- वित्त मंत्रालय के डेढ़ सौ से अधिक अधिकारी कर्नाटक के हंपी में चिंतन शिविर के लिए इकट्ठा हो रहे हैं
- चिंतन शिविर में आर्थिक सुधारों और वर्तमान आर्थिक व्यवस्था पर खुले मन से चर्चा और सुझाव देने का अवसर मिलेगा
- वित्त मंत्रालय ने मुख्य आर्थिक सलाहकार सहित तीन आर्थिक विशेषज्ञों को आमंत्रित किया है
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन की अगुवाई में वित्त मंत्रालय के डेढ़ सौ से भी अधिक अधिकारी दो दिनों के लिए कर्नाटक के हंपी में इकट्ठा हो रहे हैं. बीस और इक्कीस दिसंबर को वित्त मंत्रालय का महत्वपूर्ण चिंतन शिविर हंपी में होने जा रहा है. वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार इस चिंतन शिविर की ख़ास बात यह है कि देश के आर्थिक एजेंडे पर खुले मन से बात होगी. ज्वाइंट सेक्रेटरी से लेकर वित्त मंत्री तक डेढ़ से सौ भी अधिकारी इस चिंतन शिविर में हिस्सा लेने के लिए हंपी पहुंच रहे हैं.
ये शिविर अलग क्यों जानिए
- इस शिविर में अलग-अलग सत्रों का आयोजन किया जा रहा है. इन सत्रों में आर्थिक सुधारों और वर्तमान आर्थिक व्यवस्था को लेकर चर्चा होगी. चिंतन शिविर की सबसे ख़ास बात यह है कि इसमें ओहदे से हट कर बात रखी जाएगी. यानी कोई भी अधिकारी किसी से भी प्रश्न पूछ सकता है, अपने सुझाव दे सकता है और खुल कर अपनी असहमति व्यक्त कर सकता है.
- सरकार से जुड़े आर्थिक विशेषज्ञों को भी इस चिंतन शिविर में आमंत्रित किया गया है. तीन विशेषज्ञ बुलाए गए हैं, जिनमें मुख्य आर्थिक सलाहकार भी शामिल हैं. वे अलग-अलग सत्रों में अर्थव्यवस्था के मौजूदा हालात के बारे में प्रजेंटेशन देंगे. इनसे भी वित्त मंत्रालय के अधिकारी सीधे सवाल जवाब कर सकेंगे.
- आपको बता दें कि स्वयं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन कर्नाटक से राज्य सभा सांसद हैं. हंपी में चिंतन शिविर आयोजन करने के पीछे यह भी कारण है कि वे अपने मंत्रालय के अधिकारियों को हंपी के गौरवशाली इतिहास से रूबरू कराना चाहती हैं.
- सूत्रों के अनुसार शनिवार और रविवार को सभी प्रतिभागियों को हंपी की सैर भी कराई जाएगी. कार्यक्रम इस तरह बनाया गया है कि अधिकारी स्वयं भी जहां जाना चाहें वहां जा सकेंगे. भोजन में स्थानीय व्यंजनों को तरजीह दी गई है ताकि राज्य के गौरवशाली खाद्य परंपरा का परिचय मिल सके.
- वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इस शिविर का उद्देश्य मौजूदा विषयों पर स्वस्थ, सार्थक और स्वतंत्र चर्चा करना है. इस तरह की चर्चा से आर्थिक नीतियों को पैना करने में मदद मिलती है. उनके अनुसार इससे पहले इसी तरह का चिंतन शिविर गुजरात के केवड़िया में भी हो चुका है. ऐसे शिविर के आयोजन से अधिकारियों में आपस में ही संपर्क बढ़ाने और आपसी सहयोग, समन्वय और विश्वास मज़बूत करने में मदद मिलती है.
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