी एक समय जो नेटवर्क लॉरेंस बिश्नोई के इर्द-गिर्द था, उसमें बाद में एक नया धड़ा बन गया. गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा का. पुलिस के मुताबिक, रोहित गोदारा विदेश से नेटवर्क को संभालने वाले अहम लोगों में रहा है. 2026 की रिपोर्टों में उसे गोल्डी बराड़ का सहयोगी और विदेश से ऑपरेशन देखने वाला व्यक्ति बताया गया है. यही वजह है कि आज गैंगवार को सिर्फ बिश्नोई बनाम बंबीहा कहना पूरी तस्वीर नहीं है. अब इसके अंदर कई छोटे-बड़े गुट, पुराने दोस्त, नए गठजोड़ और व्यक्तिगत दुश्मनियां शामिल हो चुकी हैं.

साल 2025 में अमेरिका में लॉरेंस के करीबी माने जाने वाले हरि बॉक्सर पर हमले के बाद गैंगवार के विदेश तक पहुंचने की तस्वीर और साफ हुई. रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले की जिम्मेदारी रोहित गोदारा और गोल्डी बराड़ से जुड़े दावे में सामने आई. इसके बाद बिश्नोई खेमे और
गोल्डी-गोदारा खेमे के बीच सोशल मीडिया पर खुले तौर पर आरोप-प्रत्यारोप और धमकियों का दौर भी चला.
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कौशल-बंबीहा नेटवर्क...
अब आते हैं दूसरे बड़े खेमे कौशल-बंबीहा नेटवर्क पर. कौशल चौधरी का नाम हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर के अपराध जगत में काफी पुराना है. उसका नेटवर्क बंबीहा गैंग से जुड़ा हुआ माना जाता है और लॉरेंस बिश्नोई गुट से इसकी पुरानी दुश्मनी रही है. दिलचस्प बात यह है कि कौशल के खुद जेल में होने के बावजूद नेटवर्क को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सका. अगस्त 2026 में हरियाणा एसटीएफ ने कौशल-बंबीहा गैंग के एक्टिव मेंबर गौरव गडोली को यूएई से डिपोर्ट करवाकर गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक, वह विदेश में रहकर रंगदारी, आपराधिक साजिश और दूसरे संगठित अपराधों में गैंग की मदद कर रहा था.
पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क में विदेश बैठे लोगों के जरिए डब्बा कॉल, यानी ऐसे नंबरों से रंगदारी की कॉल कराई जाती थीं, जिन्हें ट्रेस करना मुश्किल होता है. यही तरीका बताता है कि गैंग अब सिर्फ हथियार और शूटर्स पर निर्भर नहीं है, बल्कि विदेश में बैठकर टेक्नोलॉजी और फर्जी पहचान का इस्तेमाल भी कर रहा है.
इसका मतलब यह है कि बंबीहा खेमे की कहानी भी सिर्फ पंजाब या हरियाणा तक सीमित नहीं है. कनाडा जैसे देशों में बैठे अपराधियों और भारत में मौजूद शूटर्स के बीच एक ऐसा नेटवर्क बनने की कोशिश हुई, जिसमें ऊपर बैठा हैंडलर टारगेट तय करता है और नीचे मौजूद मॉड्यूल उसे अंजाम देने की कोशिश करता है. जग्गू भगवानपुरिया इस गैंगवार का एक और बड़ा नाम है. उसका रिश्ता कभी लॉरेंस बिश्नोई से काफी करीबी रहा था. दोनों के नेटवर्क का नाम सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में भी सामने आया था, लेकिन बाद में दोनों के बीच दुश्मनी हो गई.
2025 में जग्गू भगवानपुरिया की मां की हत्या ने इस गैंगवार को और निजी बना दिया. इस हमले की जिम्मेदारी बंबीहा गैंग से जुड़े एक सोशल मीडिया अकाउंट ने ली थी. इसे बंबीहा और भगवानपुरिया नेटवर्क की पुरानी दुश्मनी से जोड़कर देखा गया. भगवानपुरिया खुद जेल में है, लेकिन जांच एजेंसियों के मुताबिक उसका नेटवर्क जेल के अंदर से भी चलता रहा. उसका नेटवर्क दुनिया के कई देशों जैसे पाकिस्तान, कनाडा और अमेरिका तक फैला हुआ है.
