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This Article is From Mar 17, 2026

2 पहुंचे, बाकी 19 भी आएंगे? रंग लाई भारत की मुहिम, होर्मुज से जहाजों को लाने के मिशन की इनसाइड स्टोरी

शिवालिक' के बाद 'नंदा देवी' की सफल लैंडिंग कांडला बंदरगाह पर हो गई है. तीसरा भारतीय जहाज 'जग लाडकी' भी जल्‍द भारत आ जाएगा. इसे भारत की कूटनीतिक जीत कहा जा रहा है. होर्मुज से जहाजों को लाने के मिशन की इनसाइड स्टोरी.

2 पहुंचे, बाकी 19 भी आएंगे? रंग लाई भारत की मुहिम, होर्मुज से जहाजों को लाने के मिशन की इनसाइड स्टोरी
  • ईरान ने होर्मुज में युद्ध के बीच भारत के जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान किया है जिससे दो जहाज भारत पहुंचे
  • PM मोदी की पहल और विदेश मंत्री जयशंकर की बातचीत के कारण भारतीय जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति मिली है
  • नौसेना के 3 युद्धपोत भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट में लगातार एस्कॉर्ट कर सुरक्षित पारगमन सुनिश्चित कर रहे
नई दिल्‍ली:

ईरान ने युद्ध के बीच हॉर्मुज स्ट्रेट में जहाजों का रास्‍ता रोक दिया है. अमेरिका समेत दुनियाभर के देशों के जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य में फंस गए हैं, लेकिन भारत के दो जहाज 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' इसी रास्‍ते से निकल गए हैं. यह भारत की एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मानी जा रही है. भारत का तीसरा जहाज 'जग लाडकी' भी भारत आने के लिए निकल पड़ा है. हॉर्मुज स्ट्रेट से भारतीय जहाजों के सेफ पैसेज मिलना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल के बाद संभव हो सका है. इसके बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी इस संकट की घड़ी में ईरान से बातचीत के जरिए भारतीय जहाजों की राह को आसान बनाया. आइए आपको बताते हैं कि मिडिल ईस्‍ट संकट के बीच आखिर कैसे भारत अपने जहाजों को निकाल पाने में सफल रहा है?   

शिवालिक, नंदा देवी और अब आ रहा 'जग लाडकी'

भारतीय रसोई गैस टैंकर 'नंदा देवी' मंगलवार (17 मार्च 2026) को गुजरात के कांडला पोर्ट पर पहुंच गया. यह जहाज करीब 46,000 मीट्रिक टन लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर आया है. मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के बावजूद, इस जहाज ने भारतीय और ईरानी नौसेना की मदद से सुरक्षित रास्ता पार किया. इससे पहले सोमवार को 'शिवालिक' नामक जहाज मुंद्रा पोर्ट पहुंचा था. इन दोनों जहाजों के आने से देश में गहराते जा रहे एलपीजी संकट और सिलेंडर की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी. अब संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से भारतीय ध्वज वाला जहाज 'जग लाडकी' करीब 81,000 टन से अधिक कच्चा तेल लेकर भारत के लिए रवाना हो गया है. 'जग लाडकी' इस हफ्ते भारत आ जाएगा. 

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भारत के कितने जहाज अभी ओर फंसे? 

फारस की खाड़ी क्षेत्र में होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में 22 भारतीय जहाज मौजूद थे. इनमें कुल 611 नाविक सवार हैं. नंदा देवी गुजरात के कांडला बंदरगाह पर पहुंच गया है, जबकि संयुक्त अरब अमीरात से लगभग 81,000 टन कच्चा तेल लेकर आ रहा जहाज 'जग लाडकी' मुंद्रा बंदरगाह की ओर रवाना हो चुका है. इस जहाज और उस पर सवार सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं. जग लाडकी को मिलाकर अभी 20 भारतीय जहाज फार की खाड़ी में मौजूद हैं. अब सवाल ये उठता है कि क्‍या जग लाडली के बाद और कितने भारतीय जहाज हॉर्मुज स्ट्रेट को पार कर स्‍वदेश आ पाएंगे? क्‍या ईरान ने सभी भारतीय जहाजों को हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दे दी है? बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है. 

'मौत' के समंदर से सुरक्षित निकले भारतीय जहाज

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारतीय जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए नौसेना के तीन युद्धपोत लगातार एस्कॉर्ट कर रहे हैं. यानी जहाजों को सुरक्षा के साथ बाहर लाया जा रहा है. भारतीय झंडे वाले जहाज को इंडियन नेवी लगातार सुरक्षा दे रही है. हाल ही में नौसेना शिवालिक और नंदा देवी भारतीय जहाजों को सुरक्षित निकला. ये  जहाज अब भारत पहुंच चुके हैं. जग लाडकी पर खतरा भी मंडराया था, यह फुजैराह ऑयल टर्मिनल हमले से बाल-बाल बचा. रिपोर्ट के मुताबिक, नौसेना का एक वॉरशिप रातभर एस्कॉर्ट करता रहा. इसके बाद जहाज को सुरक्षित इलाके में पहुंचाया गया. हालांकि, अभी खतरा पूरी तरह टला नहीं है.

