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Explainer: क्या मेट्रो और बुलेट ट्रेन भी हाइड्रोजन फ्यूल से चलेगी? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट, किसकी कितनी स्पीड, किराया

Hydrogen Train India: देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद से सोनीपत के बीच 12 स्टेशनों और हॉल्ट में दौड़ेगी. लेकिन क्या हाइड्रोजन से ट्रेन चलाना इतना आसान है, ये कितनी किफायती है, आइए जानते हैं कि विशेषज्ञ इस पर क्या कहते हैं.

Explainer: क्या मेट्रो और बुलेट ट्रेन भी हाइड्रोजन फ्यूल से चलेगी? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट, किसकी कितनी स्पीड, किराया
Hydrogen Train India: हाइड्रोजन ट्रेन जींद से सोनीपत तक
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  • हाइड्रोजन ट्रेन की तरह मेट्रो, बुलेट ट्रेन भी क्या हाइड्रोजन फ्यूल पर चल सकती है. इस पर एक्सपर्ट की राय
  • हाइड्रोजन ट्रेन की स्पीड 75 किमी प्रति घंटा है, जबकि बुलेट ट्रेन की स्पीड 320 किमी प्रति घंटा होती है
  • हाइड्रोजन ट्रेन का किराया, बुलेट ट्रेन के किराये के मुकाबले कितना होगा, ये भी जानना दिलचस्प होगा
नई दिल्ली:

Hydrogen Train Explainer: भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को पीएम मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद से सोनीपत के लिए रवाना किया. जींद से सोनीपत के बीच 89 किमी रूट पर 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ये ट्रेन दौड़ी. इस ट्रेन का न्यूनतम किराया 5 रुपये और अधिकतम 25 रुपये. इसके 12 स्टेशनों का सफर दो घंटे में पूरा होगा. लेकिन क्या इस हाइड्रोजन फ्यूल से भविष्य में मेट्रो और बुलेट ट्रेन भी चलाई जा सकती है. बुलेट ट्रेन, मेट्रो के मुकाबले ये कितनी किफायती है, कैसे बनती है और इसकी क्या चुनौतियां हैं, आइए जानते हैं विशेषज्ञों से...

हाइड्रोजन ट्रेन का किराया

  • 5 रुपये न्यूनतम किराया हाइड्रोजन ट्रेन का
  • मेट्रो का न्यूनतम किराया 20 से 25 रुपये
  • बुलेट ट्रेन का न्यूनतम किराया 100-125 रुपये प्रति किमी

हाइड्रोजन ट्रेन की स्पीड कितनी है

  • बुलेट ट्रेन की स्पीड- 320 किमी प्रति घंटा
  • बिजली ट्रेनों की गति- 160 से 180 किमी प्रति घंटा
  • हाइड्रोजन ट्रेन- 75 किमी प्रति घंटा

कैसे चलती है मेट्रो या बुलेट ट्रेन

आजकल की इलेक्ट्रिक ट्रेनें या मेट्रो के ऊपर लगी बिजली हाई पावर की लाइन जाती है, जिनसे उन्हें पावर और स्पीड मिलती है. जबकि हाइड्रोजन ट्रेन के भीतर फ्यूल सेल ट्रेनसेट होता है. इसमें हाइड्रोजन, ऑक्सीजन के रिएक्शन से ट्रेन के अंदर ही बिजली पैदा होती है. यानी इस ट्रेन के भीतर ही उसका ईंधन होता है, जैसे कभी भाप और डीजल इंजन ट्रेनों में होता था. पेट्रोल, डीजल की गाड़ियों से निकलने वाले धुएं के मुकाबले हाइड्रोजन ट्रेन प्रदूषण मुक्त होती हैं. इसमें सिर्फ पानी की भाप और गर्मी ही निकलती है. इस प्रदूषण मुक्त ट्रेन को ग्रीन ट्रेन भी कहते हैं. 

