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भारत-जापान की दोस्ती में जुड़ा सुनहरा पन्ना, पीएम मोदी बोले- अगले 10 साल का रोडमैप तैयार

PM Modi Japan Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत-जापान की साझेदारी दोनों देशों के लिए ही नहीं, वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी जरूरी है. साथ ही कहा कि भारत और जापान के रिश्ते में सुनहरे अध्याय की नींव रखी है. अगले 10 साल का रोडमैप तैयार है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अगले 10 सालों में जापान से भारत में 10 ट्रिलियन येन के निवेश का टारगेट तय है. 

  • PM नरेंद्र मोदी ने जापान यात्रा के दौरान भारत-जापान साझेदारी को वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए आवश्यक बताया.
  • उन्‍होंने कहा कि अगले 10 वर्षों के लिए निवेश और नवाचार सहित नौ प्रमुख क्षेत्रों का रोडमैप तैयार किया है.
  • साथ ही उन्‍होंने कहा कि अगले 10 सालों में जापान से भारत में 10 ट्रिलियन येन के निवेश का टारगेट तय है.
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PM Modi Japan Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने शुक्रवार को एक संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित किया. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारत-जापान की साझेदारी दोनों देशों के लिए ही नहीं, वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी जरूरी है. साथ ही उन्‍होंने कहा कि भारत और जापान के रिश्ते में सुनहरे अध्याय की नींव रखी गई है और अगले 10 साल का रोडमैप तैयार है. इस दौरान पीएम मोदी ने इस रोडमैप के 9 विजन - इन्वेस्टमेंट, इनोवेशन, इकॉनमिक सिक्यॉरिटी, पर्यावरण, टेक्नॉलजी, हेल्थ, मोबिलिटी ,पीपल टु पील एक्सचेंज और ट्रेड पार्टनरशिप बताए. साथ ही कहा कि अगले 10 सालों में जापान से भारत में 10 ट्रिलियन येन के निवेश का टारगेट तय है. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा,  "हमने अगले 10 वर्षों में जापान से भारत में 10 ट्रिलियन येन के निवेश का लक्ष्य रखा है.  भारत और जापान के लघु एवं मध्यम उद्यमों और स्टार्टअप्स को जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाएगा." साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि यह कदम दोनों देशों की प्रतिबद्धता और विश्वास को दर्शाता है. 

नए और सुनहरे अध्‍याय की नींव रखी: पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा, "आज हमारी चर्चा उपयोगी और उद्देश्यपूर्ण रहीं. हम इस बात पर सहमत हैं कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और जीवंत लोकतंत्रों के रूप में हमारी साझेदारी न केवल दोनों देशों के लिए, बल्कि वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है."

उन्‍होंने कहा, "मजबूत लोकतंत्र एक बेहतर दुनिया के निर्माण में स्वाभाविक साझेदार होते हैं. आज, हमने अपनी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी में एक नए और सुनहरे अध्याय की नींव रखी है. हमने अगले दशक के लिए एक रोडमैप तैयार किया है. हमारे विजन के केंद्र में निवेश, नवाचार, आर्थिक सुरक्षा, पर्यावरण, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, गतिशीलता और लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान है."

जापानी तकनीक और... PM मोदी ने बताया विनिंग कॉम्बिनेशन  

पीएम मोदी ने कहा, "हमारा मानना ​​है कि जापान की तकनीक और भारत की प्रतिभा एक विनिंग कॉम्बिनेशन है.  हम जहां हाई-स्पीड रेल पर काम कर रहे हैं, वहीं अगली पीढ़ी की मोबिलिटी साझेदारी के तहत हम बंदरगाहों, विमानन और जहाज निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से प्रगति करेंगे. चंद्रयान 5 मिशन में सहयोग के लिए हम इसरो और जाक्सा के बीच हुए समझौते का स्वागत करते हैं. हमारा सक्रिय सहयोग पृथ्वी की सीमाओं को पार करेगा और अंतरिक्ष में मानवता की प्रगति का प्रतीक बनेगा."

उन्होंने बताया कि सतत विकास की दिशा में भारत और जापान एक सस्टेनेबल फ्यूल्स इनिशिएटिव और बैटरी सप्लाई चेन पार्टनरशिप की शुरुआत करने जा रहे हैं. इसके अलावा, दोनों देशों ने इकोनॉमिक सिक्योरिटी कोऑपरेशन इनिशिएटिव लॉन्च करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत महत्वपूर्ण और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया जाएगा. 

एक-दूसरे की ताकत का लाभ उठाने की जरूरत: इशिबा

इसके साथ ही जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने इस शिखर वार्ता के बाद कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए हमें एक-दूसरे की ताकत का लाभ उठाने की जरूरत है. 

इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जापान के अपने समकक्ष शिगेरू इशिबा के साथ शिखर वार्ता की, जिसका उद्देश्य व्यापार, निवेश और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों समेत समग्र द्विपक्षीय संबंधों को और बढ़ाना रहा.

मोदी के जापान की राजधानी पहुंचने के कुछ ही घंटों बाद दोनों नेताओं ने 15वें भारत-जापान शिखर सम्मेलन में मुलाकात की. शिखर वार्ता से पहले प्रधानमंत्री ने भारत-जापान व्यापार मंच को संबोधित करते हुए कहा कि जापान की प्रौद्योगिकी और भारत की प्रतिभा मिलकर इस सदी की तकनीकी क्रांति का नेतृत्व कर सकती हैं.

प्रधानमंत्री मोदी ने जापान के अपने पूर्व समकक्षों योशीहिदे सुगा और फुमियो किशिदा से भी मुलाकात की. 

बता दें कि जापान भारत का पांचवां सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश स्रोत है, जिसमें दिसंबर 2024 तक 43.2 अरब अमेरिकी डॉलर का संचयी निवेश दर्ज किया गया है. 
 

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