- दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने थाईलैंड से आए कुख्यात गैंगस्टर हरसिमरन उर्फ़ बादल को गिरफ्तार किया
- हरसिमरन ने फर्जी पहचान पत्र से पासपोर्ट बनाकर विदेश भागने की कोशिश की और कई देशों में रहा
- हरसिमरन के खिलाफ हत्या, रंगदारी और आर्म्स एक्ट समेत 23 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली-एनसीआर का कुख्यात और बेहद ख़तरनाक गैंगस्टर हरसिमरन उर्फ़ बादल उर्फ़ सिमरन को थाईलैंड से आने के बाद गिरफ्तार कर लिया. इस पूरी कार्रवाई में केंद्रीय एजेंसियों ने अहम भूमिका निभाई, जिसके बाद आरोपी 26 नवंबर को भारत लाया गया और दिल्ली एयरपोर्ट पर ही उसे दबोच लिया गया. पुलिस के मुताबिक, हरसिमरन ने ‘राजेश सिंह' नाम के एक फर्जी पहचान पत्र के आधार पर पासपोर्ट बनवाया और इसी पासपोर्ट पर जनवरी 2025 में लखनऊ से बैंकॉक भाग गया था. इसके बाद वह दुबई, अज़रबैजान और रूस के रास्ते अमेरिका या यूरोप में बसने की कोशिश करता रहा, ताकि वहीं से गैंग को ऑपरेट कर सके.
हत्या, हत्या की कोशिश, रंगदारी समेत 23 मामले दर्ज
हरसिमरन उर्फ़ बादल के खिलाफ 23 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं. इनमें हत्या, हत्या की कोशिश, रंगदारी, और आर्म्स एक्ट जैसे गंभीर मामले शामिल हैं. जमानत पर बाहर आने के बाद वह 14 मामलों में कोर्ट में पेश ही नहीं हुआ. स्पेशल सेल ने पिछले साल नवंबर में हथियारों के साथ पकड़े गए महेंद्र सिंह से पूछताछ के दौरान हरसिमरन का नाम सामने आने पर जांच तेज़ की. विदेश पहुंचने के बाद हरसिमरन ने दिल्ली में अपने केस के गवाहों को धमकाया, उन्हें वापस बयान बदलने को कहा और 50 लाख रुपये की रंगदारी भी मांगी. इसके बाद उसके खिलाफ नया केस दर्ज हुआ और लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया.
विदेश मंत्रालय ने हर्सिमरन की घेराबंदी करने के लिए सबसे पहले उसका पासपोर्ट रद्द किया. इसके बाद बैंकॉक में उसकी लोकेशन ट्रैक की गई. थाईलैंड की स्थानीय एजेंसियों की मदद से उसे डिटेन किया गया. आखिरकार, 26 नवंबर 2025 को हर्सिमरन को भारत डिपोर्ट कर दिया गया. दिल्ली पुलिस ने दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरते ही उसे गिरफ्तार कर लिया.
रेसलर से बना मोस्ट वॉन्टेड गैंगस्टर
हरसिमरन उर्फ बादल एक रेसलर से मोस्ट वॉन्टेड गैंगस्टर बना है. 38 साल का बादल दिल्ली के शालीमार बाग का रहने वाला है. बचपन में कई अखाड़ों में कुश्ती करता था. इसी दौरान वह धीरे-धीरे स्थानीय गुंडों और बड़े अपराधियों के संपर्क में आया. लेकिन उसने अपना खुद का एक्टिव गैंग बनाया. रंगदारी न देने पर गोली चलाने तक से वह नहीं हिचकता था. जेल में उसकी मुलाकात कई बड़े गैंगस्टरों से हुई और वहीं से वह विदेश से गैंग ऑपरेट करने की प्लानिंग तक पहुंच गया.
बादल बैंकॉक से दुबई, दुबई से अज़रबैजान फिर रूस और बेलारूस बॉर्डर के रास्ते यूरोप और अमेरिका जाने की नाकाम कोशिश करता रहा. हर बार वह पकड़ा गया या डिपोर्ट कर दिया गया. आख़िरकार वह बैंकॉक पहुंचा, जहां उसे स्थानीय अधिकारियों ने पकड़ लिया. स्पेशल सेल आरोपी से पूछताछ कर रही है. पुलिस यह पता लगा रही है कि उसके नेटवर्क में कौन-कौन शामिल हैं. फर्जी पासपोर्ट किसने बनवाया, दिल्ली, यूपी और विदेशों में उसकी गतिविधियां कैसी थीं?
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