खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर एक नया और बड़ा दावा सामने आया है. एक कथित लीक ऑडियो में गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने कहा है कि उसकी टीम ने ही निज्जर की हत्या की थी. खुफिया एजेंसियों के सूत्रों ने भी ऑडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि होने का दावा किया है. इस ऑडियो के सामने आने के बाद एक बार फिर निज्जर हत्याकांड और उसके पीछे की संभावित वजहों पर चर्चा तेज हो गई है.
परमजीत सिंह पम्मा से बातचीत का दावा
बताया जा रहा है कि यह बातचीत गोल्डी बराड़ और परमजीत सिंह पम्मा के बीच हुई थी. पम्मा खालिस्तानी गतिविधियों से जुड़ा नाम है और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की वांटेड सूची में शामिल है. बातचीत के दौरान बराड़ कथित तौर पर हत्या की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए इसके पीछे की वजह भी बताता है.
ड्रग्स कारोबार से जोड़ा हत्या का कारण
ऑडियो में बराड़ दावा करता है कि निज्जर ऐसे लोगों का समर्थन करता था जो कम उम्र के युवाओं को ड्रग्स बेचने के लिए तैयार करते थे. उसके अनुसार 16-17 साल के लड़कों को नशे के कारोबार में धकेला जाता था और कई मामलों में उन्हें मुखबिरी करने के लिए भी ब्लैकमेल किया जाता था.
बराड़ का आरोप है कि निज्जर ऐसे लोगों को संरक्षण देता था और जरूरत पड़ने पर उनके नेटवर्क का इस्तेमाल करता था. इसी वजह से उसकी टीम ने यह कदम उठाया. ऑडियो में वह यह भी कहता सुनाई देता है कि "हर किसी को अपने किए का नतीजा भुगतना पड़ता है."
भारतीय एजेंसियों के पुराने दावों को मिली मजबूती?
भारतीय एजेंसियां लंबे समय से कहती रही हैं कि निज्जर की हत्या के पीछे गैंगों की आपसी रंजिश और संगठित अपराध से जुड़े कारण हो सकते हैं. कई रिपोर्टों में बिश्नोई-बराड़ नेटवर्क की संभावित भूमिका की चर्चा भी होती रही है.
सूत्रों के अनुसार जुलाई 2026 में अमेरिका की ओर से लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ पर लगाए गए आरोपों ने भारत के उस पुराने आकलन को और बल दिया, जिसमें इस मामले को गैंगवार और आपराधिक नेटवर्क से जुड़ा बताया गया था.
भारत ने पहले भी खारिज किए थे आरोप
भारत लगातार कनाडा के उन आरोपों को खारिज करता रहा है जिनमें निज्जर की हत्या को भारतीय सरकारी एजेंटों से जोड़ने की कोशिश की गई थी. भारत का कहना रहा है कि ऐसे आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए गए. बाद में संगठित अपराध से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय जांच के दौरान भी यह कहा गया कि भारतीय सरकारी अधिकारियों को सीधे हत्या से जोड़ने वाला कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया.
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