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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'जनअभियोग' का मंचन, लेकिन असली महाभियोग का क्या हुआ?

इंडिया गठबंधन अब संसद के शीतकालीन सत्र में एक बार फिर महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है. विपक्ष को उम्मीद है कि इस बार उसे डीएमके, वाईएसआर कांग्रेस और बीजू जनता दल जैसे दलों का भी समर्थन मिल सकता है.

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'जनअभियोग' का मंचन, लेकिन असली महाभियोग का क्या हुआ?
नई दिल्ली:

इंडिया गठबंधन की ओर से आयोजित की जाने वाली मॉक संसद, जिसे 'जन महाभियोग' नाम दिया गया है, बारिश के कारण रद्द कर दी गई. हालांकि, इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गठबंधन के सभी प्रमुख नेता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के राजाजी मार्ग स्थित आवास पर पहुंच चुके थे. वहीं, राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घोषणा की कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्तावित 'जन महाभियोग' अब शनिवार को तय समय, यानी शाम साढ़े तीन बजे आयोजित किया जाएगा.

राहुल गांधी ने यह भी कहा, '1 नवंबर को इंडिया गठबंधन का मार्च आयोजित किया जाएगा, जिसमें जो भी लोग शामिल होना चाहते हैं, उनका स्वागत है. हमारी मुहिम लोकतंत्र को कमजोर किए जाने के खिलाफ है और हम 'आइडिया ऑफ इंडिया' की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं.'

CEC के खिलाफ संसद में महाभियोग का क्या हुआ था? 

भले ही इंडिया गठबंधन शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रतीकात्मक महाभियोग प्रस्ताव पारित कर दे, लेकिन यह जानना जरूरी है कि संसद के भीतर ऐसे प्रस्तावों का अब तक क्या हश्र हुआ है. एसआईआर में कथित गड़बड़ियों और चुनावी धांधली के आरोपों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ संसद में पहले भी महाभियोग प्रस्ताव लाया जा चुका है. दरअसल, 12 मार्च 2026 को लोकसभा और राज्यसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग का नोटिस दिया गया था. हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था.

इस प्रस्ताव के समर्थन में लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे. नियमों के मुताबिक, महाभियोग प्रस्ताव के लिए लोकसभा में कम से कम 100 और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं. विपक्ष का यह प्रस्ताव 6 अप्रैल को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया था कि प्रस्ताव में लगाए गए आरोप "सिद्ध दुर्व्यवहार" की संवैधानिक कसौटी पर खरे नहीं उतरते.

इसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ राज्यसभा में एक और महाभियोग प्रस्ताव पेश किया गया, जिस पर 73 सांसदों के हस्ताक्षर हैं. इस प्रस्ताव पर अब तक सभापति ने कोई निर्णय नहीं लिया है. हालांकि, इस प्रस्ताव के सामने एक व्यावहारिक दिक्कत भी है. इसमें तृणमूल कांग्रेस के उन सांसदों के हस्ताक्षर शामिल हैं, जिनमें से कई अब पार्टी छोड़ चुके हैं और कुछ बाद में भाजपा के टिकट पर जीतकर दोबारा राज्यसभा पहुंच चुके हैं.

शीतकालीन सत्र में एक बार फिर महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी

इसी वजह से इंडिया गठबंधन अब संसद के शीतकालीन सत्र में एक बार फिर महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है. विपक्ष को उम्मीद है कि इस बार उसे डीएमके, वाईएसआर कांग्रेस और बीजू जनता दल जैसे दलों का भी समर्थन मिल सकता है. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और वाईएसआर कांग्रेस नेतृत्व भी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग उठा चुके हैं. वहीं, बीजू जनता दल इंडिया गठबंधन के मार्च में भी शामिल हो चुका है.

इसके अलावा, आम आदमी पार्टी ने भी स्पष्ट किया है कि संसद में महाभियोग के मुद्दे पर वह इंडिया गठबंधन के साथ खड़ी है. यही कारण है कि संसद का आगामी शीतकालीन सत्र महाभियोग के मुद्दे को लेकर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अब बड़ा सवाल यह है कि इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव कितना बढ़ेगा और क्या शीतकालीन सत्र सुचारु रूप से चल भी पाएगा या नहीं.

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Gyanesh Kumar
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