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चाय बेचने वाले से लेकर 100 करोड़ का मालिक तक, ये 17 शात‍िर कैसे बने फर्जी IAS-IPS? 

फर्जी आईएएस-आईपीएस चर्चा में हैं. उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान में बीते 6 महीनों में 17 ऐसे नकली अफसर गिरफ्तार हुए हैं. इन अपराधियों के नेटवर्क, पुलिस जांच के गिरते स्तर, विशेषज्ञों की राय और कानूनी सजा के प्रावधानों की पूरी रिपोर्ट पढ़ें.

चाय बेचने वाले से लेकर 100 करोड़ का मालिक तक, ये 17 शात‍िर कैसे बने फर्जी IAS-IPS? 
UP, बिहार, MP और राजस्थान में 6 माह में 17 फर्जी IAS-IPS पकड़े गए
  • उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश में पिछले छह महीनों में सत्रह फर्जी IAS-IPS गिरफ्तार किए गए हैं
  • फर्जी अफसरों ने सरकारी पदों का दिखावा कर करोड़ों रुपए की ठगी, ब्लैकमेलिंग और यौन शोषण जैसे अपराध किए हैं
  • फर्जी आईएएस-आईपीएस बनने वाले आरोपियों के मामले गंभीर धोखाधड़ी और दस्तावेज़ों में छेड़छाड़ के हैं

Fake IAS IPS: देश को भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा के सबसे ज्यादा अधिकारी देने वाले राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश में फर्जी अफसरों की बाढ़ आई हुई है. बीते छह माह में इन राज्यों में 17 फर्जी आईएएस-आईपीएस पकड़े जा चुके हैं, जिन्होंने अधिकारी के पद के रुतबे, पावर व समाज में मिलने वाले सम्मान को ही ठगी और जालसाजी का जरिया बना रखा था.

बिहार में कोई 12वीं पास ठग फर्जी आईएएस बनकर 100 करोड़ का 'एंटीलिया' जैसा महल बना बैठा, तो क‍िसी फर्जी आईपीएस ने मध्य प्रदेश में सोशल मीडिया पर प्रोफाइल बनाकर करोड़ों की ठगी कर ली. कहीं सरकारी नौकरी और शादी के नाम पर ब्लैकमेलिंग और यौन शोषण किया गया, तो कहीं महाकाल मंदिर में वीआईपी ट्रीटमेंट के लिए भारत सरकार का फर्जी जॉइंट सेक्रेटरी बना गया. आइए जानते हैं कि इन फर्जी आईएएस-आईपीएस और ऐसे अपराधियों की मानसिकता व कानूनी प्रावधानों के बारे में. 

कहां-कितने फर्जी आईएएस-आईपीएस पकड़े गए?

  1. उत्तर प्रदेश-5
  2. बिहार-4
  3. मध्य प्रदेश-5
  4. राजस्थान-3
fake ias ips officer arrested in uttar pradesh bihar mp rajasthan

Fake IAS उमेदाराम पर छात्राओं को ठगने और उनका यौन शोषण करने का आरोप है.  

राजस्थान में फर्जी आईएएस

उमेदाराम: जोधपुर की रातानाडा थाना पुलिस ने जुलाई 2026 में उमेदाराम को गिरफ्तार किया. इस पर फर्जी आईएएस व आरएएस अधिकारी बनकर छात्राओं को ठगने और उनका यौन शोषण करने का आरोप है. फलोदी जिले के लोहावट स्थित कलऊ गांव का रहने वाला उमेदाराम प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाली छात्राओं को सरकारी नौकरी लगवाने का लालच देकर झांसे में लेता था.

निशांत कुमार: राजस्थान के बानसूर के नांगल भाव सिंह गांव निवासी निशांत कुमार ने दावा किया था कि उसने UPSC परीक्षा में 899वीं रैंक हासिल की है. इस दावे के बाद गांव में खुशी का माहौल बन गया. लोगों ने मिठाइयां बांटीं, जुलूस निकाला और सम्मान समारोह आयोजित किए गए. कई जनप्रतिनिधि भी उसे बधाई देने पहुंचे. लेकिन जब इस दावे की पड़ताल की गई, तो पूरी कहानी उलट गई. जांच में सामने आया कि जिस 899वीं रैंक का दावा किया जा रहा था, वह किसी अन्य उम्मीदवार की थी, जो उत्तर प्रदेश के आगरा का निवासी है. 