अभी मेट्रो या बुलेट ट्रेन का विकल्प नहीं

हाइड्रोजन फ्यूल एक्सपर्ट किरीट पारेख का कहना है कि हाइड्रोजन ट्रेन चलना अच्छी शुरुआत है. लेकिन अभी ये बिजली से चलने वाली ट्रेनों, मेट्रो या बुलेट ट्रेन का विकल्प नहीं बन सकती. इसका पहला कारण हाइड्रोजन खुद इलेक्ट्रिसिटी से बनती है, तो व्यावहारिक यही है कि जब बिजली है तो उससे ट्रेनें चलाएं बजाय उससे हाइड्रोजन बनाने के. इससे ये बिजली के मुकाबले महंगी है. भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी की तरह इसे भी किफायती बनाया जाता है तो रास्ते खुल सकते हैं. मौजूदा मेट्रो, रेलवे या बुलेट ट्रेन के आने वाले रूट में ये संभव नहीं है, क्योंकि उनका पूरा इन्फ्रास्ट्रक्चर बिजली से चलने वाली ट्रेन के लिए बना है. पूरा हाईवोल्ट की लाइनें यूज होती हैं. हालांकि सिक्योरिटी बड़ी चिंता नहीं है.

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    हाइड्रोजन ट्रेनों का कहां इस्तेमाल

    पारेख ने कहा कि जिन इलाकों में इलेक्ट्रिसिटी से ट्रेनें चलाना संभव नहीं है, जहां दूरदराज में मुश्किलें हैं, वहां हाइड्रोजन ट्रेन अच्छा विकल्प हो सकता है. लेकिन उसके लिए उन जगहों पर हाइड्रोजन प्रोडक्शन प्लांट भी लगाना होगा. देश का ज्यादातर रेलवे नेटवर्क का बिजलीकरण हो चुका है. 

    12 स्टेशनों के बीच, हाइड्रोजन ट्रेन का किराया कितना

    हाइड्रोज चालित ट्रेनें को लेकर दुनिया के कई देशों में ट्रायल चल रहा है. जर्मनी हाइड्रोजन पैसेंजर ट्रेनें चलाने वाला पहला देश बना था. चीन, फ्रांस, इटली, जापान जैसे देश भी हाइड्रोजन पायलट प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं. ऐसी ट्रेनों में वैसे दो से चार कोच होते हैं. लेकिन भारत ने 10 कोच वाली हाइड्रोजन ट्रेन तैयार की है. इसमें 2600 यात्री बैठ सकते हैं. यह दिखाता है कि भारत हाइड्रोजन ईंधन की शक्तिशाली ट्रेन बना चुका है. उत्तर रेलवे के जींद, गोहाना और सोनीपत को ट्रेन कनेक्ट करेगी. साथ ही पांडु पिंडारा, ललित खेड़ा, राबराह, लाठ, मोहाना, बरवासनी, भंभेवा, ईसापुर खेड़ी, बुटाना, खंदराई और सोनीपत न्यू स्टेशन पर भी ठहरेगी. 

      हाइड्रोजन ट्रेन का माइलेज कितना है?

      1. बिजली की ट्रेन : 15 से 20 यूनिट प्रति किलोमीटर
        यह सीधे ग्रिड से बिजली खींचती है, इसलिए सबसे कुशल और हाईस्पीड वाली होती है.
      2. डीजल ट्रेन: 3.5 से 4 लीटर डीजल प्रति किलोमीटर
        इसकी ऊर्जा क्षमता ज्यादा होती है, लेकिन यह भारी प्रदूषण फैलाती है.
      3. हाइड्रोजन ट्रेन : 0.8 से 1.2 किलो हाइड्रोजन प्रति किमी
        हाइड्रोजन की ऊर्जा क्षमता डीजल से लगभग 3 गुना, कम वजन का ईंधन लंबी दूरी 
      Hydrogen Train PM Modi