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भारत की बड़ी कूटनीति सफलता

यह भारत की एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मानी जा रही है, दोनों जहाजों पर तिरंगा लगा है. यह बता रहा है कि जहां एक ओर कई अन्य देश हॉर्मुज स्ट्रेट से अपने जहाजों को निकाल पाने में असफल रहे हैं, वहीं भारत ने अपने दो जहाजों को सफलतापूर्वक यहां से निकाला है. इसका श्रेय धैर्यपूर्ण कूटनीतिक पहल और भारत के ईरान समेत इस क्षेत्र के सभी देशों से अत्यंत सौहार्द्रपूर्ण संबंधों को दिया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत के बाद यह बड़ी सफलता मिल सकी है. हॉर्मुज स्ट्रेट से भारतीय जहाजों के सेफ पैसेज मिलना भी प्रधानमंत्री मोदी की पहल के बाद संभव हो सका है. उन्होंने 12 मार्च को ईरान के राष्ट्रपति से फोन पर बात की थी. 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले के बाद यह पहली बार शीर्ष स्तर पर हुआ संपर्क था. इस बातचीत के जरिए प्रधानमंत्री मोदी का ईरान को संदेश बिल्कुल स्पष्ट था- भारत, ईरान का दुश्मन नहीं, बल्कि मित्र है. भारत ईरान की तकलीफ को समझता है. प्रधानमंत्री ने भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भी बातचीत की थी और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी. इसके बाद ईरान का रुख नरम पड़ा. 

होर्मुज में रास्ता देने के बदले ईरानी टैंकर छोड़ने की मांग गलत

मोदी सरकार ने उन खबरों को खारिज किया जिनमें कहा गया कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय ध्वज वाले जहाजों को सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के बदले में भारत द्वारा जब्त किए गए तीन तेल टैंकरों को छोड़े जाने की मांग कर रहा है. सरकार के शीर्ष सूत्रों ने कहा कि यह रिपोर्ट निराधार है और भारत तथा ईरान के अधिकारियों के बीच इस तरह की कोई चर्चा नहीं हुई है. सूत्रों के अनुसार, किसी भी सूरत में ये तीनों जहाज ईरान के स्वामित्व वाले नहीं हैं. खबरों के मुताबिक, भारत के तटीय अधिकारियों ने अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित तीन तेल टैंकरों को जब्त कर लिया है, जिनका कथित तौर पर ईरान से संबंध है. भारत होर्मुज जलडमरूमध्य से 20 से अधिक भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों का सुरक्षित पारगमन सुनिश्चित करने के लिए तेहरान के संपर्क में है. 

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क्‍या ईरान ने सभी भारतीय जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी?

ईरान ने भारतीय जहाजों को होर्मुज से कैसे गुजरने दिया, कई देशों के जहन में ये बात है? इस पर भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया, "मैं इस समय उनसे बातचीत कर रहा हूं और मेरी बातचीत से कुछ नतीजे निकले हैं. यह प्रक्रिया जारी है. अगर इससे मुझे फायदा हो रहा है, तो मैं स्वाभाविक रूप से इस पर आगे भी विचार करता रहूंगा." हालांकि, विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारतीय ध्वज वाले जहाजों के लिए ईरान के साथ कोई "व्यापक समझौता" नहीं है और "जहाज की प्रत्येक आवाजाही एक अलग घटना है." उन्होंने इस बात से भी इनकार किया कि ईरान को बदले में कुछ मिला है और कहा कि दिल्ली और तेहरान का एक-दूसरे के साथ लेन-देन का इतिहास रहा है, जिसके आधार पर यह बातचीज शुरू की गई, जिसका लाभ भी मिला है. 

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तीसरा देश न उठाए लाभ... भारत में बोले ईरान के राजदूत

भारत को ईरान से पुराने संबंधों का लाभ मिडिल ईस्‍ट संकट के बीच मिल रहा है. भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने दिल्ली-तेहरान संबंधों पर बात करते हुए कहा कि दोनों देशों के हित समान हैं. दोनों देशों का भविष्य भी काफी हद तक एक जैसा है. ऐसे में हमें एक-दूसरे के हितों का ध्यान रखना चाहिए. दोनों देशों को यह ध्‍यान रखना चाहिए कि कोई तीसरा देश हमारे बीच में आकर फायदा नहीं उठाए. इस दौरान ईरान की ओर से भारत के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की इजाजत मिलने की राजदूत फतहली ने पुष्टि करते हुए कहा कि हमने भारत के जहाजों को गुजरने की अनुमति दी है. हालांकि, उन्‍होंने यह नहीं बताया कि कितने जहाजों को अनुमति मिली है.

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