निशांत कुमार ने एक जैसे नाम का फायदा उठाकर खुद को चयनित उम्मीदवार के रूप में पेश किया. जब एडमिट कार्ड पर मौजूद QR कोड को स्कैन किया गया, तो स्कैनिंग के बाद जो जानकारी सामने आई, वह एडमिट कार्ड पर लिखी जानकारी से मेल नहीं खा रही थी. इसके बाद जब रोल नंबर को UPSC की आधिकारिक सूची में जांचा गया, तो वह सफल उम्मीदवारों में शामिल नहीं मिला.

जांच में यह भी सामने आया कि युवक ने केवल प्रारंभिक परीक्षा दी थी, लेकिन अंतिम चयन नहीं हुआ था. अपने झूठ को सच साबित करने के लिए उसने एडमिट कार्ड में छेड़छाड़ तक की. 6 मार्च को परिणाम घोषित होने के बाद गांव में निशांत के घर पर भारी भीड़ जुटी थी. उसे कंधों पर बैठाकर जुलूस निकाला गया और मंच से उसने अपनी संघर्ष की कहानी भी सुनाई. उसने सफलता का श्रेय परिवार, दोस्तों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को दिया था. मामला सामने आने के बाद अब यह सिर्फ झूठा दावा नहीं, बल्कि दस्तावेजों में छेड़छाड़ और लोगों को गुमराह करने का गंभीर मामला बन गया है. 

राजस्थान में फर्जी आईपीएस

अजरूद्दीन: हरियाणा की रेवाड़ी साइबर पुलिस ने फर्जी आईपीएस अजरूद्दीन को गिरफ्तार किया है. राजस्थान के भरतपुर जिले के गांव लाडलाका के रहने वाले अजरूद्दीन पर 19 लाख 76 हजार 600 रुपए की ठगी के आरोप हैं. उसने 7 मई 2026 को रेवाड़ी के यादव नगर निवासी बलबीर सिंह को फोन किया और खुद को दिल्ली द्वारका सेक्टर-16 से क्राइम ब्रांच का आईपीएस अधिकारी राठौर बताया. फिर उसने बलबीर सिंह को बताया कि उसका एक अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वीडियो डिलीट करवाने के नाम पर उससे करीब 19 लाख रुपए ठग लिए. 

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मध्य प्रदेश में फर्जी आईएएस

तृप्ति सिंह: फेक आईएएस अधिकारी तृप्ति सिंह पर चार एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं. एमपी के अशोकनगर की जेल में बंद तृप्ति सिंह के खिलाफ अब तक भोपाल और अशोकनगर में 2-2 मामले दर्ज हो चुके हैं. तृप्ति सिंह का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें वह अपनी दो सहेलियों को भी आईएएस अधिकारी बता रही है. भोपाल एडीसीपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि तृप्ति सिंह पर फर्जी आईएएस बनकर मध्य प्रदेश टूरिज्म में होटल लीज पर दिलाने के नाम पर सिवनी निवासी गगन उपवंशी से 50 लाख और बालाघाट निवासी रोहित लिल्हारे से 39 लाख रुपये की ठगी का केस दर्ज हो चुका है.

हिमांशु पांचाल: हिमांशु पांचाल अपने मकान के बाहर “IAS RAJ SONI-District Collector” नाम की फर्जी नेम प्लेट लगाकर रहता था. इंदौर के लसूड़िया थाना पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद हिमांशु पांचाल ने स्वीकार किया कि वह समाज में अपना रुतबा और प्रभाव बढ़ाने के उद्देश्य से फर्जी आईएएस अधिकारी बनता था. पुलिस ने उसके मकान से फर्जी नेम प्लेट, फोटो फ्रेम और कलेक्टर पद से जुड़ी भ्रामक सामग्री जब्त कर ली है. 

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अतुल कुमार: खुद को भारत सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय में संयुक्त सचिव बताने वाला फर्जी आईएएस अतुल कुमार द्वारकापुरी, दिल्ली का रहने वाला है. आमतौर पर एमपी के उज्जैन के महाकाल मंदिर में बाबा महाकाल की भस्म आरती का VIP पास मिलना काफी मुश्किल होता है. इसी का फायदा उठाने दिल्ली से उज्जैन पहुंचा और इसने न केवल सर्किट हाउस में बिना उचित दस्तावेज के दो कमरे बुक करा लिए, बल्कि महाकाल मंदिर के अधिकारियों पर तड़के 4 बजे होने वाली भस्म आरती में VIP ट्रीटमेंट देने का भारी दबाव बनाया.