      Hydrogen Train PM Modi
      Photo Credit: PTI

      हाइड्रोजन कैसे बनती है

      पारेख का कहना है कि बिजली चालित ट्रेनें सबसे सस्ती हैं. इनमें 90 फीसदी ऊर्जा का इस्तेमाल होता है. हाइड्रोजन ट्रेन में इस्तेमाल फ्यूल बिजली से हाइड्रोजन बनाता है.फिर उसे कंप्रेस करके ट्रेन में स्टोर करते हैं और फ्यूल सेल से बिजली बनाई जाती है. इससे सिर्फ 30 फीसदी ऊर्जा ही निकल पाती है.ये भी पेट्रोल, डीजल से भी महंगी है, लेकिन प्रदूषण रहित है. एडवांस्ड सिक्योरिटी सिस्टम से लैस ये ट्रेन हाइड्रोजन लीक, आग की लपटों, गर्मी और धुएं का पता लगा सकती है.

      हाइड्रोजन ट्रेनों का फायदा

      हाइड्रोजन ट्रेनों से डीजल ट्रेनों की तरह ईंधन और इलेक्ट्रिक ट्रेनों की तरह हजारों किलोमीटर लंबी ओवरहेड बिजली की लाइनें बिछाने का करोड़ों रुपये का खर्च नहीं लगता.दुर्गम इलाकों में यह गेमचेंजर हो सकती हैं, जहां बिजली की लाइनें संभव नहीं है.

        हाइड्रोजन ट्रेन की चुनौतियां क्या हैं?

        1. पर्यावरण को बचाने के लिए पानी से ग्रीन हाइड्रोजन बनाना फिलहाल बहुत महंगा और ऊर्जा खपाने वाला काम है. अभी प्राकृतिक तौर पर मिलने वाली हाइड्रोजन का इस्तेमाल नहीं हो सकता.
        2. हाइड्रोजन सबसे हल्की होती है. इसे स्टोर करने के लिए गैस को 350 से 700 बार के अत्यधिक उच्च दबाव पर कंप्रेस करना या -253 डिग्री पर लिक्विड बनाना पड़ता है. बेहद महंगे कार्बन फाइबर सिलेंडरों और टैंकरों की जरूरत होती है.
        3. हाइड्रोजन को बिजली में बदलने वाले फ्यूल सेल में प्लैटिनम जैसी महंगी धातुओं का इस्तेमाल होता है. लगातार यूज से इन फ्यूल सेल की क्षमता घटती है. रखरखाव का खर्च बहुत अधिक है.
        4. हाइड्रोजन अत्यधिक ज्वलनशील और रिसाव के जोखिम वाली गैस है. लीकेज का पता लगाना मुश्किल होता है. ऐसे मे एडवांस सेंसर और अलर्ट सिर्टम की जरूरत है.
        Hydrogen Train PM Modi

        हाइड्रोजन ट्रेन पर एक्सपर्ट की राय

        1200 किलोवाट का हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम इसको पावर देगा.शिव नादर यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग में प्रोफेसर हरप्रीत सिंह अरोड़ा का कहना है कि ये सिस्टम बिजली पैदा करने के लिए फ्यूल सेल के अंदर हवा से ऑक्सीजन के साथ हाइड्रोजन को मिलाता है. यह बिजली ट्रेन की मोटरों को चलाती है.

        सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रोग्राम की सीनियर प्रोग्राम मैनेजर मौसमी मोहंती ने कहा कि हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन कुछ मायनों में एक इलेक्ट्रिक ट्रेन है, जो खुद बिजली खुद बनाती है. यह पावर लाइन से बिजली लेने की बजाय हाई प्रेशर टैंक में जमा हाइड्रोजन को ईंधन की तरह यूज करती है. फ्यूल सेल के अंदर हवा की ऑक्सीजन के साथ मिलकर बिजली बनाती है.

