ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच जारी लड़ाई अब होर्मुज जलडमरूमध्य पर आकर टिक गई है. यह जलमार्ग फारस की खाड़ी को दुनिया के दूसरे समुद्र से जोड़ता है. इसलिए इसका आर्थिक महत्व बहुत ज्यादा है. दुनिया के तेल का करीब 20 फीसदी इसी रास्ते से आता-जाता है. युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने इस रास्ते की नाकेबंदी कर दी है. इसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है. तेल का बाजार आसमान छू रहा है. इसे देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 21 मार्च को चेतावनी देते हुए ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य पर जहाजों का आवागमन सामान्य बनाने को कहा था.उन्होंने कहा था कि अगर ईरान ने होर्मुज को नहीं खोला तो उसके ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा. इसके जवाब में ईरान ने कहा कि अमेरिका-इजरायल के मित्र देशों को छोड़कर होर्मुज पूरी दुनिया के लिए खुला हुआ है. उसने कहा है कि अगर उसके ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया गया तो वह इजरायल और अरब देशों के जलशोधन संयंत्रों को निशाना बनाएगा. होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनातनी अभी खत्म नहीं हुई. आइए हम आपको बताते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य कब-कब रणनीतिक हथियार बना है.
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ट्रैफिक
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. इंटरनेशनल एनर्जी एसोसिएशन (आईईए)के मुताबिक 2025 में समुद्र से निकले तेल का करीब 25 फीसदी हिस्सा इसी होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गया था. आईईए के मुताबिक इसका करीब 80 फीसदी हिस्सा एशियाई देशों में गया था. इस साल 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने से पहले इस रास्ते से होकर करीब 140 जहाज रोज गुजरते थे. लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद यह संख्या 90 फीसदी से अधिक घट गई है. खबरों के मुताबिक युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक करीब 100 जहाज ही इससे होकर गुजरे हैं. और कई जहाजों पर हमले हुए हैं.
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान और ओमान दोनों का भौगोलिक अधिकार है. लेकिन इसके संकरे समुद्री मार्ग को अंतरराष्ट्रीय जल माना जाता है. वहां से सभी जहाजों को आने-जाने की अनुमति है. लेकिन सैन्य तैनाती और कई महत्वपूर्ण द्वीपों पर नियंत्रण के कारण ईरान का इस मार्ग पर काफी प्रभाव है.यह पहली बार नहीं है जब होर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल एक रणनीतिक हथियार के तौर पर किया जा रहा है. इससे पहले भी इस रास्ते में जहाजों की जब्ती और क्षेत्रीय संघर्ष के कारण इससे आवाजाही पर खतरा था. ईरान पहले भी अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों और तनाव के जवाब में इस जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी देता रहा है. लेकिन उसने इसे पूरी तरह से कभी बंद नहीं किया. आज भी भारत-चीन समेत कुछ दूसरे देशों के जहाज इस रास्ते से गुजर रहे हैं. इतिहास में ऐसे कुछ मौके आए जब होर्मुज जलडमरूमध्य पर यातायात प्रभावित हुआ.

ईरान इराक युद्ध का साया
साल 1980 में इराक के नेता सद्दाम हुसैन ने ईरान पर हमला कर दिया था. उन्हें ईरान से खतरा लग रहा था. यह युद्ध कई साल तक चला. लेकिन 1984 के बाद इराक ने ईरान की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के लिए ईरान के तेल टैंकरों पर हमला शुरू किया. इसका जवाब ईरान ने उन जहाजों पर हमले करके दिया, जो इराक को सामान की सप्लाई कर रहे थे. हमले बढ़ने के बाद कुवैत ने अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए मदद मांगी. पहले सोवियत संघ ने मदद की. लेकिन बाद में अमेरिका भी मदद के लिए आगे आया. उसने कुवैत के जहाजों को अपना झंडा दिया. उसकी नौसेना तेल टैंकरों की निगरानी करती थी. लेकिन अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस स्टार्क पर एक इराक विमान ने गलती से मिसाइल दाग दी. इसमें 37 अमेरिकी नौसैनिक मारे गए. वहीं 24 जुलाई 1987 को ब्रिजटॉन नाम का एक तेल टैंकर ईरान की ओर से बिछाई गई समुद्री सुरंग से टकरा गया था. हालांकि टैंकर इस हादसे में बच गया था.
साल 1988 में ईरान के साथ एक दिन का नौसैनिक युद्ध हुआ था. इस दौरान एक ईरानी यात्री विमान को गलती को मार गिराया गया था. इसमें 290 लोगों की मौत हो गई थी. हालांकि इस युद्ध के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद नहीं हुआ था, लेकिन यह रास्ता बेहद खतरनाक बन गया था.
परमाणु कार्यक्रम पर पाबंदी से भड़का ईरान
ईरान ने 2011-12 में अपने परमाणु कार्यक्रम पर पश्चिमी देशों की पाबंदी के विरोध में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी दी थी. इसके बाद यूरोपीय संघ और अमेरिका ने 2011-12 में ईरानी तेल खरीद पर पाबंदी लगा दी थी. लेकिन ईरान ने अपना रुख नरम रखते हुए इस रास्ते को बंद नहीं किया, लेकिन इस दौरान तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आया.
डोनाल्ड ट्रंप के पहले राष्ट्रपति कार्यकाल में अमेरिका मई 2018 में ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते से बाहर निकाल लिया गया था. इसके बाद से उसने ईरान पर पाबंदी लगा दी थी. उस समय के ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी ने अमेरिका के इस कदम के जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी दी थी. लेकिन उन्होंने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया.
होर्मुज जलडमरूमध्य में निशाना बनते तेल टैंकर
होर्मुज जलडमरूमध्य में 2019 में कई तेल टैंकरों पर हमले हुए. इसके लिए अमेरिका ने ईरान को जिम्मेदार ठहराया. वहीं 2021 में इजरायल से जुड़े एक तेल टैंकर पर ड्रोन अटैक हुआ.इसका आरोप भी ईरान पर लगा. लेकिन ईरान ने इन सभी आरोपों से इनकार किया. ईरान ने 2022 में ग्रीस के दो टैंकरों को जब्त कर लिया था तो 2024 में पुर्तगाल का झंडा लगा एक जहाज जब्त किया गया था. लेकिन इस दौरान ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद नहीं किया.
ईरान और इजरायल के बीच जून 2025 में भी 12 दिन का युद्ध चला था. इस दौरान भी ईरान ने इस जलडमरूमध्य के बंद करने की चेतवानी दी थी. लेकिन उसने ऐसा किया नहीं.
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