- केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में अब 45 दिन बाद ही एलपीजी सिलेंडर बुक हो सकेगा
- हरदीप पुरी ने बताया कि शहरी इलाकों में गैस सिलेंडर की बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिन का अंतर रखना होगा
- एलपीजी उत्पादन में पिछले पांच दिनों में 28 प्रतिशत वृद्धि की गई है और अतिरिक्त खरीद भी की जा रही है
ईरान संकट के बीच देश में एलपीजी को लेकर मारामारी की खबरों के बीच सरकार ने सिलेंडर बुकिंग और डिलीवरी के नियमों में कई अहम बदलाव किए हैं. केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को संसद में बताया कि ग्रामीण इलाकों में अब 45 दिन के बाद ही एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग हो सकेगी. इसके अलावा वन टाइम कोड के बिना सिलेंडर की डिलीवरी और कमर्शल एलपीजी के नियम भी बदले गए हैं.
शहरों में 25 दिन, गांवों में 45 दिन बाद बुकिंग
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि रसोई गैस की डिमांड को संतुलित रखने के लिए शहरी इलाकों में गैस सिलेंडर की बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिन का अंतर रखना होगा, जबकि ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के लिए 45 दिन का अंतराल निर्धारित किया गया है. उन्होंने कहा कि कुछ जगहों पर डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेल स्तर पर गैस सिलेंडर जमा करने और घबराहट में ज्यादा बुकिंग करने की प्रवृत्ति देखी जा रही है. हालांकि यह स्थिति सप्लाई की कमी के कारण नहीं बल्कि लोगों की चिंता के कारण पैदा हुई है. घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग से लेकर डिलीवरी तक का औसत समय अभी भी 2.5 दिन है.

बिना वन टाइम कोड के डिलीवरी नहीं
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने बताया आगे कहा कि सरकार डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) प्रणाली का विस्तार कर रही है. अभी यह करीब 50 प्रतिशत उपभोक्ताओं के लिए लागू है, जिसे बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक किया जा रहा है. इस सिस्टम में सिलेंडर की डिलीवरी तभी दर्ज होगी, जब उपभोक्ता अपने मोबाइल पर आए वन-टाइम कोड से इसकी पुष्टि करेगा. इससे गैस की गलत तरीके से सप्लाई या हेरफेर को रोकना आसान होगा.
कमर्शल एलपीजी के लिए 20% की लिमिट
पेट्रोलियम मिनिस्टर ने बताया कि आज से तेल कंपनियां कमर्शियल एलपीजी की औसत मंथली डिमांड का 20 प्रतिशत हिस्सा आवंटित करेंगी ताकि जमाखोरी और काला बाजारी न हो. पुरी ने कहा कि कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई को नियंत्रित करने का मकसद काला बाजारी को रोकना है, न कि होटल और रेस्टोरेंट उद्योग को नुकसान पहुंचाना. कमर्शियल एलपीजी बिना सब्सिडी के बेची जाती है. इसके लिए कोई रजिस्ट्रेशन या बुकिंग नहीं होती. अगर कमर्शियल एलपीजी की बिक्री खुली की छूट दी गई तो सिलेंडरों की अवैध बिक्री का खतरा होगा.

5 दिन में 28% LPG उत्पादन बढ़ा
उन्होंने बताया कि पिछले 5 दिनों में रिफाइनरियों को दिए गए निर्देशों के बाद एलपीजी उत्पादन में 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है. इसके अलावा अतिरिक्त एलपीजी की खरीद भी सक्रिय रूप से की जा रही है. सरकार की प्राथमिकता यह है कि देश के 33 करोड़ से अधिक परिवारों खासकर गरीब और वंचित वर्ग की रसोई में गैस की कमी न हो. अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर बिना रुकावट गैस दी जा रही है.
प्रशासनिक अधिकारी भी करेंगे निगरानी
मंत्री ने बताया कि नई व्यवस्था की निगरानी के लिए इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के कार्यकारी निदेशकों की तीन सदस्यीय समिति 9 मार्च को बनाई गई थी. इस समिति ने देश भर में राज्य के नागरिक आपूर्ति विभागों और रेस्तरां संघों के साथ बैठकें आयोजित की हैं और ये बैठकें जारी हैं. उन्होंने बताया कि तेल मार्केटिंग कंपनियों के फील्ड अधिकारी और एंटी अडल्टरेशन सेल डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर निगरानी कर रहे हैं. केंद्रीय गृह सचिव ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ बैठक कर राज्य प्रशासन को इस व्यवस्था से जोड़ने पर भी चर्चा की है.
मंत्री बोले, सरकार खुद उठा रही खर्चा
पुरी ने बताया कि हाल ही में 60 रुपए एडजस्ट करने के बाद बिना सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 913 रुपए है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से इसकी कीमत करीब 987 रुपए होनी चाहिए थी. वैश्विक कीमतों को देखें तो प्रति सिलेंडर 134 रुपए की बढ़ोतरी की जरूरत थी, लेकिन सरकार ने 74 रुपए खुद वहन किए. इसके कारण उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए अतिरिक्त खर्च प्रतिदिन 80 पैसे से भी कम बैठता है.
पड़ोसी देशों से भारत में LPG सस्ती
पुरी ने बताया कि पड़ोसी देशों में एलपीजी की कीमतें भारत से ज्यादा हैं. पाकिस्तान में एलपीजी सिलेंडर करीब 1,046 रुपए, श्रीलंका में 1,242 रुपए और नेपाल में 1,208 रुपए के आसपास है. उन्होंने बताया कि तेल मार्केटिंग कंपनियों को 2024-25 में हुए करीब 40 हजार करोड़ रुपए के नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने 30 हजार करोड़ रुपए को मंजूरी दी है.
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