विज्ञापन

'पहले सरेंडर करो, फिर सुनवाई करेंगे', तरुण तेजपाल की अपील सुनने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

यौन उत्पीड़न के केस में दोषी करार दिए गए तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने उनसे सरेंडर करने के बाद ही उनकी अपील पर सुनवाई करने को कहा है.

'पहले सरेंडर करो, फिर सुनवाई करेंगे', तरुण तेजपाल की अपील सुनने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
बॉम्बे हाई कोर्ट से मिली सजा के खिलाफ तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है.
NDTV/IANS
नई दिल्ली:

तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल को दो हफ्तों के भीतर सरेंडर करने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट तरुण तेजपाल की अपील पर सुनवाई कर रही थी.

तरुण तेजपाल को 2013 के रेप केस में 6 अगस्त को ही बॉम्बे हाई कोर्ट ने 10 साल की सजा सुनाई थी. इस सजा के खिलाफ तरुण तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. वहीं, गोवा सरकार भी सजा बढ़ाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई. 

इन पर जब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई तो तरुण तेजपाल और गोवा सरकार के वकीलों के बीच बहस भी देखने को मिली. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि पहले तरुण तेजपाल को दो हफ्तों के भीतर सरेंडर करना होगा. कोर्ट ने कहा कि 22 सितंबर तक तेजपाल को सरेंडर सर्टिफिकेट दाखिल करना होगा, उसके बाद ही उनकी अपील पर सुनवाई होगी.

लेकिन पहले सरेंडर क्यों?

सुप्रीम कोर्ट के नियमों के मुताबिक, किसी भी सजा के आदेश को चुनौती देने से पहले सरेंडर करना होता है और सरेंडर सर्टिफिकेट लगाना होता है या फिर अपील के साथ सरेंडर से छूट की अर्जी लगाई जाती है, जो सिंगल जज के सामने लिस्ट होती है.

सुनवाई के दौरान गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि तरुण तेजपाल की अपील तभी सुनी जा सकती है, जब वह पहले सरेंडर करने का सर्टिफिकेट दाखिल करें या फिर सरेंडर से छूट मांगनी होगी.

यह भी पढ़ेंः 'सच दबाया नहीं जा सकता', तहलका मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल की सजा पर बेटी ने क्या कहा?

Latest and Breaking News on NDTV

Photo Credit: IANS

सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या हुआ?

तरुण तेजपाल की पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने गोवा सरकार की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने पहले ही तेजपाल की सजा पर रोक लगा रखी है, इसलिए उन्हें दोबारा सरेंडर करने के लिए कहना उचित नहीं होगा.

उन्होंने कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट यह मानता है कि तेजपाल को राहत नहीं मिलनी चाहिए, तो वह हिरासत में जाने के लिए तैयार हैं.

वहीं, एसजी तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि CrPC की धारा 389 के तहत मिली राहत और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लागू प्रावधानों को स्वतंत्र रूप से देखा जाना चाहिए.

इस पर सिब्बल ने इस फैसले को अलग बताते हुए कहा कि मौजूदा मामले में किसी राहत की अवधि बढ़ाने की मांग नहीं कर रहे हैं. उनका कहना था कि कि तेजपाल को पहले से ही संरक्षण मिला है और मामले को 31 अगस्त को सुना जाना चाहिए. बहस के दौरान सिब्बल ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हाईकोर्ट के निष्कर्ष CCTV फुटेज से मेल नहीं खाते और न्याय किया जाना चाहिए.

6 अगस्त को हाई कोर्ट ने सुनाई थी सजा

2013 में तरुण तेजपाल पर अपनी एक जूनियर कलीग के साथ यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगा था. आरोप लगा था कि नवंबर 2013 में गोवा के एक लग्जरी होटल में एक इवेंट के दौरान तेजपाल ने लिफ्ट के अंदर उसके साथ यौन उत्पीड़न किया था. नवंबर 2013 में ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था. 

मई 2021 में निचली अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया था. निचली अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि ऐसे सबूत पेश नहीं किए गए, जिससे तेजपाल पर लगे आरोप साबित हो सकें. 

इसी फैसले को गोवा सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. 6 अगस्त को हाई कोर्ट की जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसंडेकर की बेंच ने तेजपाल को दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाई थी. हालांकि, तेजपाल के वकील ने हाई कोर्ट से अपील की थी कि सुप्रीम कोर्ट अपील करने के लिए सजा पर 8 हफ्ते की रोक लगाई जाए.

यह भी पढ़ेंः तरुण तेजपाल कैसे पहुंच गए जेल, वो बातें जो लोअर कोर्ट ने इग्नोर की, लेकिन हाईकोर्ट ने माना पुख्ता सबूत
 

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Tarun Tejpal, Tarun Tejpal Case, Tarun Tejpal Goa Rape Case, Supreme Court, Bombay High Court
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com