जब आरोपी से प्रमाण मांगा, तो पहले वह बात टालने लगा, फिर रौब झाड़ते हुए कहा कि परिवार के कई लोग आईएएस हैं. साथ ही हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार का पत्र होने की बात भी कही. महाकाल थाना प्रभारी गगन बादल और मंदिर प्रबंधन ने जब उड्डयन मंत्रालय में सीधे क्रॉस-वेरिफिकेशन किया, तो पता चला कि इस नाम का कोई जॉइंट सेक्रेटरी है ही नहीं. पुलिस ने उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया.  

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मध्य प्रदेश में फर्जी आईपीएस

ऋषि यादव: यूपी के झांसी का रहने वाला ऋषि कुमार यादव खुद को साल 2016 बैच का आईपीएस अधिकारी बताता था. इस फर्जी आईपीएस को भोपाल की एमपी नगर थाना पुलिस ने हाल ही में गिरफ्तार किया है. इस पर बेरोजगारों को सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा देकर लाखों रुपयों की ठगी का आरोप है. खुद को कभी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का जॉइंट इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर तो कभी इंटेलिजेंस ऑफिसर बताता यह व्यक्ति प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं को टारगेट बनाता था. आरोप है कि इसने करीब एक दर्जन युवाओं को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के फर्जी जॉइनिंग लेटर तक थमा दिए. पुलिस ने उसके पास से फर्जी आईपीएस का आईडी कार्ड, कई फर्जी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद किए हैं.

विकास गौतम: ग्वालियर निवासी आठवीं पास विकास गौतम (उर्फ विकास यादव) खुद को साल 2020 बैच का फर्जी आईपीएस बताया करता था. इस फर्जी आईपीएस पर दिल्ली व एमपी की लेडी डॉक्टर समेत 50 से ज्यादा लोगों से 14 लाख से अधिक की ठगी का आरोप है. विकास कभी दिल्ली के मुखर्जी नगर में कोचिंग सेंटर के बाहर चाय का ठेला लगाता था. यहीं उसे सिविल सेवा की तैयारी कर रहे छात्रों के बीच रहते-रहते आईएएस/आईपीएस के रुतबे का चस्का लगा.

चस्का ऐसा कि उसने खुद को 'आईएएस अधिकारी' बना डाला. साल 2020 में यूपीएससी का रिजल्ट आते ही उसने इंस्टाग्राम पर चयनित अभ्यर्थियों की लिस्ट डालकर अपनी आईडी @Vikashyadav_ips बना ली. देखते ही देखते उसके सोशल मीडिया पर करीब 20 हजार फॉलोअर्स हो गए. यहां उसकी हिम्मत और बढ़ी और उसने खुद को ट्रेनी आईपीएस बताकर एक महिला डॉक्टर से दोस्ती की और मां के इलाज के नाम पर 25 हजार ठग लिए. मामला साइबर सेल में पहुंचा और दिल्ली पुलिस ने जब उसके ग्वालियर के घर पर रेड मारी, तो उसका पर्दाफाश हुआ. 

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उत्तर प्रदेश में फर्जी आईएएस

साधना: 14 जुलाई 2026 को उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की फरीदपुर पुलिस ने बदायूं जिले के बिल्सी पुलिस थाना क्षेत्र के ग्राम सतेती निवासी साधना को उसके घर से गिरफ्तार किया. उसके खिलाफ गांव पचौमी के अभिषेक कुमार ने 27 जून 2026 को एफआईआर दर्ज करवाकर आरोप लगाया था कि साधना ने खुद को आईएएस अधिकारी बताकर शादी करने, पति से 40 लाख मांगने और जान लेने की कोशिश की. पुलिस पूछताछ में पता चला कि साधना ने बीएससी करने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की थी. उसने फर्जी फोटो व वीडियो बनाकर खुद को आईएएस अधिकारी बताया था. 

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प्रीतम निषाद: खुद को आईएएस अधिकारी बताकर प्रीतम निषाद ने गोरखपुर की युवती से शादी की. वह सिर्फ 10वीं पास है. फर्जी आईएएस अधिकारी बनने वाले प्रीतम निषाद की यह सच्चाई शादी के बाद सामने आई.

