- इंडिया गठबंधन के सभी दल आज बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालेंगे
- कांग्रेस ने सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को पार्टी झंडे की बजाय तिरंगा लेकर प्रदर्शन करने को कहा है
- प्रदर्शन का उद्देश्य इसे लोकतांत्रिक विरोध दिखाना है ताकि छात्र, सामाजिक संगठन और आम लोग जुड़ सकें
इंडिया गठबंधन के सभी दल आज एक बार फिर दिल्ली में बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालेंगे. सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर अब सर्वोच्च न्यायालय तक विरोध करने का ऐलान किया गया है, लेकिन ऐसे में इस प्रदर्शन को विपक्षी दलों के प्रदर्शन की वजह लोकतांत्रिक विरोध बताया गया है. सूत्रों के मुताबिक इस प्रदर्शन की तस्वीर को बदलने की रणनीति तय की गई है. दरअसल पिछले दो दिनों से दिल्ली में जारी प्रदर्शन में कई अलग-अलग लोगों की भूमिका को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. प्रदर्शन से ठीक पहले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक वीडियो संदेश भी जारी करके सामाजिक संगठन और अन्य लोगों से आज के प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है.
क्या है इस रणनीति को बदलने की इनसाइड स्टोरी?
इंडिया गठबंधन एक बार फिर दोपहर 2 बजे बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने जा रहा है. ऐसे में सूत्रों के मुताबिक सभी गठबंधन नेताओं को ये संदेश कांग्रेस की तरफ से दिया गया है कि आज के प्रदर्शन में पार्टी के झंडे की जगह हाथों में तिरंगा लेकर प्रदर्शन करना है. सूत्रों के मुताबिक इस रणनीति के पीछे की यही वजह है कि प्रदर्शन एक लोकतांत्रिक विरोध लगे और इसमें छात्र और सामाजिक संगठनों के लोग भी शामिल हो सकें.

दिल्ली में पिछले हफ़्ते विपक्ष के विरोध प्रदर्शन में ज़्यादा कांग्रेस पार्टी के ही झंडे देखने को मिले, जिसको लेकर असहज स्थिति इंडिया गठबंधन के बाक़ी दलों के बीच में देखने को मिली. पिछले चार दिनों के प्रदर्शन में कई बड़े विपक्षी नेता शामिल भी नहीं हुए, ऐसे में विपक्षी एकता पर भी कई सवाल खड़े होते हुए दिखाई दिए. इसीलिए आज के प्रदर्शन के लिए काफ़ी चीजों को बदला गया है.
- सभी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के हाथ में पार्टी के झंडे की जगह तिरंगा होगा
- इंडिया गठबंधन के सभी नेताओं को कांग्रेस ने कार्यकर्ताओं को भी बुलाने के लिए कहा था. ऐसे में आज अन्य दलों जैसे TMC, समाजवादी पार्टी और लेफ्ट पार्टी के कार्यकर्ता भी होंगे.
- इंडिया गठबंधन के प्रदर्शन में आज वकीलों और सामाजिक संगठन को भी शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है.
- प्रदर्शन का नाम रखा गया है "चलो दिल्ली" मार्च फॉर डेमोक्रेसी.

इस बड़े बदलाव के ज़रिए विपक्षी दल और ख़ास तौर पर कांग्रेस पार्टी इसे राजनीतिक प्रदर्शन ना दिखाकर एक लोकतांत्रिक मूवमेंट दिखाना चाह रही है, जिसे Gen-Z और बाक़ी लोग भी जुड़ सकें. दिल्ली में पिछले दो दिनों में जितनी गिरफ़्तारी और सड़कों पर लोग दिखे हैं, उसको देखकर इस रणनीति को बदला गया है.
विपक्ष के चार दिन के प्रदर्शन में केवल सड़कों पर उनके नेता और कार्यकर्ता देखने को मिले, लेकिन जैसे ही CJP ने प्रदर्शन का ऐलान किया जो कि नहीं हुआ, लेकिन उसके बाद भी दिल्ली की सड़कों पर हजारों युवाओं को देखा गया. CEC के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए इसलिए विपक्षी दल इसे पीपल मूवमेंट में बदलना चाहते हैं. ताकि युवा और बाकी आम लोग भी इस विरोध में उनके साथ शामिल हों. हालांकि तमाम रणनीति तो तय किया गया है, लेकिन देखना दिलचस्प होगा कि यह रणनीति विपक्ष के लिए कितनी कारगर साबित होगी.
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