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PNB में 10 करोड़ का घोटाला? महिला कर्मचारी ने उड़ाए ग्राहकों के पैसे; एक पासबुक से खुल गया पूरा राज

ग्रेटर नोएडा में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की एक ब्रांच में 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का कथित घोटाला सामने आया है. CBI इसकी जांच कर रही है. 

PNB में 10 करोड़ का घोटाला? महिला कर्मचारी ने उड़ाए ग्राहकों के पैसे; एक पासबुक से खुल गया पूरा राज
PNB की ग्रेटर नोएडा की सेक्टर पाई स्थित ब्रांच में घोटाला सामने आया है. (सांकेतिक तस्वीर)
AFP
ग्रेटर नोएडा:

ग्रेटर नोएडा में पंजाब नेशनल बैंक की एक ब्रांच में ग्राहकों के खातों से कथित तौर पर 10.24 करोड़ रुपये निकालने का बड़ा मामला सामने आया है. बैंक की शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि ब्रांच में तैनात एक महिला कर्मचारी ने कथित तौर पर बैंक के दूसरे अधिकारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल कर ग्राहकों के खातों में अनधिकृत ट्रांजैक्शन किए. इस पूरे खेल में कई निजी व्यक्तियों के शामिल होने का भी आरोप है.

मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एंटी करप्शन ब्रांच, गाजियाबाद ने 29 अक्टूबर 2026 को FIR दर्ज की है. यह FIR पंजाब नेशनल बैंक के चीफ मैनेजर अजय कुमार पांडे की शिकायत पर दर्ज की गई है. मामला PNB की ग्रेटर नोएडा स्थित सेक्टर-पाई शाखा का है.

कैसे खुला 10.24 करोड़ की हेराफेरी का मामला?

बैंक की शिकायत के मुताबिक, इस कथित घोटाले का खुलासा उस समय हुआ जब संगीता नाम की एक ग्राहक अपने पति और बेटी के साथ पासबुक अपडेट कराने बैंक पहुंची. पासबुक में 16 सितंबर 2026 को हुए तीन ऐसे ट्रांजैक्शन दिखाई दिए, जिनकी जानकारी ग्राहक को नहीं थी.

ग्राहक के परिवार ने इन ट्रांजैक्शन पर सवाल उठाए और ब्रांच हेड से मिलने की कोशिश की. ब्रांच हेड की गैरमौजूदगी में बैंक की कर्मचारी दीपांशी ने उन्हें ट्रांजैक्शन सही होने का भरोसा दिलाया. बाद में जब ब्रांच हेड ने मामले की पड़ताल की तो इन ट्रांजैक्शन से जुड़े जरूरी वाउचर बैंक के रिकॉर्ड में नहीं मिले.

बैंक की शिकायत में दावा किया गया है कि पूछताछ के दौरान दीपांशी ने कथित तौर पर अनधिकृत ट्रांजैक्शन की बात स्वीकार की और बताया कि उसने अलग-अलग अधिकारियों की बैंकिंग यूजर आईडी का इस्तेमाल किया था. शिकायत के मुताबिक, इन ट्रांजैक्शन के रिकॉर्ड वाले वाउचर भी नष्ट कर दिए गए थे.

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अधिकारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल

बैंक की शुरुआती जांच में सामने आया कि कथित तौर पर दीपांशी ने शाखा के कई अधिकारियों के CBS यूजर आईडी का इस्तेमाल कर ग्राहकों के खातों से रकम निकाली. इनमें सीनियर ब्रांच मैनेजर, कस्टमर सर्विस एसोसिएट और अन्य अधिकारियों की यूजर आईडी शामिल बताई गई हैं.

बैंक ने अपनी शिकायत में साफ किया है कि दीपांशी ऑफिस असिस्टेंट/सब-स्टाफ के पद पर तैनात थी और उसे अपने स्तर पर इस तरह के ट्रांजैक्शन करने की अनुमति नहीं थी. अलग-अलग अधिकारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड तक उसकी पहुंच कैसे हुई और इसमें किसी अन्य कर्मचारी की भूमिका थी या नहीं, इसकी जांच जरूरी बताई गई है.

