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इजरायल की आयरन डोम तकनीक से भारत का ‘सुदर्शन चक्र’ होगा सुपरचार्ज! मोदी के दौरे के बीच क्यों बनेगा यह गेमचेंजर?

भारत अपने स्वदेशी ‘सुदर्शन चक्र’ एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने के लिए इजरायल की आयरन डोम, डेविड्स स्लिंग और एरो जैसी तकनीकें शामिल कर सकता है. पीएम मोदी के इजरायल दौरे में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर बड़ा समझौता संभव है, जिससे भारत की मिसाइल व ड्रोन रोधी क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी.

इजरायल की आयरन डोम तकनीक से भारत का ‘सुदर्शन चक्र’ होगा सुपरचार्ज! मोदी के दौरे के बीच क्यों बनेगा यह गेमचेंजर?
  • भारत अपने स्वदेशी मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम सुदर्शन चक्र से बड़े शहरों और सामरिक ठिकानों की सुरक्षा करेगा.
  • इजरायल ने आयरन डोम जैसी मिसाइल-डिफेंस तकनीक भारत को ट्रांसफर करने का प्रस्ताव दिया है.
  • सुदर्शन में 3 लेयर होंगी जिनमें ड्रोन, रॉकेट, मिसाइल इंटरसेप्शन और बैलिस्टिक मिसाइल रोधी क्षमताएं शामिल हैं.
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भारत अपने स्वदेशी मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम ‘सुदर्शन चक्र' को तैयार कर रहा है, जो 2035 तक देश के बड़े शहरों, सामरिक ठिकानों और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को मिसाइल-ड्रोन खतरों से सुरक्षित करने का लक्ष्य रखता है. इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 25-26 फरवरी का इजरायल दौरा इस मिशन को नई गति देने वाला साबित हो सकता है.

इस यात्रा के दौरान इजरायल ने भारत को एक बड़ा प्रस्ताव दिया है- आयरन डोम जैसी अग्रणी मिसाइल-डिफेंस तकनीक का ट्रांसफर. यानी, भारत का ‘सुदर्शन चक्र' अब सिर्फ भारतीय नहीं, बल्कि इजरायली टेक्नोलॉजी + भारतीय इंजीनियरिंग का मिलाजुला ‘सुपर शील्ड' बनने जा रहा है.

चीन-पाकिस्तान के खिलाफ अब तक का सबसे मजबूत सुरक्षा कवच

भारतीय रक्षा रणनीति में यह पहली बार है जब भारत एक ऐसा घरेलू एयर-डिफेंस सिस्टम बना रहा है, जिसकी क्षमता आयरन डोम, एरो और डेविड्स स्लिंग जैसी तकनीकों से प्रेरित और पूरक होगी. चीन की हाई-एंड मिसाइलें और पाकिस्तान की ड्रोन-संचालित रणनीति को देखते हुए भारत को एक शक्तिशाली, आधुनिक 'एयर शील्ड' की जरूरत थी और अब वह उपलब्ध होती दिख रही है.

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आयरन डोम क्या है और भारत के लिए इतना जरूरी क्यों?

इजरायल का आयरन डोम दुनिया की सबसे सफल मिसाइल-डिफेंस तकनीकों में से एक है:

  • 90% तक सफलता दर
  • रॉकेट, मोर्टार, कम दूरी की मिसाइलें व ड्रोन को इंटरसेप्ट
  • खतरे का रियल-टाइम विश्लेषण
  • खाली इलाके की ओर जाने वाले रॉकेट को ऑटो-इग्नोर- यानी लागत की बचत
  • एक लॉन्चर में 20 Tamir इंटरसेप्टर मिसाइलें
  • हजारों रॉकेट मार गिराकर गाजा-लेबनान सीमा पर साबित कर चुकी ताकत

भारत के लिए यह तकनीक सीधे लाभ देती है. विशेषकर पाकिस्तान से आने वाले ड्रोन/रॉकेट हमलों और चीन की स्वॉर्म ड्रोन रणनीति को मात देने में.

भारत का ‘सुदर्शन चक्र' कैसे सुपरचार्ज होगा?

भारत जो एयर-डिफेंस सिस्टम बना रहा है, उसमें कई लेयर होंगी:

1. नीचे की लेयर

ड्रोन, रॉकेट, मोर्टार- आयरन डोम जैसी क्षमता
इजरायली सेंसर + AI आधारित ट्रैकिंग

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2. मिड-लेयर

बराक-8 MR-SAM / LR-SAM का उन्नत संस्करण
साइबर-डिफेंस + नेटवर्क-इंटेलिजेंस जोड़कर हाई-अक्यूरेसी इंटरसेप्शन

3. टॉप-लेयर

एरो और डेविड्स स्लिंग जैसी मिसाइल-डिफेंस तकनीक
बैलिस्टिक मिसाइल रोधी क्षमता

भारत को यह तकनीक इसलिए भी आकर्षक लग रही है क्योंकि इजरायल फास्ट डिलीवरी और नो-स्ट्रिंग्स-अटैच्ड पॉलिसी पर काम करता है. 2025-26 में इजरायल के हथियार ऑपरेशन सिंदूर में बेहद प्रभावी साबित हुए थे.

आयरन बीम: भारत के लिए भविष्य का ‘लेजर शील्ड'

इजरायल का नया Iron Beam लेजर-इंटरसेप्ट सिस्टम भी भारत के ध्यान में है. 100kW लेजर, 10 किमी तक रेंज, प्रकाश की गति से इंटरसेप्शन, लगभग शून्य लागत प्रति इंटरसेप्शन, असीमित फायरिंग क्षमता. यह तकनीक आने वाले दशक में भारत के सुदर्शन चक्र का हिस्सा बन सकती है.

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मोदी का इजरायल दौरा क्यों है निर्णायक?

दौरे के दौरान निम्न बड़े फैसले लिए जा सकते हैं:

  • हाई-टेक रक्षा तकनीक ट्रांसफर पर बड़ा MoU
  • संयुक्त उत्पादन और R&D साझेदारी
  • $8.6 बिलियन के हथियार सौदों पर सहमति
  • Heron MK-2 ड्रोन की नई खरीद
  • संवेदनशील AI, क्वांटम, साइबर और रडार तकनीक का साझा विकास

इसके अलावा PM मोदी इजरायल संसद (Knesset) को भी संबोधित करेंगे. जो दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई देता है.

भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय

भारत इजरायल का सबसे बड़ा हथियार खरीदार है (34% निर्यात भारत को). स्पाइक, हेरोन, बराक-8 और रैम्पेज जैसे हथियारों ने साबित किया है कि इजरायली टेक्नोलॉजी कितनी असरदार है. इजरायल भारत को 'हेक्सागन अलायंस' में शामिल करना चाहता है. इससे चीन-पाकिस्तान को संतुलित करने में मदद मिलेगी.  यह साझेदारी आने वाले वर्षों में एयर डिफेंस, साइबर सुरक्षा, ड्रोन स्वार्म, AI और क्वांटम टेक्नोलॉजी को मजबूत करेगी.

भारत का ‘सुदर्शन चक्र' अब सिर्फ हथियार नहीं, एक रणनीतिक सुरक्षा कवच बनेगा. इजरायल की तकनीक और भारत की इंजीनियरिंग मिलकर ऐसा सिस्टम बनाएगी जो पाकिस्तान की ड्रोन रणनीति को ध्वस्त करेगा. चीन के मिसाइल खतरों को निष्क्रिय करेगा. बड़े शहरों को एक मल्टी-लेयर्ड सुरक्षा शील्ड देगा. भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगा.

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