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इसलिए गैंगवार को समझने का सबसे आसान तरीका यह है कि यहां दोस्ती और दुश्मनी स्थायी नहीं है. आज जो किसी का साथी है, कल वही उसका टारगेट बन सकता है. जांच एजेंसियों के मुताबिक, हर गैंग का एक पूरा मॉड्यूल सिस्टम है. ऊपर विदेश में बैठा हैंडलर होता है. उसके नीचे अलग-अलग देशों और शहरों में छोटे ऑपरेटर होते हैं. भारत में स्थानीय लड़कों को भर्ती किया जाता है. उन्हें हथियार, वाहन, ठिकाना और टारगेट की जानकारी दी जाती है.
रंगदारी के लिए विदेश से कॉल कराई जाती है. पैसे की वसूली स्थानीय लोग करते हैं. शूटिंग के लिए स्थानीय मॉड्यूल तैयार होता है. कई मामलों में सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेने या धमकी देने का काम भी विदेश बैठे लोग करते हैं. यानी आज का गैंगस्टर खुद हर काम करने के बजाय एक फ्रेंचाइजी मॉडल की तरह अपराध चलाने की कोशिश करता है. अलग-अलग शहरों में अलग-अलग मॉड्यूल और ऊपर एक या दो हैंडलर.
कनाडा खास तौर पर पंजाब से जुड़े गैंग नेटवर्क के लिए अहम बन गया है. बड़ी पंजाबी आबादी, भारत-कनाडा के बीच लगातार आवाजाही और विदेश में मौजूद पुराने संपर्कों ने इन नेटवर्क को जगह दी. कनाडाई जांच एजेंसियों ने भी पिछले कुछ साल में भारतीय मूल के संगठित अपराध नेटवर्क को लेकर कार्रवाई तेज की है. साल 2026 में सामने आई जांच रिपोर्टों में बिश्नोई नेटवर्क से जुड़े कई लोगों की पहचान और अमेरिका-कनाडा में उनके कथित ऑपरेशन का जिक्र किया गया.
अब इस गैंगवार का एक नया मोर्चा अमेरिका बनता दिखाई दे रहा है. अमेरिकी जांच में बिश्नोई, गोल्डी बराड़, रोहित गोदारा और भगवानपुरिया नेटवर्क से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं. जुलाई 2026 में अमेरिकी FBI की कार्रवाई में जग्गू भगवानपुरिया गैंग से जुड़े नितीश कौशल को भी वांटेड सूची में रखा गया.
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अमेरिका में जांच का फोकस सिर्फ शूटिंग या रंगदारी तक नहीं है. ड्रग्स और संगठित अपराध से जुड़े नेटवर्क की भी जांच हुई है. जांच दस्तावेजों के आधार पर रिपोर्टों में कहा गया कि विदेश में अपराध से कमाए पैसे का हिस्सा भारत तक भेजे जाने का आरोप है. यह सिर्फ चार-पांच गैंगस्टरों की कहानी नहीं है. यह एक ऐसे ट्रांसनेशनल क्रिमिनल नेटवर्क की कहानी है, जिसमें भारत में बैठे छोटे अपराधी, जेल में बंद गैंगस्टर और विदेश में छिपे हैंडलर एक-दूसरे से जुड़े हुए दिखाई देते हैं.
इन गैंगों का सबसे खतरनाक मॉडल यही है कि विदेश में बैठा शख्स खुद भारत नहीं आता. वह स्थानीय युवाओं को इस्तेमाल करता है. किसी को पैसे का लालच दिया जाता है, किसी को हथियार दिए जाते हैं और किसी को सोशल मीडिया पर गैंग की चमक-दमक दिखाकर भर्ती किया जाता है.
पुलिस और जांच एजेंसियों के सामने इसलिए चुनौती सिर्फ किसी एक गैंगस्टर को पकड़ने की नहीं है. असली चुनौती उस पूरे नेटवर्क को तोड़ने की है जिसमें फंडिंग, हथियार, ड्रग्स, विदेशी हैंडलर, स्थानीय शूटर्स और सोशल मीडिया मॉड्यूल शामिल हैं.
और शायद यही वजह है कि आज पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली की गैंगवार को सिर्फ स्थानीय अपराध मानना मुश्किल है. इन गैंगों की लड़ाई अब सीमाओं के पार पहुंच चुकी है और इनके बीच दोस्ती-दुश्मनी के समीकरण लगातार बदल रहे हैं.
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