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थाली में परोसा जा रहा था 'जहर', सूरत में 2 साल से चल रहा नकली पनीर का खेल बेनकाब

सूरत के पांडेसरा में फैक्ट्री से इंडस्ट्रियल एसिड और पामोलिन तेल से बना नकली पनीर बरामद हुआ है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है. फैक्‍ट्री से 400 किलो घटिया गुणवत्ता वाला पनीर जब्त किया गया है. ये फैक्ट्री महाराष्ट्र लाइसेंस पर 2 साल से सूरत में चल रही थी.

थाली में परोसा जा रहा था 'जहर', सूरत में 2 साल से चल रहा नकली पनीर का खेल बेनकाब
  • सूरत के पांडेसरा इलाके में अवैध पनीर फैक्ट्री में इंडस्ट्रियल एसिड और पामोलिन तेल से नकली पनीर बनाया जा रहा था
  • छापेमारी में लगभग चौदह सौ किलो लूज पनीर बरामद हुआ जो खुले और अस्वच्छ माहौल में रखा गया था
  • इस नकली पनीर का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है और यह गुणवत्ता जांच में पूरी तरह फेल पाया गया था
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सूरत:

गुजरात के सूरत शहर से एक ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने हर घर की रसोई और हर थाली की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. पांडेसरा इलाके में चल रही एक अवैध पनीर फैक्ट्री पर छापेमारी के दौरान पता चला कि जिस पनीर को लोग सेहत का खजाना समझकर खा रहे थे, वह पनीर असल में 'ज़हर' था. इंडस्ट्रियल एसिड और पामोलिन तेल जैसे खतरनाक तत्वों से तैयार यह पनीर न सिर्फ घटिया क्वालिटी का था, बल्कि जांच में पूरी तरह 'फेल' और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पाया गया.  

इंडस्ट्रियल एसिड से फाड़ा जाता था दूध

सूरत में नकली पनीर बनाने वाली फैक्‍ट्री पर छापेमारी 3 मार्च 2026 को शहर की S.O.G. टीम और फूड विभाग द्वारा संयुक्त रूप से की गई थी. पांडेसरा की भीड़भंजन सोसायटी में स्थित इस यूनिट पर जब अधिकारियों ने छापा मारा, तो अंदर का नजारा बेहद चौंकाने वाला था. पनीर बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह अस्वच्छ और नियमों के खिलाफ चल रही थी. जहां आमतौर पर दूध को फाड़ने के लिए नींबू या फूड-ग्रेड सामग्री का उपयोग किया जाता है. लेकिन यहां इंडस्ट्रियल एसिड का इस्तेमाल किया जा रहा था. ये एक ऐसा केमिकल है, जो औद्योगिक कामों के लिए इस्‍तेमाल होता है, न कि खाने की चीज़ों के लिए. 

1400 किलोग्राम लूज पनीर बरामद

छापेमारी के दौरान करीब 1401 किलोग्राम लूज पनीर बरामद किया गया, जो खुले में और बेहद गंदी परिस्थितियों में रखा गया था. इसके साथ ही पामोलिन तेल के डिब्बे, एसिडिक केमिकल्स और पनीर बनाने की मशीनरी भी जब्त की गई. इस पूरे ऑपरेशन में कुल ₹28,44,170 का मुद्दामाल कब्जे में लिया गया, जो इस बात का संकेत है कि यह कारोबार छोटे स्तर का नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर संगठित तरीके से चल रहा था.

लैब टेस्‍ट में फेल हुआ पनीर 

लैब जांच में यह पनीर 'सब-स्टैंडर्ड' पाया गया यानी यह गुणवत्ता के सभी मानकों पर फेल पाया गया. अधिकारियों के अनुसार, इस पनीर का सेवन करना सीधे तौर पर स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है. जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि यह अवैध कारोबार कोई नया नहीं था, बल्कि पिछले करीब दो साल से लगातार चल रहा था. सूत्रों के मुताबिक, इस यूनिट में रोजाना लगभग 400 किलो नकली पनीर तैयार किया जाता था और उसे सूरत के अलग-अलग इलाकों में सप्लाई किया जाता था.