डॉ. विवेक मिश्रा: खुद को साल 2014 बैच का आईएएस अधिकारी बताकर डॉ. विवेक मिश्रा पिछले छह साल से करोड़ों की ठगी कर रहा था. लोगों को ठगने के लिए अपनी वर्तमान पोस्टिंग गुजरात सरकार में प्रधान सचिव के पद पर बताया करता था. इतना ही नहीं, वह कहता था कि उसकी दोनों बहनें आईपीएस अधिकारी हैं.

सौरभ त्रिपाठी: लखनऊ के वजीरगंज थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है, जो खुद को भारतीय प्रशासनिक सेवा का अधिकारी बताकर लोगों पर रौब झाड़ रहा था. आरोपी की पहचान मऊ निवासी सौरभ त्रिपाठी के रूप में हुई है. पुलिस ने उसके कब्जे से छह लग्जरी गाड़ियां, लैपटॉप, नकली पहचान पत्र, विजिटिंग कार्ड, लाल-नीली बत्ती और कई फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं. 

विप्रा शर्मा: फर्जी आईएएस बनकर विप्रा शर्मा पर बेरोजगारों से कई करोड़ की ठगी का आरोप है. बरेली पुलिस विप्रा शर्मा और उसकी बहनों के खिलाफ 30 से अधिक मुकदमों में चार्जशीट कोर्ट में पेश कर चुकी है.  

बिहार में फर्जी आईएएस

मनीष गुप्ता: सबसे चौंकाने वाला मामला 8 अगस्त 2026 को बिहार में सामने आया. बिहार के खगड़िया में फर्जी IAS मनीष गुप्ता उर्फ चिक्कू ने 100 करोड़ का साम्राज्य खड़ा कर लिया था. पैतृक गांव खगड़िया में 7 हजार स्क्वायर फीट जमीन पर मुकेश अंबानी के एंटीलिया जैसा एक आलीशान, बहुमंजिला महल जैसा घर बनवा रखा था. 41 वर्षीय अविवाहित मनीष गुप्ता को पुलिस ने गिरफ्तार करके पूछताछ की, तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए. पुलिस रेड में गुप्ता के घर से 20 क्रेडिट कार्ड, आठ बैंक खातों के दस्तावेज और पांच आईफोन-आईपैड भी बरामद हुए. 

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गिरफ्तारी के बाद वह टेस्ला कार में बैठकर पुलिस थाने गया था. दसवीं बोर्ड में जिला टॉपर मनीष गुप्ता ने महज 12वीं तक पढ़ाई की. हालांकि वह यूपीएससी की तैयारी करने के नाम पर बिहार से दिल्ली आया और बाद में फर्जी आईएएस बनने का पूरा खेल रचा. बीते करीब 10 साल से वह कभी फर्जी IAS, तो कभी NSA का अंडरकवर एजेंट और कई अन्य सरकारी पदों का रौब दिखाकर लोगों से ठगी कर रहा था.

रितेश कुमार: इसी साल 2 फरवरी को छपरा में रितेश कुमार नाम के एक फर्जी IAS को गिरफ्तार किया गया. वह डीएम वैभव श्रीवास्तव से मिलने चला गया था, जहां उसने खुद को IAS बताया था. 

राजेश शुक्ला: औरंगाबाद में 3 अप्रैल 2026 को राजेश शुक्ला नामक फर्जी IPS को गिरफ्तार किया गया था. एक कारोबारी से उसने 1.20 लाख रुपए की मांग की थी. पुलिस को उसके पास से कई फर्जी आईडी कार्ड मिले थे.

श्रद्धांजलि देवी: इस नाम की फर्जी IAS को 7 अप्रैल 2026 को गिरफ्तार किया गया था. यह महिला ठेका दिलाने के नाम पर वसूली करती थी. 

फर्जी अफसर बनने की कई वजह

राजस्थान पुलिस के रिटायर्ड एएसपी ओमप्रकाश कटारिया NDTV से बातचीत में कहते हैं कि युवाओं में मेहनत करके यूपीएससी-पीएससी परीक्षा क्रैक करके अफसर बनने की बजाय फर्जी अधिकारी बनने की मानसिकता बढ़ती जा रही है. इसके पीछे चार मुख्य कारण हो सकते हैं:

बेरोजगारी: देश में बेरोजगारी और प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रतिस्पर्धा बढ़ चुकी है. ऐसे में कई युवा जल्द अमीर बनने और समाज में रौब झाड़ने के लिए फर्जी आईएएस-आईपीएस तक बन रहे हैं.

