डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (DPAP) के चीफ गुलाम नबी आजाद ने रविवार को नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला के उस बयान से असहमति जताई, जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे को जिंदा रखा है और दिल्ली से कोई उम्मीद नहीं है. आजाद ने जोर देकर कहा कि भारत की विभिन्न सरकारों ने जम्मू-कश्मीर के विकास में योगदान दिया है, जबकि इस क्षेत्र में दशकों से जारी आतंकवाद के लिए पाकिस्तान जिम्मेदार है. गुलाम नबी आजाद ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "मैं फारूक साहब का सम्मान करता हूं, लेकिन उनका यह बयान पूरी तरह गलत है. 1947 से ही जम्मू-कश्मीर में हिंसा और अस्थिरता के लिए पाकिस्तान जिम्मेदार रहा है.
आजाद ने कहा, "आज PoK में क्या हालात हैं? वहां कितने लोग मारे गए हैं? वे आजादी चाहते हैं, वे वापस आना चाहते हैं और वे भारत के साथ रहना चाहते हैं."
इस सुझाव को खारिज करते हुए कि पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर को सुरक्षित रखने में मदद की है, गुलाम नबी आजाद ने युवाओं की मौत, अपने पतियों को खोने वाली महिलाओं के दुख और उग्रवाद की वजह से कश्मीरी पंडितों और मुस्लिम परिवारों के विस्थापन के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया.
उन्होंने कहा, "जम्मू-कश्मीर तबाह और बर्बाद हो गया था. अगर नौजवान मारे गए, तो इसकी वजह पाकिस्तान है. अगर हजारों लड़कियां और महिलाएं विधवा हो गईं, तो इसकी वजह पाकिस्तान है."
हर सरकार ने कश्मीर को दी प्राथमिकता...
गुलाम नबी आजाद ने जम्मू-कश्मीर के विकास में केंद्र की पिछली सरकारों की भूमिका का भी बचाव किया. उन्होंने सड़कों, सुरंगों, चार-लेन वाले राजमार्गों और कश्मीर तक रेलवे कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का हवाला दिया. आजाद ने जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के कार्यकाल के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र की सरकारों ने इस क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता दी है.
आज़ाद ने कहा, "जम्मू-कश्मीर में जो भी विकास हुआ है वह केवल भारत सरकार की वजह से हुआ है. सत्तारूढ़ दल के साथ सियासी मतभेदों को देश या उसके लोगों के प्रति शत्रुता के बराबर नहीं माना जाना चाहिए. बीजेपी और सरकार के साथ हमारी कई साल से सियासी लड़ाई रही है और यह जारी है. मैं बीजेपी में नहीं हूं, मैं तटस्थ हूं, लेकिन यह एक राजनीतिक लड़ाई है."
आजाद ने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच असहमति लोकतंत्र की एक सामान्य विशेषता है और उन्होंने कहा कि वह इस सुझाव से सहमत नहीं हैं कि केंद्र या दिल्ली का इरादा जम्मू-कश्मीर को नष्ट करने का है. मैं इस विचार से पूरी तरह असहमत हूं कि भारत या दिल्ली हमें खत्म कर देंगे.
फारूक अब्दुल्ला ने क्या कहा था?
बारामूला में कार्यकर्ताओं के एक सम्मेलन में बोलते हुए, फारूक अब्दुल्ला ने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की पहचान आज भी इसलिए बची हुई है क्योंकि पाकिस्तान अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीरियों का मुद्दा उठाता रहता है.
उन्होंने आगे कहा, "वे (भारतीय पक्ष) आज दुनिया के दबाव की वजह से चुप हैं. हमारा पड़ोसी (पाकिस्तान) हर जगह जाकर कहता है कि कश्मीर का मुद्दा अभी तक हल नहीं हुआ है. वे हमारी रक्षा कर रहे हैं. वरना, उनके (भारत के) इरादे ठीक नहीं हैं."
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