लाइसेंस महाराष्‍ट्र से लिया, प्रोडक्‍शन सूरत में... 

यह पनीर शहर के स्थानीय बाजारों, छोटे-बड़े होटलों, ढाबों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं तक पहुंचता था, जिससे हजारों लोग रोजाना अनजाने में इस जहरीले पनीर का सेवन कर रहे थे. यह मामला सिर्फ एक फैक्ट्री तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे शहर में फैले एक बड़े सप्लाई नेटवर्क का हिस्सा था. इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि इस यूनिट का लाइसेंस महाराष्ट्र का था, जबकि उत्पादन और वितरण पूरी तरह सूरत में हो रहा था. कंपनी नियमों को दरकिनार कर दूसरे राज्य के लाइसेंस का इस्तेमाल कर यहां अवैध कारोबार चला रही थी. 

'जहरीला' पनीर कर सकता है किडनी फेल

इस पूरे मामले में मुख्य आरोपी महेश कुमार शर्मा के खिलाफ पांडेसरा पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई है. पुलिस का कहना है कि आरोपी लंबे समय से इस अवैध नेटवर्क को संचालित कर रहा था और इससे भारी मुनाफा कमा रहा था. डॉक्टर के अनुसार, इंडस्ट्रियल एसिड और गैर-खाद्य केमिकल से तैयार पनीर शरीर के लिए बेहद खतरनाक होता है. इससे फूड पॉइजनिंग, पेट और आंतों में संक्रमण, लीवर और किडनी पर गंभीर असर पड़ सकता है. डॉक्टरों का मानना है कि अगर लंबे समय तक ऐसे पनीर का सेवन किया जाए, तो यह किडनी फेल जैसी जानलेवा स्थिति भी पैदा कर सकता है।

नियमों की खुलेआम उड़ रही थी धज्जियां

4 अप्रैल 2026 को प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत पूरे राज्य में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, शुद्धता और सही लेबलिंग सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं. फिलहाल के समय में 'Paneer Analogue / Vegetable-Fat Paneer Alternative' जैसे उत्पादों का इस्तेमाल बढ़ने से उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही थी, जिसे ध्यान में रखते हुए स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि दूध की जगह वेजिटेबल फैट या स्टार्च से बने उत्पादों को 'पनीर' के नाम से बेचना गैरकानूनी होगा. ऐसे उत्पादों पर 'Analogue' शब्द का स्पष्ट उल्लेख अनिवार्य रहेगा. सरकार ने होटल और रेस्टोरेंट सहित सभी फूड बिजनेस ऑपरेटर्स को पारदर्शिता बरतने की चेतावनी दी है और गलत जानकारी देना या ग्राहकों को गुमराह करना दंडनीय अपराध माना जाएगा. साथ ही नियमित निरीक्षण, सैंपलिंग और जांच के जरिए नियमों के पालन पर कड़ी नजर रखी जाएगी. प्रशासन ने उपभोक्ताओं से भी अपील की है कि वे खाद्य पदार्थ खरीदते समय लेबल ध्यान से पढ़ें और किसी भी संदिग्ध मामले में शिकायत करें, ताकि बाजार में पारदर्शिता बढ़े और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आए. 

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सूरत का यह मामला सिर्फ एक फैक्ट्री का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की लापरवाही और निगरानी की कमी को उजागर करता है. सवाल यह है कि आखिर दो साल तक यह ज़हरीला खेल कैसे चलता रहा और जिम्मेदार एजेंसियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? ऐसे और कितने लोग है जो इस तरह से लोगो के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही है इस दिशा में भी पुलिस और फूड विभाग जांच कर रही है. फिलहाल प्रशासन हरकत में है, लेकिन इस घटना ने हर उपभोक्ता को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि उसकी थाली में परोसी जा रही चीज़ें कितनी सुरक्षित हैं.

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