        ये भी पढ़ें - हाइड्रोजन ट्रेन सस्ती है या महंगी? एक किलोमीटर चलाने का खर्च कितना पड़ता है

        हाइड्रोजन प्रोडक्शन का लंबा सिस्टम

        सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रोग्राम की सीनियर प्रोग्राम मैनेजर मौसमी मोहंती ने कहा, हाइड्रोजन फ्यूल अलग से बनाने के लिए उसे कंप्रेस किया जाता है. उसे फिर रीफ्यूलिंग स्टेशन तक लाते हैं और ट्रेन में लगे स्टोरेज टैंक में भरते हैं. ट्रेन के लिए जींद में हाइड्रोजन प्लांट और रीफ्यूलिंग सेंटर बनाया गया है. हाइड्रोजन रीफ्यूलिंग में कंप्रेशन सिस्टम, हाई प्रेशर स्टोरेज टैंक, डिस्पेंसिंग पार्ट्स लगते हैं. रिफ्यूलिंग प्लांट में लीकेज और ज्यादा तापमान न हो, इसका ध्यान रखने को अलर्ट सिस्टम भी होता है.

        टिकाऊपन और किफायती विकल्प बनाना जरूरी

        ग्लोबल टेक्नोलॉजी फर्म SLB के प्रोडक्ट एनालिस्ट मैनाक मुखर्जी ने कहा, हाइड्रोजन का टिकाऊपन, उसका उत्पादन, उसका सपोर्ट करने वाला इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करना जरूरी है. ग्रीन हाइड्रोजन पर ज्यादा जोर देना सही है. लेकिन इस पर लंबे समय में ही अच्छे परिणाम निकल सकते हैं. हाइड्रोजन ट्रेनें डीजल ट्रेनों की जगह ले सकती हैं, जहां बिजली से चलने वाली ट्रेनें नहीं हैं. लेकिन भारत का 95 फीसदी रेलवे नेटवर्क का बिजलीकरण हो चुका है. लिहाजा इसका रणनीतिक इस्तेमाल हो सकती है. 

        ये भी पढ़ें - भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन में क्या है खास? 10 सवाल, 10 आसान जवाब-FAQ

        मिशिगन यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट

        मिशिगन यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट में ग्रीन हाइड्रोजन का इस्तेमाल सड़क, रेल, हवाई क्षेत्र और समुद्री आवाजाही में होने की संभावना पर जोर दिया गया है, जहां बिजली की क्षमता सीमित हो. जूल जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, अभी बिजली चालित ट्रेनें हाइड्रोजन से बने ईंधन के मुकाबले 3 से 8 गुना ज्यादा बेहतर हैं. ऐसे में इसे किफायती और व्यावहारिक बनाया जाना जरूरी है.

        यह भी पढ़ें - Exclusive: 'ट्रेन ही नहीं बड़े ट्रक और शिप भी हाइड्रोजन से चलेंगे', अश्विनी वैष्णव ने बताया आगे का प्लान

        ग्रीन हाइड्रोजन मिशन क्या है

        केंद्र सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन मिशन से बड़े पैमाने पर उत्पादन का लक्ष्य रखा है. साथ ही मौजूदा दरों से आधी से कीमत पर उत्पादन लाने का टारगेट है. रात के समय या ऐसे समय जब ग्रिड में सोलर और विंड एनर्जी की आपूर्ति ज्यादा होती है, उस सस्ती बिजली का उपयोग करके पानी से हाइड्रोजन बनाई जाएगी.रेलवे यात्री वाहनों और उद्योगों के साथ हाइड्रोजन प्लांट जगह-जगह बनाएगा, ताकि लागत कम रहे. भारतीय हाइड्रोजन ट्रेनों में फ्यूल सेल के साथ लिथियम आयन बैटरी का हाइब्रिड मॉडल है. जब ट्रेन ढलान पर या ब्रेक लगाती है, तो बैटरी चार्ज होती है, जिससे हाइड्रोजन की खपत कम रहती है.

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