
- सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से गृह मंत्रालय के पुश-बैक सर्कुलर की प्रक्रिया पर एक सप्ताह में जवाब मांगा है.
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पंजाब और बंगाल, दोनों राज्यों की संस्कृति और भाषा सीमावर्ती राज्यों के समान है.
- साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र को निर्वासन के संबंध में अपनाई जा रही मानक प्रक्रिया (SOP) बतानी चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अवैध प्रवासियों को निर्वासित करने के मामले में केंद्र सरकार से गृह मंत्रालय के 'पुश-बैक' सर्कुलर के संबंध में प्रक्रिया पर जवाब मांगा है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने "पुश-बैक" सर्कुलर पर अंतरिम रोक नहीं लगाई, जिसके परिणामस्वरूप बंगाली भाषी मुसलमानों का कथित रूप से निर्वासन हुआ.
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि पंजाब और बंगाल, दोनों राज्यों की संस्कृति और भाषा सीमावर्ती राज्यों के समान है. इसलिए केंद्र को निर्वासन के संबंध में अपनाई जा रही मानक प्रक्रिया (SOP) बतानी चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात को भी बनाया पक्षकार
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी कर उस याचिका पर जवाब मांगा है जिसमें दावा किया गया है कि देश भर से बंगाली भाषी मुसलमानों को पकड़कर बांग्लादेश भेजा जा रहा है.
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात को भी उन नौ राज्यों के साथ पक्षकार बनाया है, जो पहले से ही इस कार्यवाही में शामिल थे.
'सरकार की चिंताएं निराधार नहीं हैं'
सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस बागची की बेंच ने कहा कि सरकार की चिंताएं निराधार नहीं है. राष्ट्रीय सुरक्षा, संरक्षा, अखंडता, संसाधनों पर बोझ है, लेकिन आपको साझा संस्कृति को ध्यान में रखना चाहिए. साथ ही उन्होंने कहा कि बंगाल और पंजाब में भाषा एक ही है, सीमा हमें विभाजित करती है. हम चाहते हैं कि केंद्र स्पष्ट करे.
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