- डॉक्टर शाहीन और मुजम्मिल अल-फलाह यूनिवर्सिटी में मिले थे, यहीं दोनों ने की थी शादी
- अल-फलाह यूनिवर्सिटी में शाहीन कुछ ऐसे लोगों से मिली जिसके बाद उसने आतंक का रास्ता चुना
- फिलहाल सुरक्षा एजेंसियों की गिरफ्त है शाहीन और एजेंसियां उससे सारे राज उगलवा रही है
जम्मू-कश्मीर और दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय एक खतरनाक आतंकी मॉड्यूल के खुलासे के बाद जो कहानी सामने आई, वह किसी थ्रिलर फिल्म जैसी लगती है. एक डॉक्टर, एक असफल विवाह, एक नई मोहब्बत और धीरे-धीरे आतंक के दलदल में उतरती एक जिंदगी. इस नेटवर्क के केंद्र में हैं डॉ. शाहीन सईद और डॉ. मुजम्मिल शकील उर्फ मुजम्मिल गनई. यह कहानी सिर्फ एक रिश्ते की नहीं, बल्कि उस रास्ते की भी है जिसने पढ़ी-लिखी मेडिकल प्रोफेशनल को कट्टरपंथी संगठनों के चंगुल में धकेल दिया. इस आतंकी मॉड्यूल ने दिल्ली में लाल किले के करीब ब्लास्ट में 15 लोगों की जान ली है. अभी फिलहाल जेल की सलाखों के पीछे है.
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लखनऊ की रहने वाली 46 साल की शाहीन पढ़ाई में तेज थी लेकिन उसने इसका इस्तेमाल आतंक के लिए किया. इलाहाबाद से MBBS करने के बाद उसने फार्माकोलॉजी की. उसके पिता सरकारी कर्मचारी रहे हैं. शाहीन की पहली शादी 2003 में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. ज़फर हयात से हुई थी. दोनों के दो बच्चे हुए. पर यह रिश्ता 2013 में टूट गया था.
तलाक के बाद 2013 में उसने कानपुर के GSVM मेडिकल कॉलेज से अचानक छुट्टी ले ली. बिना जानकारी दिए कॉलेज आना बंद कर दिया. 8 साल तक कोई संपर्क नहीं किया और 2021 में उसकी नौकरी समाप्त कर दी गई. इसके बाद शाहीन की दूसरी शादी भी हुई ,उसका ये शौहर गाजियाबाद में कपड़े का कारोबार करता था लेकिन ये शादी भी ज्यादा दिन नहीं चली.
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अल-फलाह में मिले दोनों
इसके बाद उसकी जिंदगी में आया डॉ. मुजम्मिल, फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाला युवा डॉक्टर. मुजम्मिल यूनिवर्सिटी की फैकल्टी में उसका जूनियर था. दोनों एक-दूसरे के बेहद करीब आ गए. रोज मिलना-जुलना, कॉलेज में साथ काम करना और समान प्रोफेशन से दोनों का रिश्ता और मजबूत हुआ.
6000 का मेहर और शाहीन-मुज्जमिल का निकाह
एजेंसियों की पूछताछ में मुजम्मिल ने बताया कि सितंबर 2023 में दोनों ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी के पास एक मस्जिद में निकाह किया, जिसमें 5,000–6,000 रुपये का मेहर तय हुआ और दोनों ने कपल की तरह रहना शुरू कर दिया. शाहीन और मुजम्मिल की नज़दीकियाx अब सिर्फ एक रिश्ते का हिस्सा नहीं थी ये आगे चलकर एक खतरनाक नेटवर्क का रास्ता बन गईं.
यही वह समय था जब शाहीन की मुलाकात कुछ ऐसे चेहरों से हुई, जिन्होंने उनकी सोच पूरी तरह बदल दी. अल-फलाह यूनिवर्सिटी में रहते हुए छात्र के ग्रुप्स , धार्मिक गतिविधियों और कुछ संदिग्ध व्यक्तियों के सम्पर्क में आने लगी. इन्हीं मुलाकातों के दौरान उसे जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग जमात-उल-मोमिनात के सदस्यों ने संपर्क किया. एजेंसियों का दावा है कि इस समूह ने शाहीन को कट्टरपंथ,आतंकी विचारधाराऔर लॉजिस्टिक नेटवर्क बारे में सिखाना शुरू किया.
फिर आतंक फैलाने का काम
धीरे-धीरे शाहीन मेडिकल पहचान की आड़ में जम्मू-कश्मीर, दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा के बीच आवाजाही करने लगी और फंडिंग और मैसेज पहुंचाने की भूमिका निभाने लगी. इस कहानी में कुछ और चेहरे हैं उमर, आदिल और मुफ्ती इरफान. आदिल, उमर का जूनियर था. तीनों पहले से एक-दूसरे को जानते थे. मुफ्ती इरफान की दोस्ती मुजम्मिल से जम्मू-कश्मीर में इलाज के दौरान हुई. जांच में पता चला कि मुफ्ती इरफान पहले से आतंकियों से जुड़ा था, खासकर अंसार-उल-हिंद के हाफ़िज़ त्रात्रे से. यही नेटवर्क मुजम्मिल के माध्यम से शाहीन तक पहुंचा.
शाहीन का परिवार आज भी विश्वास नहीं कर पा रहा कि उनकी बेटी किसी आतंकी नेटवर्क में शामिल हो सकती हैृ. उसके पिता कहते हैं वह बचपन से मेधावी थी, संस्कारी थी. मुझे उसकी गिरफ्तारी पर यकीन ही नहीं हो रहा. भाई शोएब ने भी कहा हमारा परिवार ऐसा नहीं है. जो बताया जा रहा है, वह सच लग ही नहीं रहा. लेकिन परिवार से दूरी भी खुद एक सवाल है. शाहीन ने पिछले चार सालों से अपने परिवार से मिलना लगभग बंद कर दिया.
(ये रिपोर्ट एजेसिंयों की जांच और मुज्जमिल के बयान पर आधारित है. ये जानकारी एनडीटीवी को सूत्रों से मिली है)
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