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गोवा में ST आरक्षण के लिए आबादी बताने वाली थी सरकार, हाई कोर्ट ने रोका, CM बोले सुप्रीम कोर्ट जाएंगे

गोवा हाई कोर्ट ने कहा कि यह हैरानी की बात है कि जनगणना आयुक्त ने खुद माना कि आबादी का सही आंकड़ा पता नहीं लगाया जा सकता, फिर भी 2001 की जनगणना के आधार पर कह दिया कि गोवा में ST समुदाय की आबादी अब भी कुल आबादी का 9.9% ही होगी.

गोवा में ST आरक्षण के लिए आबादी बताने वाली थी सरकार, हाई कोर्ट ने रोका, CM बोले सुप्रीम कोर्ट जाएंगे
बॉम्बे HC ने जनगणना आयुक्त को गोवा में ST समुदाय की अनुमानित आबादी के आंकड़े को जारी करने से रोका

बॉम्बे हाई कोर्ट ने भारत के जनगणना आयुक्त को गोवा में अनुसूचित जनजाति (ST) की अनुमानित आबादी के आंकड़े को जारी करने से रोक दिया है. इसी आंकड़े के आधार पर तय होना था कि गोवा विधानसभा में ST समुदाय के लिए कितनी सीटें रिजर्व होंगी. हाई कोर्ट के इस आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि उनकी सरकार विधानसभा में ST समुदाय के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस मामले को लेकर केंद्र सरकार के साथ बातचीत कर रही है. राज्य में विधानसभा चुनाव 2027 की शुरुआत में होने की उम्मीद है.

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने गुरुवार को एडविन लुसियो फर्नांडीस द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया. याचिकाकर्ता ने 'गोवा राज्य के विधानसभा क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधित्व के पुनर्समायोजन अधिनियम, 2025' को असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी थी. यह कानून संसद ने अगस्त 2025 में पास किया था और यह अगस्त 2026 से लागू होगा. इस कानून में कहा गया है कि ST समुदाय के लिए सीटें आरक्षित करने के लिए विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से तय किया जाएगा.

याचिका दायर करने वाले ने कहा कि यह कानून रोक लगाता है कि 2026 के बाद जो पहली जनगणना होगी, उसके पूरा होने तक लोकसभा या विधानसभा की आरक्षित सीटों में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता. उन्होंने कानून की धारा 3(1) को भी चुनौती दी, जो जनगणना आयुक्त को पिछली जनगणना के आधार पर गोवा में ST आबादी का अनुमान लगाने, राज्य की कुल आबादी में उनके अनुपात की गणना करने और इन आंकड़ों को अधिसूचित करने का अधिकार देती है.

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि एक बार अधिसूचना जारी हो जाने के बाद, वह अंतिम मानी जाएगी और उसे किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकेगी. लेकिन गुरुवार को अपने अंतरिम आदेश में, जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित एस. जामसांडेकर की खंडपीठ ने कहा कि जनगणना आयुक्त ने पिछली जनगणना (2001 या 2011) के आंकड़ों के आधार पर गोवा में अनुसूचित जनजाति की आबादी का पता लगाने या उसका अनुमान लगाने की कोशिश किया था.

अदालत ने बताया कि 10 सितंबर 2026 को केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय को भेजे गए एक पत्र में, जनगणना आयुक्त ने खुद स्वीकार किया था कि उपलब्ध डेटा के आधार पर गोवा की वर्तमान आबादी या किसी विशेष श्रेणी के तहत उसकी आबादी का अनुमान लगाना संभव नहीं है.

कोर्ट ने कहा कि यह हैरानी की बात है कि जनगणना आयुक्त ने खुद माना कि आबादी का सही आंकड़ा पता नहीं लगाया जा सकता, फिर भी 2001 की जनगणना के आधार पर कह दिया कि गोवा में ST समुदाय की आबादी अब भी कुल आबादी का 9.9% ही होगी.

सीएम सावंत क्या बोले?

मुख्यमंत्री सावंत ने कहा कि उनकी सरकार राज्य विधानसभा में ST समुदाय को आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है और उसने केंद्र के साथ इस मामले को लगातार उठाया है. उन्होंने 'X' पर एक पोस्ट में कहा कि यह कानून अनुसूचित जनजाति समुदाय के पक्ष में बनाया गया है. उन्होंने कहा कि अदालती मामलों के कारण आने वाली कानूनी बाधाओं को दूर करने के लिए गंभीरता से प्रयास किए जाएंगे.

सावंत ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र से आग्रह करेगी कि वह गोवा में ST समुदाय के हितों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाए. मुख्यमंत्री ने फिर दोहराया कि राज्य में अनुसूचित जनजाति समुदाय के हितों की रक्षा के लिए उनकी सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी.

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