तकनीक का दुरुपयोग: आज के जमाने में मोबाइल के जरिए वित्तीय लेन-देन आसान हो गया है. ऐसे में फर्जी आईएएस-आईपीएस अधिकारी बनने वाले लोग तकनीक का दुरुपयोग करके लोगों को शिकार बना रहे हैं.

कमजोर सूचना तंत्र: पुलिस का सूचना तंत्र जमीनी स्तर पर पहले की तुलना में कमजोर हो गया है. पहले पुलिस को ऐसे मामलों की सूचना तुरंत मिल जाती थी, जबकि अब जब तक ये फर्जी आईएएस-आईपीएस पकड़ में आते हैं, तब तक तो लाखों-करोड़ों की ठगी कर चुके होते हैं.

जांच का गिरता स्तर: पहले ऐसे मामलों में पुख्ता जांच होती थी. केस कोर्ट में टिकता और आरोपियों को सजा तक होती, मगर बीते कुछ सालों से इस तरह की धोखाधड़ी और ठगी के केसों में जांच का स्तर गिर चुका है. जांच अधिकारी पुख्ता सबूत तक नहीं जुटा पाते हैं. ऐसे में आरोपियों को न केवल जमानत मिल जाती है, बल्कि वे केस में बरी तक हो जाते हैं. 

नकली अफसरों को हो सकती है पांच साल की सजा

राजस्‍थान हाईकोर्ट एडवोकेट हिमांशु ठोलिया के अनुसार इस तरह मामलों में सजा तक के कानूनी प्रावधान हैं. NDTV से बातचीत में एडवोकेट ठोल‍िया ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की व‍िभ‍िन्‍न धाराओं का ज‍िक्र करते हुए बताया क‍ि धारा 319 प्रतिरूपण द्वारा छल करने पर तो नकली आईएएस-आईपीएस बनने वालों को पांच साल तक की सजा भी हो सकती है.

बीएनएस की धारा 204 लोक सेवक का प्रतिरूपण: जो कोई व्यक्ति जानबूझकर खुद को किसी सरकारी पद पर होने का दिखावा करता है, जबकि वह असल में उस पद पर नहीं है, या किसी ऐसे पद पर मौजूद व्यक्ति का झूठा रूप धारण करता है, और उस पद का दिखावा करते हुए कोई काम करता है या करने की कोशिश करता है, इसमें कम से कम 6 महीने की सजा होती है, जिसे 3 साल तक बढ़ाया जा सकता है, और साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

बीएनएस की धारा 205 कपटपूर्ण आशय से लोक सेवक के उपयोग की पोशाक पहनना: जो कोई व्यक्ति, किसी खास तरह के सरकारी कर्मचारी वर्ग का न होते हुए भी, उस वर्ग के कर्मचारियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली पोशाक या पहचान-चिह्न जैसी कोई पोशाक या पहचान-चिह्न पहनता या रखता है इस इरादे से कि लोग यह मानें (या यह जानते हुए कि लोग ऐसा मान सकते हैं) कि वह उसी सरकारी कर्मचारी वर्ग का है तो उसे किसी भी तरह की जेल की सज़ा हो सकती है जो 3 महीने तक बढ़ सकती है, या ₹5000 तक का जुर्माना हो सकता है, या दोनों हो सकते हैं.

बीएनएस की धारा 319 प्रतिरूपण द्वार छल: किसी व्यक्ति पर 'बहुरूप धारण करके धोखा देने' का आरोप तब लगाया जाता है, जब वह किसी दूसरे व्यक्ति का रूप धरकर धोखा देता है, या जान-बूझकर एक व्यक्ति की जगह दूसरे व्यक्ति को पेश करता है, या यह बताता है कि वह या कोई अन्य व्यक्ति असल में वह नहीं है जो वह वास्तव में है. जो कोई व्यक्ति किसी दूसरे का रूप धरकर धोखाधड़ी करता है, उसे 5 साल तक की किसी भी तरह की जेल की सज़ा, या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं.  

 


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