CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बीते दिनों दिल्ली में हुए प्रदर्शनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाले कांग्रेस के युवा कार्यकर्ताओं के साथ एक अनौपचारिक चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने राजनीति में अपने “दोस्तों और दुश्मनों” को लेकर दिलचस्प खुलासा किया. सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के युवा नेताओं के साथ बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि अब पार्टी में केवल बब्बर शेर ही बचे हैं. जो लालची और डरपोक लोग थे, वे जा चुके हैं. कोठी-सुरक्षा के लालच में या ईडी-सीबीआई के डर से, जैसे गुलाम नबी आजाद और सिंधिया. इस पर चुटकी लेते हुए कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने कहा, “वो सब आपके दोस्त थे.”
दादी ने कहा कि मेरा कोई बेस्ट फ्रेंड नहीं : राहुल गांधी
झेंपते हुए राहुल गांधी ने कहा, “मेरी बहन (प्रियंका गांधी) यहां बैठी है, वो जानती है कि वे (सिंधिया) मेरे दोस्त नहीं थे.” इसके बाद राहुल गांधी ने अपनी दादी इंदिरा गांधी से जुड़ा एक किस्सा सुनाया. राहुल गांधी ने कहा, “दादी से मेरी पॉलिटिकल ट्रेनिंग हुई है. एक बार मैंने उनसे पूछा कि आपका बेस्ट फ्रेंड कौन है? दादी ने कहा कि मेरा कोई बेस्ट फ्रेंड नहीं है. इस पर मैंने एक आंटी का नाम लेते हुए कहा कि वो हमेशा घर आती रहती हैं, इसलिए वो आपकी बेस्ट फ्रेंड हैं. इस पर दादी ने जवाब दिया कि नहीं, मैं उसकी बेस्ट फ्रेंड हो सकती हूं, लेकिन वो मेरी बेस्ट फ्रेंड नहीं है.”
यह किस्सा सुनाने के बाद राहुल गांधी खरगे की तरफ मुखातिब हुए और बोले, “मैं राजनीतिक व्यक्ति हूं. जो मेरा दोस्त दिखता है, वो दोस्त नहीं होता और जो मेरा दुश्मन दिखता है, वो मेरा दुश्मन नहीं होता. मेरे दोस्तों को पहचानना आपके लिए बहुत मुश्किल काम है.” मोदी सरकार में मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया 2020 की शुरुआत में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे. उन्हें एक समय राहुल गांधी का बेहद करीबी दोस्त माना जाता था.
उन्होंने कभी विचारधारा से समझौता नहीं किया : राहुल गांधी
बैठक में आगे राहुल गांधी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का उदाहरण देते हुए कहा कि वे दो बार मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गए, लेकिन फिर भी उन्होंने कभी विचारधारा से समझौता नहीं किया. राहुल गांधी ने यूथ कांग्रेस, एनएसयूआई और सेवा दल के करीब साठ कार्यकर्ताओं को पार्टी मुख्यालय में चाय पर आमंत्रित किया था. उन्होंने सभी का हौसला बढ़ाया और आंदोलन जारी रखने की नसीहत दी. राहुल गांधी ने कहा कि प्रदर्शन और संघर्ष आपके प्रशिक्षण का हिस्सा है. उन्होंने कार्यकर्ताओं को नए और रचनात्मक तरीके से विरोध प्रदर्शन करने की सलाह दी. साथ ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का सुझाव दिया, जिसे अब प्रदर्शन स्थल की सूची से सरकार ने हटा दिया है.
एक कार्यकर्ता, जिसके पैर में प्लास्टर लगा था, उससे राहुल गांधी ने कहा, “ये आपके लिए मेडल की तरह है.” इस बैठक के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और प्रियंका गांधी भी मौजूद रहे. राहुल गांधी ने दावा किया कि मोदी सरकार आठ से दस महीनों की मोहताज है.
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