अशुतोष पाठक के खाते में पहुंचती थी रकम

बैंक की शिकायत के मुताबिक, ग्राहकों के सेविंग अकाउंट से निकाली गई रकम सीधे अशुतोष पाठक के खाते में ट्रांसफर की जाती थी या फिर प्रदीप कुमार, मेम्बंती देवी, प्रियंका कुमारी, शांति देवी, शालिनी और सरोज देवी के खातों के जरिए आगे पहुंचाई जाती थी.

शिकायत में आरोप है कि इन खातों का इस्तेमाल रकम को अलग-अलग रास्तों से ट्रांसफर करने के लिए किया गया और आखिरकार बड़ी रकम अशुतोष पाठक से जुड़े खातों तक पहुंची. बैंक ने इस पूरे नेटवर्क में अन्य अज्ञात लोगों की भूमिका की भी आशंका जताई है.

FD में भी की गई हेराफेरी

इस कथित घोटाले का एक बड़ा हिस्सा ग्राहकों की फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD से जुड़ा है. बैंक की जांच में सामने आया कि कई FD में अशुतोष पाठक और अन्य लोगों को ज्वाइंट होल्डर बनाया गया. इसके बाद FD से जुड़े भुगतान वाले खाते की जानकारी बदली गई और कई FD को समय से पहले बंद करा दिया गया.

बैंक की शिकायत के मुताबिक, FD बंद होने के बाद मिलने वाली रकम संदिग्ध लाभार्थियों से जुड़े खातों में ट्रांसफर की गई.

FIR के साथ संलग्न बैंक की सूची में 49 FD ट्रांजैक्शन दर्ज हैं. इन FD को समय से पहले बंद कराकर ट्रांसफर की गई रकम का कुल आंकड़ा करीब 10.2371 करोड़ रुपये है.

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ग्राहकों के मोबाइल अलर्ट भी बंद करने का आरोप

बैंक ने अपनी शिकायत में एक और गंभीर आरोप लगाया है. इसके मुताबिक, कुछ ग्राहकों के खातों से जुड़े मोबाइल ट्रांजैक्शन अलर्ट को कथित तौर पर बंद या उनमें बदलाव किया गया, ताकि खाते से रकम निकलने के तुरंत बाद ग्राहकों को इसकी जानकारी न मिल सके.

बैंक का दावा है कि यह कोई एक-दो दिन की घटना नहीं थी, बल्कि करीब तीन साल तक अलग-अलग बैंकिंग क्रेडेंशियल का दुरुपयोग कर इस तरह के ट्रांजैक्शन किए गए.

किस-किस पर दर्ज हुई FIR?

CBI की FIR में बैंक कर्मचारी दीपांशी और अशुतोष पाठक के अलावा अन्य निजी व्यक्तियों तथा अज्ञात सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है. बैंक की शिकायत में प्रदीप कुमार, मेम्बंती देवी, प्रियंका कुमारी, शांति देवी, शालिनी और सरोज देवी के नाम भी शामिल हैं.

CBI ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 61(2), 316, 318 और 344, आईटी एक्ट की धारा 66 और 43 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है.

मामले की जांच CBI के डिप्टी एसपी डॉ. जाहिर अख्तर को सौंपी गई है.

अभी कई सवालों के जवाब तलाश रही CBI

बैंक ने अपनी शिकायत में कहा है कि फिलहाल 10.24 करोड़ रुपये के अनधिकृत ट्रांजैक्शन की पहचान हुई है. ग्राहकों के खातों का मिलान और ट्रांजैक्शन की विस्तृत जांच अभी जारी है. जांच में प्रभावित खातों और लाभार्थियों की संख्या बढ़ सकती है.

बैंक ने अपने स्तर पर कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया भी शुरू की है. वहीं CBI अब यह पता लगाएगी कि इस कथित घोटाले में किन-किन लोगों की भूमिका थी, बैंक अधिकारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल कैसे हुआ और ग्राहकों की रकम आखिर किन-किन खातों में पहुंची.

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