- कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे और ज्ञापन सौंपेंगे
- विपक्ष के मार्च में वोट चोरी रोकने, विशेष गहन पुनरीक्षण पर रोक और चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग शामिल होगी
- सीजेपी के प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर RJD सांसद मनोज झा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पूरी विपक्षी पार्टियां आज फिर से सड़कों पर होंगी. कांग्रेस समेत तमाम अपोजिशन दल आज सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेगा. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ऐलान किया है कि विपक्षी दल, युवा, सिविल सोसाइटी और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले लोग सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे. उन्होंने कहा कि इस मार्च के जरिए मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपकर कथित वोट चोरी रोकने, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर रोक लगाने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जाएगी.
कांग्रेस और इंडिया गठबंधन आज मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और कथित चुनावी गड़बड़ियों से जुड़े मुद्दों को लेकर दिल्ली में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन और मार्च करेगा.

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी कहा, "हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे. हम भारत के मुख्य न्यायाधीश से भी मिलने वाले हैं. मैंने एक पत्र लिखा है और राहुल गांधी ने भी पत्र लिखा है. हमने शाम 4 से 5 बजे के बीच एक बैठक तय की है, जिसमें हम उन्हें स्थिति से अवगत कराएंगे. हम उनसे कोई मांग तो नहीं कर सकते, लेकिन हाथ जोड़कर अपनी चिंताएं उनके सामने रखेंगे और उनसे हस्तक्षेप का अनुरोध करेंगे."
सीजेआई ने ज्ञापन संबंधी प्रस्ताव ठुकराया
हालांकि भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने इंडिया ब्लॉक के नेताओं के अनुरोध को ठुकरा दिया है, जिसमें उन्होंने कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर ज्ञापन सौंपने की बात कही थी. सीजेआई ने कहा कि मामला पहले से ही विचाराधीन है, इसलिए उन्हें याचिका दायर करके अदालत से संपर्क करना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट
इधर कॉकरोच जनता पार्टी के दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के आह्वान के खिलाफ दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बालों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर सख्त कार्रवाई का मामला भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है. आरजेडी के राज्य सभा सांसद मनोज झा ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर कहा कि आज जैसी स्थिति है उसमें सर्वोच्च न्यायालय रोशनी का सुराग होता है, कभी रोशनी की तरह जुगनू दिखे तो हम उधर जाते हैं. इस संदर्भ में मैंने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है.
मनोज झा ने एनडीटीवी से कहा, "जिस तरह प्रदर्शनकारियों के खिलाफ व्यवहार किया गया, पुलिस द्वारा बर्बरता की गई यह सब हमारे गणतंत्र के लिए अनुचित है. सुप्रीम कोर्ट ने कुछ निर्देश दिए थे उनका भी अनुपालन नहीं किया गया. मैंने अपनी याचिका के जरिए सर्वोच्च न्यायालय से गुजारिश की है कि वो भारत सरकार से कहे कि अपने लोगों के खिलाफ वह युद्ध बंद करे."

आरजेडी नेता ने कहा कि अब यह मुद्दा 'SIR ठीक था या नहीं' इसके काफी आगे चला गया है. उनके मुताबिक, कॉकरोच जनता पार्टी के बड़े नेताओं को गिरफ्तार किया गया, उन्होंने कोई हिंसा नहीं की थी, वो तो जहाज से उतर भी नहीं पाए थे. डेमोक्रेसी में कब्रिस्तान या श्मशान वाली शांति नहीं होनी चाहिए, डेमोक्रेसी में एक शोर होता है और बेहतर शांति के लिए होता है. अगर गतिरोध के स्वर को सरकार का प्रतिरोध या विरोध नहीं माना जाए तो यह गलत होगा.
जाहिर है, एसआईआर (SIR) और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठा राजनीतिक गतिरोध जल्द खत्म होगा, इसके आसार फिलहाल दिखाई नहीं देते.
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