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दो कलाकार आमने-सामने, CM योगी के गढ़ में कैसे रोचक हुआ मुकाबला? जानें क्या कहते हैं सीट के समीकरण

BJP का दावा है कि रामगढ़ताल के आसपास के विकास से लेकर तीन दशक से बंद पड़े फर्टिलाइजर का शुरू होना, एम्स बनना, प्रस्तावित मेट्रो, सड़कों का चौड़ीकरण इस चुनाव में उसे वोट दिलाएंगे.

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दो कलाकार आमने-सामने, CM योगी के गढ़ में कैसे रोचक हुआ मुकाबला? जानें क्या कहते हैं सीट के समीकरण
गोरखपुर:

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में अंतिम चरण में कुल 13 सीटों पर मतदान होना है. इन 13 सीटों में वाराणसी के बाद अगर सबसे ज़्यादा किसी सीट की चर्चा है तो वो है गोरखपुर. गोरखपुर यानी बाबा गोरखनाथ की धरती, गोरखपुर यानी धार्मिक पुस्तकों के केंद्र गीता प्रेस का शहर, गोरखपुर आज़ादी के आंदोलन के दौरान भी चर्चा में रहा था. गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की भी कर्मभूमि रही है. यहां इस बार लोकसभा चुनाव में सीधी लड़ाई बीजेपी बनाम समाजवादी पार्टी के बीच मानी जा रही है. 

कौन कौन हैं मैदान में?
गोरखपुर लोकसभा सीट पर इस बार लड़ाई हीरो बनाम हीरोइन की है. यहां से बीजेपी ने वर्तमान सांसद और भोजपुरी/बॉलीवुड स्टार रवि किशन पर एक बार फिर विश्वास जताया है. वहीं समाजवादी पार्टी ने भोजपुरी फ़िल्म कलाकार रहीं काजल निषाद को प्रत्याशी बनाया है. रवि किशन 2019 में भी बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं वहीं काजल निषाद ने चुनावी राजनीति की शुरुआत कांग्रेस से 2012 में की थी. इसके बाद वो सपा के टिकट पर विधानसभा और मेयर का चुनाव लड़ चुकी हैं लेकिन सफलता अबतक हाथ नहीं लगी है.

गोरखपुर में गोरक्षा पीठ का महत्व क्या है?
लंबे समय से गोरखपुर लोकसभा सीट पर गोरखनाथ पीठ पर लोगों ने अपना भरोसा जताया है. गोरखपुर में 1960 के दशक में गोरखनाथ पीठ के पीठाधीशर महंत दिग्विजय नाथ ने चुनाव जीता. इसके बाद 1980 के दशक महंत अवैद्यनाथ गोरखपुर से सांसद बने और 1990 के दशक में योगी आदित्यनाथ ने अपने संसदीय जीवन की शुरुआत कर लगातार 5 बार चुनाव जीता. 2017 में उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद गोरखनाथ पीठ से संसद का सदस्य नहीं है लेकिन 2018 के उप-चुनाव में प्रवीण निषाद के बाद 2019 के आम चुनाव में गोरखनाथ पीठ की पसंद रवि किशन ने चुनाव जीता और इस बार भी योगी आदित्यनाथ का आशीर्वाद रवि किशन को मिला है.

गोरखपुर में चुनावी समीकरण क्या हैं?
अगर बात करें मुद्दों की तो यहां विकास के साथ-साथ गोरखनाथ पीठ और योगी आदित्यनाथ का नाम यहां प्रमुख मुद्दा है. योगी आदित्यनाथ को पांच बार सांसद बनाने के बाद यहां जो विकास हुआ, उसकी वजह से लोगों में भरोसा अपने पूर्व सांसद और यूपी के वर्तमान मुख्यमंत्री पर ज़्यादा दिखाई देता है. बीजेपी का दावा है कि रामगढ़ताल के आसपास के विकास से लेकर तीन दशक से बंद पड़े फर्टिलाइजर का शुरू होना, एम्स बनना, प्रस्तावित मेट्रो, सड़कों का चौड़ीकरण, बिजली आपूर्ति में सुधार, शहर का सौंदर्यीकरण यहाँ का चुनाव में प्रमुख मुद्दे हैं.

गोरखपुर के चुनावी आंकड़े
गोरखपुर में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 20 लाख 74 हज़ार है. इस सीट में विधानसभा की 5 सीटें आती हैं और सभी पर बीजेपी का कब्ज़ा है. माना जाता है कि निषाद वोटर्स की आबादी की वजह से सपा ने 2009 को छोड़कर आठ बार निषाद को मैदान में उतारा है. ये अलग बात है कि 2018 के लोकसभा उपचुनाव को छोड़ दें तो हर बार सपा को यहां मात ही खानी पड़ी थी.

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